अपनों का साथ और प्यार – गीता वाधवानी

 आकाश और आशना की आंखों में खुशी के आंसू थे। उनकी बेटी काम्या ने समाजसेविका बनकर उनका नाम रोशन किया था।आज उसके अच्छे कामों के लिए उसे अवार्ड दिया जा रहा था।   पूरा हॉल तालियों  की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हर व्यक्ति की जुबान पर बस काम्या का ही नाम था। सब यही कह रहे … Read more

पवित्र रिश्ते

“मम्मी, वो जो बनारसी सिल्क की साड़ी आपने दिखाई थी, वही भिजवाना मेरे लिए। और हाँ, काजू-बादाम, पिस्ता के साथ वो इंपोर्टेड चॉकलेट्स का बड़ा वाला पैक भी रख देना। मेरी जेठानी के मायके से बहुत भारी सामान आया है इस बार दिवाली पर। उनके रिश्तेदारों के सामने मेरा इम्प्रेशन डाउन नहीं होना चाहिए। आपको … Read more

अपनों का साथ – अरुणा गर्ग

शिल्पा की शादी एक बड़े परिवार में हुई थी। दादा,दादी सास, सास ससुर,दो देवर और एक ननद जिसकी शादी चार साल पहले ही हो गई थी।जब शिल्पा के लिए वरूण का रिश्ता आया तो मम्मी-पापा को घर बार अच्छा लगा।पर उन्हें एक ही चिंता थी कि एकल परिवार में पली उनकी लाडली बेटी इतने बड़े … Read more

विश्वास – अरुणा गर्ग

मयंक शाम को अपनी दुकान बढ़ाकर घर जा रहा था। आगे मुड़कर गली में से गुजर रहा था। उसके थोड़ा आगे ही बच्चियां चल रही थीं।उनकी बातों से पता चला कि उन्हें आज कोचिंग से आने में देर हो गई और अब अंधेरा हो जाने से पहले घर पहुंच जाना चाहती थीं। तभी एक ने … Read more

संजीवनी

“ये क्या तमाशा लगा रखा है तुम दोनों ने सुबह-सुबह? पूरा मोहल्ला सुन रहा है!” रघुनाथ जी की वो पुरानी कड़क आवाज़ आज महीनों बाद घर में गूंजी थी। अविनाश और कविता ने एक-दूसरे को देखा और मन ही मन खुश हुए, लेकिन चेहरे पर वही गुस्सा बनाए रखा। अविनाश ने मुँह बनाते हुए कहा, … Read more

पहली रसोई

दरवाजा बंद होते ही काव्या और अंजलि की धड़कनें तेज हो गईं। उन्हें लगा कि अब उनकी शामत आने वाली है। बड़ी अम्मा ने पास आकर दोनों व्यंजनों का मुआयना किया। उन्होंने देखा कि लौकी का हलवा तले से लग गया है और फिरनी में चावल पानी की तरह तैर रहे हैं। अंजलि ने अपनी … Read more

दिल के रिश्ते

“अनन्या, उठो। लगता है नीचे अंकल की तबीयत ज्यादा खराब है,” सिद्धार्थ ने अपनी पत्नी को जगाते हुए कहा। दोनों दौड़कर नीचे गए। देवकी जी ने रोते हुए दरवाजा खोला। अंदर रमाकांत जी सीने पर हाथ रखे सोफे पर गिरे हुए थे और उन्हें सांस लेने में भयंकर तकलीफ हो रही थी। उनका चेहरा पसीने … Read more

दिखावटी आज़ादी

“क्या हुआ रोहन? तुम इतने हाइपर क्यों हो रहे हो? मैं यहाँ…” “मैंने कहा अभी घर आओ! अगर अगले बीस मिनट में तुम घर पर नहीं हुई, तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।” फोन कट गया। मेघना का दिल बैठ गया। उसने कभी रोहन को इस कदर गुस्से में नहीं देखा था। वह अपना बैग … Read more

स्वाभिमान

लेकिन आज सुमित वह पुराना, डरा हुआ और संकोची इंसान नहीं था। उसके चेहरे पर एक अजीब सा सुकून और दृढ़ता थी। सुमित ने आगे बढ़कर विनम्रता से हाथ जोड़े और बेहद शांत लेकिन मज़बूत आवाज़ में कहा, “भैया, आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने हमें वापस इस बड़े घर में बुलाने के लायक … Read more

अकेलापन

कमरे में खामोशी इतनी गहरी थी कि दीवार पर टंगी घड़ी की सुइयों की टिक-टिक भी किसी हथौड़े की चोट की तरह महसूस हो रही थी। विक्रम बेड के किनारे बैठा था, उसके हाथों में एक अस्पताल की फाइल थी और उसकी नजरें सामने ड्रेसिंग टेबल के पास खड़ी काव्या पर टिकी थीं। काव्या अपने … Read more

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