मुझे माफ़ कर दे छोटे…
सुरेखा भाभी ने आगे कहा, “वही तो! अगर इतना ही प्यार है अपनी माँ से, तो ले क्यों नहीं जाता अपने साथ? वहां जाकर कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा! लेकिन नहीं, वहां तो साहब को अपनी आज़ादी चाहिए। यहाँ हम दिन-रात खटते रहें और नाम उसका होता रहे कि ‘छोटा बेटा बहुत होनहार है’। सच … Read more
औरत का दिल
थोड़ी सी शर्म कर! तू एक जानवर से भी बदतर है। जिस बाप ने तुझे उंगली पकड़ कर चलना सिखाया, आज जब उसे तेरी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तो तूने उसे मरने के लिए छोड़ दिया। और जिस औरत पर तू ये हाथ उठा रहा है, आज उसी की वजह से तेरे पिता की सांसें … Read more
परिवार सिर्फ खून के रिश्तों से नहीं बनता
रघुनाथ जी रो पड़े। उन्होंने शेखर को गले से लगा लिया। उनका बरसों का जमा हुआ दुख, वह धोखा, वह पीड़ा, सब शेखर के कंधों पर आँसुओं के रूप में बह निकली। “तुम सच कह रहे हो बेटा… मैंने जिसे अपना समझा, वह पराया निकला… और जिसे मैंने एक दिन यूँ ही इंसानियत के नाते … Read more
डांट में छिपे अथाह प्रेम – संगीता अग्रवाल
“अब तूने मुझे अपने हाथ से खिलाया है, तो थोड़ा मैं भी तुझे खिला दूँ। सुबह से तूने भी तो कुछ ढंग का नहीं खाया होगा मेरी इस ज़िद के चक्कर में,” शांति देवी ने कहते हुए एक निवाला सुमेधा के मुँह में डाल दिया। अयान, जो दरवाज़े के पीछे खड़ा सब कुछ सुन और … Read more
काश… मेरा अपना कोई घर होता
विकास भी हमेशा अपने माता-पिता का ही पक्ष लेता। धीरे-धीरे बच्चों के मन में भी यह बात बैठ गई कि घर में असली सत्ता दादा-दादी और पापा की है, माँ तो बस घर का काम करने के लिए है। जैसे-जैसे शशांक और नव्या बड़े हुए, उन्होंने भी अंजलि की बातों को अनदेखा करना शुरू कर … Read more
शादी के बाद रोमांस
रोहन के लिए मीरा का उस घर में होना एक अजीब सा मीठा अहसास था। वह रोज़ सुबह उसे चाय बनाते देखता, आंगन में तुलसी को जल चढ़ाते देखता और शाम को अपनी किताबों में उलझे हुए देखता। मीरा की हंसी से जैसे पूरा घर गूंज उठता था। रोहन दिल ही दिल में मीरा को … Read more
गर्व भरी नज़र से
मेरी एक बेहद करीबी दोस्त हुआ करती थी, नाम था अंजलि। अंजलि का परिवार शहर के नामी और रसूखदार लोगों में गिना जाता था। उसके परिवार को लोग ‘डॉक्टर्स फैमिली’ कहते थे। उसके पिता डॉ. माथुर शहर के सबसे बड़े न्यूरोसर्जन थे, माँ डॉ. रश्मि एक जानी-मानी गायनेकोलॉजिस्ट थीं और अंजलि का बड़ा भाई, विक्रम, … Read more
दिखावा – संगीता अग्रवाल
लोगों की आँखों में आँसू आ गए थे। एक दोस्त गुस्से में बोल पड़ा, “लानत है ऐसे बेटे पर! ऐसे इंसान को तो सरेआम सजा मिलनी चाहिए। कौन था वो नरपिशाच?” माधव ने एक गहरी साँस ली। उसकी नज़रें सीधे सुशांत पर जाकर टिक गईं। सुशांत, जो अब तक बड़े आराम से खड़ा था, अचानक … Read more