ट्रेन सफर – एम. पी. सिंह

ये मेरे जीवन का पहला ट्रैन का सफर था जिसे मैं अकेला करने वाला था. इस सफर की ख़ास बात ये है कि सफर प्रारम्भ होने से पहले ही समाप्त हों गया.  पूरा किस्सा इस प्रकार है – मैं करोलबाग दिल्ली मैं रहता था और 10वी क्लास मैं पढ़ता था. मेरे भाई साब ने भोपाल … Read more

आज़ादी – विविकता

“अरे बहन जी! आजकल की बहुओं की तो किस्मत खुल गई। हमारे ज़माने में तो बस चाकरी और ससुराल वालों के ताने थे; सुबह से रात हो जाती थी और हमारा काम खत्म नहीं होता था—अपनी मर्ज़ी से तो कुछ कर ही नहीं सकते थे।” पूनम ने पड़ोसन कमला से कहा। “सौ आने सच कह … Read more

किस रूप में… – उषा भारद्वाज

  मोना रसोई में काम कर रही थी।बाहर तेज बारिश हो रही है। थोड़ी देर में ओले भी गिरने लगे । वो खिड़की से बाहर देखने लगी। तभी एक बूढ़ा कमजोर सा भिखारी दिखाई दिया जो सामने पेड़ के नीचे खड़ा था। वो पूरी तरह भीग गया था।  उसने कुछ सोचा फिर  छाता लेकर उसके पास … Read more

बच्चों के इम्तिहान, मम्मी परेशान – एम. पी. सिंह

 हास्य कहानी  मार्च का महीना शुरू होते ही घर का माहौल बदल जाता है। कारण, बच्चों के इम्तिहान,  पर असली परीक्षा तो मम्मी की ही शुरू हो जाती है। वैसे, मम्मी तो बच्चों के लिए हमेशा ही परेशान रहती है. इम्तिहान के दिनों मैं बच्चे भी मम्मी का पूरा पूरा फायदा उठाते है. कभी बोलते … Read more

 तृप्त – पुष्पा कुमारी “पुष्प”

“सुनिए!.आजकल माँ जी खाना ठीक से नहीं खाती।” रसोई से निपट कर कमरे में आकर पति के बगल में बैठते हुए रजनी ने यह बात अपने पति को बताना जरूरी समझा लेकिन रजनी की बात सुन उसका पति रूपेश तनिक हैरान हुआ.. “मैं कुछ समझा नहीं?” “माँ जी इधर हफ्ते भर से हर रोज अपनी … Read more

विधवा

एक बहुत बड़े होटल में शादी का फंक्शन चल रहा था। बारात दरवाजे पर आ चुकी थी। द्वार पर एक बहुत ही खूबसूरत लड़की सुर्ख लाल रंग के गाउन में बहुत ही अच्छा डांस कर रही थी। हर कोई उसे देखकर बस उसकी तारीफ़ कर रहा था। तभी वह ठककर साइड हो गई। बारात ने … Read more

औलाद का दर्द

“यह क्या बात हुई भैया, आपने पहले कहा था कि आप 15 तारीख को आकर मम्मी और पापा को अपने साथ ले जाएंगे। अब आप दो दिन पहले कह रहे हैं कि आप नहीं आएंगे।” “अरे, मैंने क्या ज़िंदगी भर का इनका ठेका लेकर रखा है? इनकी वजह से हम कहीं घूमने भी नहीं जा … Read more

परिवार – खुशी :

 Moral Stories in Hindi जगन्नाथ जी समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे जिनकी कपड़े की मिल थी।घर में दो बेटे विनय और गौरव प्यारी सी बेटी मेघा और पत्नी पूजा थे।सुखी परिवार था। जगन्नाथ जी बाहर का देखते और उनकी मां जानकी देवी की मृत्य के बाद घर की सारी जिम्मेदारी पूजा पर थी।जब तक सास … Read more

रेशम की डोर – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

       मम्मी जी ….आज मेरे साथ आप चलेंगी बाजार ….? मुझे राखी लेना है….हम लोग दो चार दुकान घूम-घूम के  पसंद कर के लेंगे… इनके साथ जाने से तो बस जल्दी करो , जल्दी करो ही रट लगाए रहते हैं अनन्या ने अपनी सासू मां किरण जी से कहा…। हां बहू …दोपहर में चलेंगे , उस … Read more

रस और सच का पेड़ – डॉ मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

एक शाम, पुराने आम के पेड़ की छाया में नाना पंडित जगन्नाथ शर्मा अपनी दो नातिनों मनू और तनू के साथ लूडो खेल रहे हैं। सुनहरी धूप पत्तों से छनकर बिखर रही है।   तनू:(एक पासा फेंकते हुए) नाना, ये आम का पेड़ कितना पुराना है? इतने सारे फल लगते हैं!   मनू:(मुस्कुराते हुए) हाँ नाना! पर … Read more

error: Content is protected !!