दहलीज का मान
“मेरा दिमाग अब जाकर सही ठिकाने पर आया है, फैजान। जो लड़की अपने उन माँ-बाप के प्यार और भरोसे की नहीं हो सकी जिन्होंने उसे उंगली पकड़कर चलना सिखाया, वह कल तुम्हारी कैसे हो सकती है? और तुम… अगर तुम मुझसे वाकई सच्चा प्यार करते, तो मुझे इस तरह रात के अंधेरे में अपनों की … Read more