सुहाग की निशानी: एक अनकहा बलिदान
मेरे बुटीक में पिछले पांच सालों से काम करने वाली रमा सिर्फ मेरी कर्मचारी नहीं, बल्कि मेरे परिवार के एक सदस्य जैसी हो गई थी। रमा के हाथों में जादू था। वह कपड़ों पर कढ़ाई का ऐसा बारीक और खूबसूरत काम करती थी कि बड़े-बड़े डिज़ाइनर भी उसकी कला के आगे फीके पड़ जाएं। वह … Read more