सच्चा जीवनसाथी 

माधव रुंधे हुए गले से बोला, “मुझे छोड़ दो राधिका… तुम अब एक बहुत बड़ी अधिकारी हो। यहाँ सारे लोग तुम्हें देख रहे हैं। मेरे जैसे एक मामूली मजदूर का तुम्हारे साथ होना तुम्हारी इज्जत खराब कर देगा।” राधिका ने आँसू पोंछते हुए कहा, “कौन सी इज्जत? यह पद, यह रुतबा, यह गाड़ी, यह सब … Read more

दुनिया की सबसे बड़ी दौलत

अपनी सगी माँ की सूरत रोहन को ठीक से याद भी नहीं थी। जब वह महज छह साल का था, तभी एक गंभीर बीमारी ने उसकी माँ को उससे छीन लिया था। घर में वैसे तो पिता दिनेश थे, लेकिन रोहन की परवरिश का पूरा जिम्मा उसकी विधवा बुआ, कमला पर आ गया था। बुआ … Read more

पिता को अंतिम विदाई

शहर के प्रतिष्ठित रिटायर्ड हेडमास्टर, पंडित दीनानाथ जी की अंतिम यात्रा उनके पुश्तैनी घर के आंगन से निकल रही थी। दीनानाथ जी ने अपने जीवन में हजारों छात्रों का भविष्य संवारा था, इसलिए आज उनके अंतिम दर्शन के लिए पूरा शहर उमड़ पड़ा था। अर्थी के आगे-आगे नंगे पैर, सिर मुंडाए और हाथ में सुलगता … Read more

वैराग्य

“स्वामी जी, प्रणाम,” कल्याणी ने अत्यंत श्रद्धा के साथ अपनी थाली एक ओर रखी और नित्यानंद के चरणों में झुक कर उन्हें प्रणाम किया। जब वह झुकी, तो उसके माथे की लाल बिंदी और उसकी सूती साड़ी के आंचल से छलकती एक असीम ममता और नारीत्व की उस नैसर्गिक सुंदरता ने नित्यानंद की आँखों को … Read more

बुढ़ापे में माता-पिता लाचार हो जाते हैं

“पापा, मम्मी, आप दोनों जल्दी से अपना सामान समेट लीजिए। तीन बजे तक निकलना सही रहेगा। अगर और देर हुई तो एक्सप्रेसवे के ट्रैफिक में बुरी तरह फंस जाएंगे और रात हो जाएगी,” विकास ने अपनी कलाई घड़ी देखते हुए एक व्यापारिक लहजे में कहा। विकास की इस बात को सुनकर दीनानाथ जी का चेहरा … Read more

घर-घर की कहानी

सुनीता देवी अपनी इकलौती बेटी काव्या को लेकर पारिवारिक न्यायालय के बाहर बने काउंसलिंग सेंटर में बैठी थीं। उनके चेहरे पर गुस्सा, चिंता और एक अजीब सी जिद साफ झलक रही थी। उनके ठीक सामने वाली कुर्सी पर उनका दामाद रोहन और उसके माता-पिता खामोश बैठे थे। काव्या की आँखें सूजी हुई थीं, जैसे वह … Read more

सौतन

मान्या  पिछले कई दिनों से एक अजीब सी बेचैनी से गुजर रही थी। आठ साल की शादीशुदा जिंदगी में उसने कभी रोहन पर शक करने का कोई कारण नहीं पाया था। रोहन एक जिम्मेदार पति और उनके पांच साल के बेटे, आरव का बहुत प्यारा पिता था। दोनों की जिंदगी एक शांत नदी की तरह … Read more

भाई का निस्वार्थ प्रेम

“तू बहुत बड़ा मूर्ख है, केदार! तुझे क्या लगा, मुझे तेरी चोरी का पता नहीं चलेगा?” सोमनाथ रुंधे गले से बोला। केदार भी रोते हुए मुस्कुराया, “और आप? आप कब से इतने चालाक हो गए भैया कि मेरे ही बक्से में सेंध मार दी?” दोनों भाई एक-दूसरे के गले लगकर बच्चों की तरह रो रहे … Read more

मां – खुशी

सविता की  शादी एक भरे पूरे परिवार में हुई।दो ननद राधा और मीरा  एक देवर मोहन सविता के पति केशव  ससुर दीनानाथ ऐसा परिवार था।जिसमें चलती सिर्फ सविता की सास रूक्मिणी की थी बाकी सब तो प्यादे थे।रुक्मिणी एक तेज गुस्से वाली महिला थी जिन्हें हर चीज समय पर चाहिए होती थी देर हो गई … Read more

सिल्क की साड़ी पहनने की हसरत ही रह गई – मंजू ओमर

सपना आज बहुत खुश थी। आज उसे मुहल्ले मे उसके दो मकान छोड़ कर रहने वाली शांति जी के पोती का महिलाओं का संगीत कार्यक्रम था। शादी थी उसकी,,जो दूसरे शहर से हो रही थी। उसी के उपलक्ष्य मे ये प्रोग्राम रखा था। गाने बजाने के साथ खाने पीने का भी कार्यक्रम था। सपना ने … Read more

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