अनकहे धागों की मिठास
उधर स्वाति का मन ऐसा बुझ गया जैसे जलते हुए दीये पर किसी ने अचानक मूसलाधार बारिश कर दी हो। वह चुपचाप रसोई में लौट आई। उसकी आंखों के कोर भीगने लगे। जिस यात्रा के लिए उसने दिन-रात एक करके घर के काम निपटाए थे, जिस सुकून के लिए उसने पिछले एक साल से इंतज़ार … Read more