बेसहारों का सहारा – गीता वाधवानी

 मालती अपनी मां सुषमा के गले रखकर रो पडी और कहने लगी-” मम्मी, यह आप क्या कह रही हो, पापा आप कह दो यह सब झूठ है। ”   मम्मी और पापा दोनों ने कहा-” नहीं मालती, यह सब झूठ नहीं है सच है। ”   मालती -” नहीं मैं नहीं मानती इस सच को? ”   मम्मी-”  … Read more

सहारा – आरती झा आद्या

“माँ, आज फिर देर हो जाएगी?” रसोई से आती हल्की-सी खनखनाहट के बीच श्रेयांश की आवाज़ में झुँझलाहट साफ़ थी। सावित्री ने पलटकर बेटे को देखा। चेहरे पर थकान थी, पर मुस्कान वैसे ही सजी थी जैसे बरसों से सजी रहती थी। “बस आधा घंटा और… तेरे पापा की दवा दे दूँ, फिर नाश्ता लगाती … Read more

 बेनाम रिश्तों की अनकही दास्तान – आर्या विनोद

 श्रुति अपनी डेस्क पर रखा अपना सारा सामान समेट रही थी। पिछले दो सालों से जिस आर्किटेक्चरल प्रोजेक्ट पर वह और उसकी कंपनी काम कर रही थी, वह आज सफलतापूर्वक पूरा हो गया था। अब उसकी कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका था और कल से उसे इस ऑफिस में नहीं आना था। फाइलों को … Read more

कर्मों का अनकहा हिसाब: एक निस्वार्थ कदम

अनिकेत के जीवन में पिछले कुछ महीने किसी डरावने सपने से कम नहीं थे। पिता के अचानक हुए देहांत के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उसके युवा कंधों पर आ गिरी थी। घर में एक बीमार माँ और कॉलेज के अंतिम वर्ष में पढ़ रही छोटी बहन रिया थी। पिता की जमा-पूंजी माँ के इलाज … Read more

बेनाम रिश्तों की अनकही दास्तान – कृतिका भण्डारी

शाम के धुंधलके में बारिश की हल्की फुहारें शहर की सड़कों को भिगो रही थीं। ऑफिस की दसवीं मंजिल पर स्थित केबिन में खामोशी छाई हुई थी। यह खामोशी किसी उदासी की नहीं, बल्कि एक लंबे और सफल सफर के खत्म होने की थी। श्रुति अपनी डेस्क पर रखा अपना सारा सामान समेट रही थी। … Read more

जब स्वाभिमान ने तोड़ी अपमान की बेड़ियां – निधि सहाय

अवनि आज बहुत देर तक आईने के सामने खड़ी रही। कांच में उभरने वाला अक्स उसे अपना सा नहीं लग रहा था। यह वह अवनि तो बिल्कुल नहीं थी जो पांच साल पहले इस घर में दुल्हन बनकर आई थी। तब वह छरहरी थी, उसके चेहरे पर एक अलग सा नूर था और उसके पति … Read more

**एक अधूरी तस्वीर: दर्द और प्यार का सफर** – मीरा महेश

काव्या ने अपनी माँ, नंदिनी को सिर्फ दीवारों पर टंगी उन बेजान तस्वीरों में ही देखा था। उन तस्वीरों में नंदिनी की आँखें इतनी जीवंत लगती थीं, मानो वो अभी तस्वीर से बाहर आकर काव्या को गले लगा लेंगी। काव्या के लिए उसकी माँ किसी परीकथा की उस रानी जैसी थी, जिसके किस्से उसने अपनी … Read more

एक ज़िद्दी इश्क – नमिता पंडित

 सुहानी अभी कुछ समझ पाती, उससे पहले ही एक सफेद रंग की एसयूवी आकर ठीक उसके सामने रुकी। गाड़ी का दरवाज़ा खुला और इससे पहले कि सुहानी कोई प्रतिक्रिया दे पाती, शौर्य ने उसका हाथ पकड़ा और उसे गाड़ी में बैठने का इशारा किया। उसकी आँखों में एक अजीब सी जल्दबाज़ी और एक ऐसा अधिकार … Read more

किस रूप में… – उषा भारद्वाज

  मोना रसोई में काम कर रही थी।बाहर तेज बारिश हो रही है। थोड़ी देर में ओले भी गिरने लगे । वो खिड़की से बाहर देखने लगी। तभी एक बूढ़ा कमजोर सा भिखारी दिखाई दिया जो सामने पेड़ के नीचे खड़ा था। वो पूरी तरह भीग गया था।  उसने कुछ सोचा फिर  छाता लेकर उसके पास … Read more

सहारा – मधु वशिष्ठ

डोर बैल की आवाज सुनकर भाभी बाहर गईं। थोड़ी देर में उनकी चिल्लाने की आवाज सुनकर मैं भी बाहर निकली तो मैंने देखा भाभी बाहर खड़े कुछ सफाई कर्मचारी जैसे दिखने वाले लोगों से जोर जोर से बोल रही थीं।  कहां काम करते हो तुम ? क्या सरकार तुम्हें तनख्वाह नहीं देती ? जब तुम्हें … Read more

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