मन का दर्पण
सब्जी बेचने वाली उस साधारण सी औरत के इन शब्दों ने अवनि के भीतर जैसे एक सोई हुई चेतना को झकझोर कर जगा दिया। अवनि को लगा मानो किसी ने उसके सामने एक आईना रख दिया हो। वह जिस समाज के तानों से डरकर रो रही थी, उस समाज का उसके जीवन में कोई वास्तविक … Read more