सुहाग की निशानी: एक अनकहा बलिदान

मेरे बुटीक में पिछले पांच सालों से काम करने वाली रमा सिर्फ मेरी कर्मचारी नहीं, बल्कि मेरे परिवार के एक सदस्य जैसी हो गई थी। रमा के हाथों में जादू था। वह कपड़ों पर कढ़ाई का ऐसा बारीक और खूबसूरत काम करती थी कि बड़े-बड़े डिज़ाइनर भी उसकी कला के आगे फीके पड़ जाएं। वह … Read more

एकांत की पूर्णता

 शशांक क्यों आ रहा है? क्या वह सुजाता से प्रेम करता है? नहीं। वह अपनी सफलता के अहंकार में डूबा हुआ है। वह यह साबित करने आ रहा है कि उसका जाना सही था। वह सुजाता को अपनी उपलब्धियों के माध्यम से ‘उपकृत’ करने आ रहा है। शशांक यह सोच रहा है कि सुजाता आज … Read more

जिंदगी की लौ

 सुजाता की स्नेह भरी लेकिन सशक्त बातों ने सीमा  के अंदर सोई हुई उस चिंगारी को फिर से हवा दे दी, जो डर और शर्मिंदगी के कारण बुझ गई थी। उसे अपनी भूल का एहसास हो गया। उसे समझ आ गया कि भागना और हार मान लेना किसी समस्या का समाधान नहीं है। सीमा  ने … Read more

प्रायश्चित के आंसू

लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं था। जब स्वाति के पति नरेश और उसके ससुराल वालों को इस बात का पता चला, तो घर में तूफान आ गया। नरेश ने साफ शब्दों में कह दिया, “तुम पागल हो गई हो स्वाति? यह कोई खून देने जैसी छोटी बात नहीं है, यह एक बहुत बड़ा ऑपरेशन … Read more

उम्र का वनवास

 नेहा स्वभाव से बुरी नहीं थी, लेकिन वह बहुत ‘प्रोफेशनल’ थी। घर की हर चीज़ अपनी जगह पर होनी चाहिए, यह उसका सख्त नियम था। दीनानाथ जी अगर गलती से सोफे पर चाय का एक कतरा भी गिरा देते, तो नेहा के माथे पर सिलवटें पड़ जाती थीं। “पापा जी, आप डाइनिंग टेबल पर ही … Read more

खोई हुई पहचान: एक अनकही दास्तान

शिखा ने मीरा का हाथ पकड़कर कहा, “मीरा, एक बात हमेशा याद रखना। अगर इंजन में ही खराबी आ जाए, तो गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकती। तुम इस घर का इंजन हो। तुम दिन-रात सेवा कर रही हो, यह बहुत अच्छी बात है, लेकिन अगर तुम अंदर से खुश नहीं हो, तो तुम दूसरों को … Read more

रिश्तों का आईना

सुलोचना देवी टूट कर रोने लगीं। वे लड़खड़ाते कदमों से प्रेरणा के पास गईं और उसके दोनों हाथ पकड़ लिए। “मुझे माफ कर दे मेरी बच्ची। मैं सोने की चमक में अंधी हो गई थी। मुझे लगा कि जो पैसे वाला है, वही सच्चा है। मैं यह भूल गई कि असली जेवर सोना-चांदी नहीं, बल्कि … Read more

एक ही आँगन की दो उड़ानें

दीनानाथ जी ने आगे कहा, “एक बात हमेशा याद रखना सावित्री, ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती। रोहन आज अगर इतनी शांति से अपना काम कर पा रहा है, तो इसलिए क्योंकि पीछे से मीरा ने घर को एक मजबूत खंभे की तरह संभाल रखा है। अगर मीरा खुश नहीं रहेगी, तो तुम यह … Read more

रिश्तों की वसीयत

कृतिका अचानक सास को वहां देखकर हक्की-बक्की रह गई। वह लड़खड़ाती जुबान से बोली, “मां… मां जी, मेरा वो मतलब नहीं था। मैं तो बस यह कह रही थी कि दीदी का फायदा हो गया। आखिर उन्होंने दो साल आपकी सेवा जो की है, उसका फल तो उन्हें मिलना ही था।” “सेवा का फल?” कावेरी … Read more

समझौते की आखिरी सीमा – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका‘

सुबह के सात बज रहे थे। रसोई में चाय की महक के साथ प्रेशर कुकर की सीटी घर के सन्नाटे को तोड़ रही थी। रिया जल्दी-जल्दी नाश्ता तैयार कर रही थी। सामने रखे मोबाइल पर ऑफिस से लगातार संदेश आ रहे थे। आज उसकी जिंदगी का एक बड़ा दिन था। पिछले छह महीने से जिस … Read more

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