राखी का धागा – डॉ बीना कुण्डलिया

बबीता के परिवार में वो दो बहनें, तीन भाई, एक सबसे बड़ी बहन फिर तीन भाई फिर सबसे छोटी थी बबीता। बड़े ही लाड़ प्यार से माता-पिता ने परवरिश की उन सबकी । एक दूसरे को समझता, एक दूसरे पर निछावर, जान छिड़कता ऐसा था उनका परिवार। पिता मनोज जी सरकारी आफिसर माँ पार्वती घरेलू … Read more

रिश्तों की अटूट डोर

 सुलोचना झेंप गई और मेहमानों के सामने अपनी इज्जत बचाते हुए धीरे से फुसफुसाई, “तू पागल हो गई है शिखा? तमाशा मत बना। तुझे पता है न कि हमारे उनके बीच कोई रिश्ता नहीं है। वे लोग नहीं आएंगे। तू चुपचाप रस्म के लिए बैठ जा।” “रिश्ता कैसे नहीं है माँ?” शिखा की आँखों से … Read more

प्यार का ज़ायका: एक अनकही वसीयत

 रिया को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ। एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर, घर का सबसे बुजुर्ग और सम्मानीय व्यक्ति, सुबह-सुबह रसोई में नाश्ता बना रहा था! शर्म, संकोच और अपराधबोध से रिया का चेहरा लाल हो गया। वह तुरंत रसोई के अंदर गई और कांपती हुई आवाज़ में बोली, “बाबूजी! ये… ये आप क्या कर … Read more

सपनों की उड़ान और एक अजनबी का साथ

 सूरज की यह बात सुनकर दीनदयाल सन्न रह गया। एक छोटा सा बच्चा, जो खुद ठंड से कांप रहा है, वह अपने भविष्य, अपनी पढ़ाई और अपनी मां के सपनों के लिए अपने शरीर को गर्माहट देने वाले इकलौते सहारे को बेचने निकल पड़ा था। दीनदयाल को अचानक अपना वो बेटा याद आ गया, जिसे … Read more

वो ‘निकम्मा’ बेटा

रात के करीब ढाई बज रहे थे। अचानक मास्टर महेश जी  जी के सीने में तेज दर्द उठा। दर्द इतना भयानक था कि वे बिस्तर पर ही तड़पने लगे। उनकी पत्नी कौशल्या घबराहट में उठ बैठीं। वे समझ नहीं पा रही थीं कि इतनी रात गए, इस भयंकर तूफ़ान में क्या करें। उनके दो बड़े … Read more

एक माँ का इंतज़ार

देहरादून की शांत वादियों के बीच बसा वह बड़ा सा पुश्तैनी घर अब और भी ज्यादा खामोश लगने लगा था। साठ साल की शांति देवी रोज़ सुबह उठकर सबसे पहले उस पुरानी लकड़ी की आराम कुर्सी को साफ करती थीं, जिस पर बैठकर कभी उनके पति अखबार पढ़ा करते थे। घर के हर कोने में … Read more

मुक्ति का स्वाद

 आज सुबह रघुनाथ जी की हालत बहुत खराब थी। वे दर्द से कराह रहे थे और उनकी आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे। उन्होंने कांपते हाथों से विमला का हाथ पकड़ा और टूटी हुई आवाज़ में कहा, “विमला… मुझे जाने दे। पर इस कड़वाहट के साथ मत भेज… मेरा मुँह मीठा करवा दे… मेरी … Read more

वजूद की उड़ान

 नौ साल का ‘सावन’ कोने में दुबक कर रो रहा था। दीनानाथ भारी कदमों से अंदर गए और सावन के सिर पर हाथ रखा। सावन ने अपनी डबडबाई आँखों से पिता की ओर देखा और मासूमियत से पूछ लिया, “बाबा, मेरे शरीर में ये अजीब से बदलाव क्यों हो रहे हैं? आज स्कूल में जब … Read more

कोख का नहीं, दिल का रिश्ता

 आज निशा  और समीर की शादी की पांचवीं सालगिरह थी। पूरा घर फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजा हुआ था। ड्रॉइंग रूम में रखी मेज पर एक शानदार केक रखा था, जिसके पास ही समीर की तरफ से लाया गया एक महंगा तोहफा भी था। सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी इस घर में। समीर … Read more

सूने आंगन की गूंज

सर्दियों की एक धुंधली और सर्द सुबह थी। लखनऊ के गोमती नगर इलाके में स्थित ‘आनंद कुंज’ नाम की एक विशाल और खूबसूरत हवेली, जो कभी बच्चों की किलकारियों और मेहमानों के ठहाकों से गूंजा करती थी, आज एक अजीब से सन्नाटे में डूबी हुई थी। उस सन्नाटे को चीरती हुई सिर्फ एक ही आवाज़ … Read more

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