देहरी की सूनी आस
रात को घर पहुंचकर स्नेहा ने सूटकेस से कपड़े वापस निकालने शुरू किए। रिया ने मासूमियत से पूछा, “मम्मा, हम नानी के घर कब जाएंगे?” स्नेहा ने अपने आंसू छुपाते हुए उसे गले से लगा लिया और कहा, “इस बार नहीं बेटा, अगले साल जरूर जाएंगे।” लेकिन सबसे मुश्किल काम था बनारस फोन करना। स्नेहा … Read more