विश्वासघात

“यह… यह क्या बकवास है!” विकास अपनी जगह से उछल पड़ा। “आप ऐसा नहीं कर सकते पिताजी! यह हमारा हक है! हम आपके खून हैं!” शिखा भी चीखने लगी, “जरूर इस रमेश मुनीम ने या किसी और ने आपके कान भरे हैं पिताजी! आप बुढ़ापे में अपना दिमागी संतुलन खो बैठे हैं। हम इसे कोर्ट … Read more

आख़िरी मौका

“तू इतनी सुंदर, इतनी पढ़ी-लिखी है। वह तो तेरे पैरों की धूल के बराबर भी नहीं है।” “तुझे यह सब सहने की कोई ज़रूरत नहीं है। अपना सामान बांध और घर आ जा। हम बैठे हैं न तेरी देखभाल के लिए।” दीनानाथ जी हमेशा काव्या को समझाते थे। “बेटा, घर ऐसे नहीं बसते। थोड़ा धैर्य … Read more

 निश्छल प्रेम

पीहू धीरे-धीरे कदमों से भीड़ को चीरती हुई सिद्धार्थ के पास पहुंची। उसने सिद्धार्थ के कुर्ते का कोना खींचते हुए मासूमियत से पूछा, “पापा, दादू फर्श पर क्यों सो रहे हैं? उन्हें वहां ठंड लग जाएगी। और आप सब लोग रो क्यों रहे हो? क्या दादू कहीं जा रहे हैं?” सिद्धार्थ ने अपनी आंसुओं से … Read more

पश्चाताप के आंसू

आज जब उन्होंने यह सब सुना तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने फोन कौशल्या जी के हाथ से छीन लिया और कॉल काट दिया। रघुनाथ जी गुस्से से कांप रहे थे। “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई अपनी ही बहू के चरित्र पर इस तरह कीचड़ उछालने की? और वो भी उस औरत के … Read more

जीवन-मंत्र

“हमेशा खुश रहना बिटिया, और इन चूड़ियों की तरह हमेशा खनकती रहना,” उसने मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा था। लेकिन मेरी किस्मत की चूड़ियां शायद बहुत कच्चे कांच की बनी थीं। मेरी शादी का सपना एक महीने के भीतर ही चकनाचूर हो गया। मेरा पति, राघव, जिसके साथ मैंने एक नई दुनिया बसाने … Read more

दुनिया की सबसे बड़ी दौलत

“अम्मा, यह क्या है?” मैंने पूछा। “तीस हजार हैं… रोहन की फीस के लिए। तुझे क्या लगा, तू मुझे कुछ नहीं बताएगा तो मुझे पता नहीं चलेगा? तेरी शक्ल देखकर मैं तेरा पूरा हाल पढ़ लेती हूँ। जब तू पैदा भी नहीं हुआ था, तब से जानती हूँ तुझे।” माँ की आवाज़ भर्रा गई थी। … Read more

उधार का नसीब – विकास श्रीवास्तव 

बरसात की एक ठंडी रात थी। दस वर्षीय अमन अपनी बीमार माँ के सिरहाने बैठा था। घर में खाने का एक दाना भी नहीं था। माँ कई दिनों से बीमार थी और दवा के बिना उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। अमन हिम्मत करके गाँव की किराने की दुकान पर पहुँचा। उसने दुकानदार से कहा, … Read more

बेस्ट ड्राइंग – लतिका श्रीवास्तव

ऑफिस से लौटते ही अनुराग ने पंखा फुल स्पीड पर चलाया और सोफ़े पर मोबाइल लेकर पसर गया। “आशी, ज़रा जल्दी चाय बना दो। आज ऑफिस में बहुत काम था… जान ही निकल गई।” आशी भी उसी के साथ ऑफिस से लौटी थी। उसने मुस्कुराकर पहले अनुराग को पानी दिया, फिर स्कूल से लौटे बच्चों … Read more

गुस्सा सबकुछ बर्बाद कर देता है – मंजू ओमर

हेलो मम्मी मैने तुम्हारा टिकट करा दिया है तुम आ रही हो ना श्रेयश बोला मम्मी से, बेटा तुमने सिर्फ हमारा टिकट करवाया है पापा का नहीं । हम उनको अकेला छोड़कर कैसे आ सकते हैं परेशानी होती है उनको समझा करो बेटा। लेकिन मम्मी आप जानती तो हो पापा को संग मेरी पटरी नहीं … Read more

रिश्तों में कड़वाहट

माधवी बुआ की बात खत्म होते ही पूरा कमरा जैसे एक गहरे चिंतन में डूब गया। जिन औरतों ने जिंदगी भर खुद को एक संदूक बनाए रखा था और अपने अंदर अनगिनत दर्द और ताने छुपाए रखे थे, आज उन्हें अहसास हो रहा था कि माधवी बुआ कितने बड़े जीवन सत्य को कितनी आसानी से … Read more

error: Content is protected !!