सच्चा दांपत्य जीवन

शाम के करीब चार बज रहे थे। गुलमोहर एन्क्लेव के सेंट्रल पार्क में सुहागिन महिलाओं की चहल-पहल शुरू हो चुकी थी। लाल और गुलाबी जोड़ों में सजी धजी महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनने के लिए इकट्ठा हो रही थीं। इसी सोसाइटी में पिछले महीने ही शिफ्ट हुई राधिका भी अपनी पूजा की थाली लिए … Read more

शान

“नसीब आपने लिखा था उसका, भगवान नहीं!” श्रुति ने भी उसी तेज़ आवाज़ में जवाब दिया। “लेकिन मैं अपना नसीब आपको नहीं लिखने दूंगी। मैं आज अपना इंटरव्यू देकर आ रही हूँ। मुझे नौकरी मिल गई है। कल से मैं अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जिऊंगी। अगर इस घर में मुझे मेरी शर्तों पर, एक … Read more

वो बंधन सिर्फ कच्चे धागों का नहीं है – डॉ आभा माहेश्वरी

रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला था। पूरे गाँव में उत्साह का माहौल था। बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सजा हुआ था। हर बहन अपने भाई के लिए सबसे सुंदर राखी चुन रही थी। लेकिन गाँव के किनारे रहने वाली बारह वर्ष की अनन्या के चेहरे पर उदासी थी। उसका बड़ा भाई अर्जुन पिछले दो वर्षों से … Read more

पछतावे के चिराग – कायनात परवीन

हरियाली और शांति से घिरा नीलगिरी गाँव यूं तो बहुत शांत था, लेकिन गाँव के सबसे समृद्ध घर में रहने वाले राघवेंद्र जी का स्वभाव इसके बिल्कुल उलट था। राघवेंद्र जी एक मेहनती और सिद्धांतवादी इंसान थे, लेकिन उनकी सबसे बड़ी कमजोरी उनका अत्यधिक और अनियंत्रित गुस्सा था। उनकी छोटी सी बात पर आपा खो … Read more

विश्वासघात

“यह… यह क्या बकवास है!” विकास अपनी जगह से उछल पड़ा। “आप ऐसा नहीं कर सकते पिताजी! यह हमारा हक है! हम आपके खून हैं!” शिखा भी चीखने लगी, “जरूर इस रमेश मुनीम ने या किसी और ने आपके कान भरे हैं पिताजी! आप बुढ़ापे में अपना दिमागी संतुलन खो बैठे हैं। हम इसे कोर्ट … Read more

आख़िरी मौका

“तू इतनी सुंदर, इतनी पढ़ी-लिखी है। वह तो तेरे पैरों की धूल के बराबर भी नहीं है।” “तुझे यह सब सहने की कोई ज़रूरत नहीं है। अपना सामान बांध और घर आ जा। हम बैठे हैं न तेरी देखभाल के लिए।” दीनानाथ जी हमेशा काव्या को समझाते थे। “बेटा, घर ऐसे नहीं बसते। थोड़ा धैर्य … Read more

 निश्छल प्रेम

पीहू धीरे-धीरे कदमों से भीड़ को चीरती हुई सिद्धार्थ के पास पहुंची। उसने सिद्धार्थ के कुर्ते का कोना खींचते हुए मासूमियत से पूछा, “पापा, दादू फर्श पर क्यों सो रहे हैं? उन्हें वहां ठंड लग जाएगी। और आप सब लोग रो क्यों रहे हो? क्या दादू कहीं जा रहे हैं?” सिद्धार्थ ने अपनी आंसुओं से … Read more

पश्चाताप के आंसू

आज जब उन्होंने यह सब सुना तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने फोन कौशल्या जी के हाथ से छीन लिया और कॉल काट दिया। रघुनाथ जी गुस्से से कांप रहे थे। “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई अपनी ही बहू के चरित्र पर इस तरह कीचड़ उछालने की? और वो भी उस औरत के … Read more

जीवन-मंत्र

“हमेशा खुश रहना बिटिया, और इन चूड़ियों की तरह हमेशा खनकती रहना,” उसने मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा था। लेकिन मेरी किस्मत की चूड़ियां शायद बहुत कच्चे कांच की बनी थीं। मेरी शादी का सपना एक महीने के भीतर ही चकनाचूर हो गया। मेरा पति, राघव, जिसके साथ मैंने एक नई दुनिया बसाने … Read more

दुनिया की सबसे बड़ी दौलत

“अम्मा, यह क्या है?” मैंने पूछा। “तीस हजार हैं… रोहन की फीस के लिए। तुझे क्या लगा, तू मुझे कुछ नहीं बताएगा तो मुझे पता नहीं चलेगा? तेरी शक्ल देखकर मैं तेरा पूरा हाल पढ़ लेती हूँ। जब तू पैदा भी नहीं हुआ था, तब से जानती हूँ तुझे।” माँ की आवाज़ भर्रा गई थी। … Read more

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