असली खूबसूरती – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका’

दिल्ली जैसे बड़े शहर की चमक-दमक में रहने वाली रिया हमेशा अपनी खूबसूरती पर गर्व करती थी। महंगे कपड़े, ब्रांडेड मेकअप और सोशल मीडिया पर हजारों फॉलोअर्स—यही उसकी दुनिया थी। ऑफिस में भी लोग उसकी तारीफ करते नहीं थकते थे, और रिया को लगता था कि खूबसूरती ही सब कुछ है। उसी ऑफिस में एक … Read more

सावन के रंग – भारती अनिल सोनी

आज सुबह से ही दादी मां अत्यंत उत्साह के साथ पूरे घर में दौड़ भाग कर रही हे,, 2 दिन बाद सावन की तीज आ रही हे,, ओर इस बार तो उनकी लाड़ली पोती की पहली तीज है,, तो वो खुद सारी तैयारियां अपने अनुसार करवा रही हे,, बाहर वाले बड़े पेड़ पर झूला डलवा … Read more

उधार का नसीब – विकास श्रीवास्तव 

बरसात की एक ठंडी रात थी। दस वर्षीय अमन अपनी बीमार माँ के सिरहाने बैठा था। घर में खाने का एक दाना भी नहीं था। माँ कई दिनों से बीमार थी और दवा के बिना उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। अमन हिम्मत करके गाँव की किराने की दुकान पर पहुँचा। उसने दुकानदार से कहा, … Read more

अपनों का साथ – अरुणा गर्ग

शिल्पा की शादी एक बड़े परिवार में हुई थी। दादा,दादी सास, सास ससुर,दो देवर और एक ननद जिसकी शादी चार साल पहले ही हो गई थी।जब शिल्पा के लिए वरूण का रिश्ता आया तो मम्मी-पापा को घर बार अच्छा लगा।पर उन्हें एक ही चिंता थी कि एकल परिवार में पली उनकी लाडली बेटी इतने बड़े … Read more

विश्वास – अरुणा गर्ग

मयंक शाम को अपनी दुकान बढ़ाकर घर जा रहा था। आगे मुड़कर गली में से गुजर रहा था। उसके थोड़ा आगे ही बच्चियां चल रही थीं।उनकी बातों से पता चला कि उन्हें आज कोचिंग से आने में देर हो गई और अब अंधेरा हो जाने से पहले घर पहुंच जाना चाहती थीं। तभी एक ने … Read more

रील मेकिंग – एम. पी. सिंह “मोहि “

आज के डिजिटल युग में अधिकांश युवाओं के लिए रील मेकिंग मनोरंजन का साधन बन गया है. मनोरंजन करते करते ज्ञान और कला मैं वृद्धि होनी स्वभाविक है. कुछ लोग अपनी इस कला को अपनी आय का ज़रिया बना लेते है.  छोटे छोटे विडिओ बनाकर अपने हुनर को दुनियाँ तक पहुंचा रहे है. इस काम … Read more

समर्पण – खुशी

राधा एक गरीब घर की बच्ची थी। मां लोगों के घरों में बर्तन मांजती थी और पिताजी रिक्शा चलाते थे।राधा मां के साथ लोगो के घर जाती थी। यूही कोई 5 साल की होगी वो लोग भी उसे मां के साथ कोई छोटा मोटा काम बता देते। पर राधा पढ़ना चाहती थीं जब वो बच्चों … Read more

ट्रेन सफर – एम. पी. सिंह

ये मेरे जीवन का पहला ट्रैन का सफर था जिसे मैं अकेला करने वाला था. इस सफर की ख़ास बात ये है कि सफर प्रारम्भ होने से पहले ही समाप्त हों गया.  पूरा किस्सा इस प्रकार है – मैं करोलबाग दिल्ली मैं रहता था और 10वी क्लास मैं पढ़ता था. मेरे भाई साब ने भोपाल … Read more

आज़ादी – विविकता

“अरे बहन जी! आजकल की बहुओं की तो किस्मत खुल गई। हमारे ज़माने में तो बस चाकरी और ससुराल वालों के ताने थे; सुबह से रात हो जाती थी और हमारा काम खत्म नहीं होता था—अपनी मर्ज़ी से तो कुछ कर ही नहीं सकते थे।” पूनम ने पड़ोसन कमला से कहा। “सौ आने सच कह … Read more

किस रूप में… – उषा भारद्वाज

  मोना रसोई में काम कर रही थी।बाहर तेज बारिश हो रही है। थोड़ी देर में ओले भी गिरने लगे । वो खिड़की से बाहर देखने लगी। तभी एक बूढ़ा कमजोर सा भिखारी दिखाई दिया जो सामने पेड़ के नीचे खड़ा था। वो पूरी तरह भीग गया था।  उसने कुछ सोचा फिर  छाता लेकर उसके पास … Read more

error: Content is protected !!