समझौता नहीं,समन्वय – शुभ्रा बैनर्जी
शुचिता जब ब्याह कर ससुराल आई,तब उसे अपने आप को नए परिवेश में ढालने में समय लगा। मायके में सबसे बड़ी और लाड़ली बेटी।पढ़ने में सदा अव्वल,सुंदर और सुशील।दादी तो तब आशीर्वाद देतीं थीं जब शुचिता पांचवीं कक्षा में थी”महारानी बनकर राज करेगी मेरी मोना।” शुचिता ने रानी बनने के ख्वाब तो नहीं देखे थे, … Read more