खून से गहरे भावना के रिश्ते

“कल तुम कह रही थी कि तुम अपने मायके जा रही हो, अपने भाई को टीका करने। लेकिन तुमने तो बताया था कि तुम्हारा दुनिया में कोई नहीं है, तुम अनाथालय में बड़ी हुई हो। फिर ये भाई और मायका… मुझे कुछ समझ नहीं आया।” मेरी बात सुनकर काव्या के चेहरे पर एक बहुत ही … Read more

बिखरे पन्नों की नई इबारत

अनिरुद्ध ने सब देखा, समझा, मगर उसने कभी आपा नहीं खोया। वह मर्यादा की डोर को थामे रहा। उसने सोचा कि शायद नई जगह, नया माहौल है, प्रज्ञा को सामंजस्य बिठाने में वक्त लगेगा। वह उसे बाहर घुमाने ले जाता, उसकी हर फरमाइश पूरी करता, उसके पसंदीदा उपहार लाता ताकि उसके मन का भटकाव थमे … Read more

मन का दर्पण: एक अनकही दास्तान

माधवी एक ऐसी लड़की थी जिसे ईश्वर ने बड़ी फुर्सत से तराशा था। उसकी बड़ी-बड़ी कजरारी आंखें, दूध सा गोरा रंग, घने काले बाल और चेहरे पर हमेशा खिली रहने वाली एक मीठी सी मुस्कान—जो भी उसे देखता, बस देखता ही रह जाता। सुंदरता के साथ-साथ सरस्वती की भी उस पर विशेष कृपा थी। माधवी … Read more

रिश्तों की नई सुबह

 अंजलि वहीं खड़ी रही। उसके कपड़े गीले थे, उसकी मेहनत से बनाई रंगोली फर्श पर एक भद्दे से दाग की तरह फैल चुकी थी, लेकिन आज उससे भी ज्यादा कुछ और टूट गया था—उसका सब्र। पिछले चार सालों से वह इस घर में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही थी। विकास से उसने लव … Read more

ढलती सांझ का उजाला

सुमन की आंख से एक आंसू ढुलककर गाल पर आ गिरा। उसने आईने की तरफ इशारा करते हुए कहा, “क्या आपको दिख नहीं रहा? मेरे चेहरे की ये झुर्रियां, ये ढलती जवानी… मुझे तो खुद से नफरत होने लगी है। मैं अब पहले जैसी खूबसूरत नहीं रही।” निखिल ने मुस्कुराते हुए सुमन का हाथ अपने … Read more

सुलझती डोर, महकता आशियाना

 विवेक ने मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या बात है मयंक, आज चेहरे पर यह बारह क्यों बजे हैं, क्या प्रोजेक्ट की डेडलाइन को लेकर कोई नई समस्या आ गई है। मयंक ने एक भारी सांस छोड़ते हुए अपनी दोनों हथेलियों से चेहरे को ढंक लिया और गहरी हताशा से भरी आवाज में बोला कि काश … Read more

वक्त की अहमियत और सच्चे रिश्ते

“अरे समधी जी, आपको और सुधा जी को इस बार कोई बहाना नहीं बनाना है। मेरी बहू की गोदभराई की रस्म है, पहला बच्चा आने वाला है घर में। आप लोगों को तो कम से कम एक हफ्ता पहले आना पड़ेगा। घर में इतनी रौनक होगी, और आपके बिना सब सूना लगेगा।” सुमित्रा देवी फोन … Read more

सूने आँगन की तुलसी

विदाई के आँसुओं और सिसकियों के बीच जब तन्वी कार में बैठने लगी, तो उसकी मामी ने उसका हाथ थामकर कान में धीरे से कहा था, “देख तन्वी, लोग चाहे कुछ भी कहें, पर तू बहुत भाग्यशाली है। ससुराल में कोई सास नहीं है जो सुबह चार बजे जगाए या बात-बात पर नुक्स निकाले। बस … Read more

अनकही अनुगूंज: एक गृहणी के समर्पण की कहानी

 मालती की आँखों से आंसुओं की अविरल धारा बह निकली। ये दुख के आंसू नहीं थे, बल्कि बरसों से मन के किसी कोने में दबी हुई उस प्यास के बुझने के आंसू थे, जो एक औरत सिर्फ अपने परिवार के प्यार और सम्मान के लिए महसूस करती है। उसने रमेश की तरफ देखा, जिनकी आँखों … Read more

स्वाभिमान मेरा भी – सीमा सिंघी

शंकर मेरे भाई कैसे हो?? आज बड़ी याद आ रही थी तुम्हारी?? मैं मानता हूं मैंने बहुत बड़ी भूल की है.. पाप किए हैं मैंने मेरे भाई….अपने हिस्से की जमीन के साथ साथ तुम्हारे हिस्से की जमीन भी बेचकर चुपचाप शहर चला आया। जो मुझे नहीं करना था क्योंकि शुरुआती दिन महीने तो मैं बड़ा … Read more

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