मोहभंग: वो आखिरी कदम
“जाओ काव्या, लौट जाओ अपने घर,” कबीर ने गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए कहा। “यह तुम्हारे लिए एक सबक है। भगवान का शुक्र मनाओ कि मैं कोई बुरा इंसान नहीं था, वरना रात के इस अंधेरे में तुम्हारा क्या अंजाम होता, तुम सोच भी नहीं सकती। मैंने तुम्हें सिर्फ यह एहसास दिलाने के लिए यहाँ … Read more