समझौता – डॉ. हिमानी बंसल

निहारिका अपने मायके में माँ-बाप की लाडली और भाई-बहनों की प्यारी थी। माता-पिता ने उसे फूलों की तरह संभालकर रखा था। उसके जीवन में दुख की छाया तक नहीं पड़ी थी। दादाजी तो उसे अपनी आँखों का तारा मानते थे। जब उसके विवाह की बात चली तो दादाजी ने रायपुर के एक बड़े और प्रतिष्ठित … Read more

अनकहे रिश्ते

देवकी जी की आँखें शून्य में ठहर गईं। जो दर्द उन्होंने सालों से अपने सीने में दबा रखा था, वह अब बाहर आने के लिए तड़प रहा था। उन्होंने गहरी सांस ली और कहा, “हाँ बेटा, तूने मुझे फिर से जीना सिखाया है। मेरा सिद्धार्थ… वह मेरा सब कुछ था। मैं तुझे सब बताऊँगी।” कबीर … Read more

प्रतीक्षा के वो सात समंदर

 खैर, आज का दिन बहुत खास है। आज मेरी वही पोती, जो कल तक मेरे कंधों पर बैठकर बनारस के घाट घूमा करती थी, खुद चलकर इस आंगन में आ रही है। लड़कियाँ जब मायके आती हैं, तो घर की दीवारें भी जैसे मुस्कुराने लगती हैं। उनकी हंसी की खनक से पूरे घर का सन्नाटा … Read more

सात समंदर पार का सन्नाटा

 रोहन की बात सुनकर देवकी के पास कहने को कुछ नहीं बचा था। रोहन ने कुछ गलत नहीं कहा था। उसने वही किया जो उसकी माँ ने उसे सिखाया था। देवकी ने ही उनके कोमल मनों में यह बात डाली थी कि विदेशी सरजमीं ही सफलता का आखिरी मुकाम है। उसने बच्चों को उड़ना सिखाया, … Read more

परंपरा और आधुनिकता की पहेली

अनन्या अवाक रह गई। वह कुछ बोल ही नहीं पा रही थी। आधुनिकता की तमाम दलीलें देने वाली अनन्या को अचानक अपनी ही भारतीय जड़ों का एहसास होने लगा। उसका दिमाग तेज़ी से दौड़ने लगा। ‘होने वाले सास-ससुर के सामने मैं एक ही कमरे में रोहन के साथ कैसे रहूँगी? मैं उनके सामने सुबह-सुबह बिना … Read more

सुकून का नया पता

 सुमित्रा जी मुस्कुराते हुए बोलीं, “नहीं मालती, बच्चों ने कभी हमसे एक पैसा नहीं मांगा। बल्कि वे तो हर महीने हमें पैसे भेजना चाहते हैं। सच तो यह है कि उस बड़े घर में हम थक चुके थे। रोज सुबह उठकर कामवाली का इंतजार करना, कभी प्लंबर को बुलाना, कभी बिजली वाले के पीछे भागना। … Read more

मखमली पर्दे

स्मिता ने अपना रेशमी पल्लू सँभालते हुए कहा। “ये जो लड़का है ना सूरज, इसका बाप एक नंबर का जुआरी और शराबी था। सिर पर लाखों का कर्ज़ा छोड़कर लिवर खराब होने से मर गया। इसकी माँ, कमला, मेरे पैरों में गिरकर रोने लगी। मेरे पति राकेश जी का दिल बहुत बड़ा है। उन्होंने कमला … Read more

मृगतृष्णा: एक अधूरे सच की कहानी

इस बार सुमित्रा जी ठीक नीरजा के पीछे खड़ी थीं और उन्होंने अपने ‘वारिस’ का हर एक शब्द सुन लिया था। उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। जिस बेटे के लिए उन्होंने अपनी बेटी को हमेशा पराया समझा, जिस बेटे की खातिर उन्होंने अपने पति की सारी ज़िंदगी की कमाई लुटा दी, आज वो बेटा … Read more

अतीत की दहलीज पर

“मैं तुम्हें वापस पाने की जिद नहीं कर रहा हूँ, अनन्या। मैं जानता हूँ मैंने तुम्हारा बहुत दिल दुखाया है। मैं बस इतना चाहता था कि तुम यह जान लो कि तुम्हारी लड़ाई गलत नहीं थी। गलत मैं था। मुझे बस इस एहसास के साथ नहीं जीना था कि तुम मुझे एक डरपोक और धोखेबाज … Read more

स्वाभिमान की चौखट

“तूने बिल्कुल सही किया बेटा,” रामदीन जी ने शिखा का माथा चूमते हुए कहा। “मैं एक बाप होकर जो नहीं कह पाया, वो तूने कह दिया। मेरी बेटियां मेरे गुरूर हैं, कोई बाज़ार में बिकने वाला सामान नहीं। अनुराधा की शादी जब होगी, तब होगी, लेकिन आज के बाद मेरी किसी बेटी को ऐसे अपमान … Read more

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