समर्पण – मीनाक्षी गुप्ता
“बरसात की हल्की फुहारें पड़ रही थीं। गाँव की मिट्टी से उठती सोंधी खुशबू वातावरण में घुल गई थी। दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली गौरी अपने घर के आँगन में बैठी किताबों के पन्ने पलट रही थी। उसकी आँखों में बड़े सपने थे, लेकिन उन सपनों तक पहुँचने का रास्ता आसान नहीं था।” गौरी के … Read more