घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है – बिमला रावत जड़धारी

कमली ने अपने ससुराल वालों के सहयोग से अपनी माॅंजी (भरोसी) का अंतिम संस्कार कर दिया। अब तेरहवीं की व्यवस्था के लिए सास बोली,;तुम दूसरे हिस्से में रह कर शांति से अपनी माॅं का बाकी का काम निपटा लो। सारे रीति-रिवाज पंडित जी तुम से करा देंगे। अभी पितृ भोज की व्यवस्था भी करनी है। … Read more

घर ईंटों से नहीं, दिल से बनता है – शुभ्रा बैनर्जी 

रामेश्वरम ने अपनी पत्नी कमला से वादा किया था, एक सुंदर घर बनाकर कमला को उपहार देने का।हर महीने हार्ड वेयर की दुकान जाते, साथ में एक छोटी सी डायरी और पेन लेकर।दुकान में जाकर सीमेंट,और सरिया की कीमत पूछकर लिखते थे। दुकानदार ने पूछा एक दिन”दादा, पिछले बारह सालों से यही काम कर रहे … Read more

घर ईटों से नहीं दिलों से बनता है – खुशी

रामानंद एक सीधे साधे ईमानदार आदमी थे जो एक सरकारी अध्यापक थे।स्कूल के बाद दो तीन ट्यूशन पढ़ाते फिर शाम को घर लौट कर बच्चों को पढ़ाते ।उनकी पत्नी रजनी गृह लक्ष्मी थी जो घर संभालती बचत करती और अपने पति का सहयोग करती।रामानंद किराए के घर में रहते थे उनकी बहुत इच्छा थी कि … Read more

परिवार – मधु वशिष्ठ

बड़ा सा बोर्ड लगा था और उस पर लिखा था बच्चों का अपना घर। उद्घाटन के बाद जब सब घर जाने को थे तो मिन्नी ने सविता मैडम को रोकते हुए कहा, आप कहीं नहीं जाएंगे आपका कमरा तो यहां ही बना हुआ है अब इस अपना घर का काम आपको ही संभालना है।  मैडम … Read more

एक कटोरी चीनी – प्रतिमा श्रीवास्तव

कुछ ही दिन आए हुए थे कविता को इस शहर में। सबकुछ नया – नया सा था। किसी को जानती नहीं थी, ऑफिस वालों से थोड़ी – थोड़ी जान-पहचान का सिलसिला शुरू हुआ था। कविता बहुत ही सुलझी, समझदार थी, बहुत जल्दी किसी से घुलती मिलती नहीं थी।उसे इंसानों की बहुत समझ थी जो उसे … Read more

आत्मीयता – डॉ बीना कुण्डलिया

अरी शान्ति ओ शान्ति ऽऽऽ राह चलती शान्ति देवी को पीछे से लगी आवाज सुनकर रूकना पड़ा। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो शकुन बुआ उनकी ही तरफ दौड़ी चली आ रहीं थीं।  अरी, हुआ तेरे छोटे लडके का रिश्ता कहीं क्या ? शकुन बुआ बोली। पड़ोसी शकुन बुआ जो रिश्ते कराने का काम करती वो … Read more

घर में रौनक नहीं रही – करुणा मलिक

पूजा, सब ठीक तो है? बार-बार दरवाजे पर आ रही हो सुबह से…..मम्मी जी भी कह रही हैं कि आज पता नहीं, क्या बात है….पूजा कई बार दरवाजे पर दिख रही है। हाँ-हाँ सब ठीक है…..दरसल जोधपुर से दोनों ननदें आने वाली है, वैसे तरुण गए हैं रेलवे स्टेशन….. पर न जाने क्यों लेट हो … Read more

“घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है।” – अंशु कंसल

“मां, आज टिफिन में सूजी का हलवा थोड़ा ज्यादा रखना,” सोनल ने रसोई में काम करती मां से चहकते हुए कहा। मां ने प्यार से उसके बाल सहलाए और मुस्कुराते हुए बोलीं, “पता है मुझे, तुम्हारी सहेली रश्मि को मेरे हाथ का हलवा कितना प्रिय है। पर सोचती हूं, जब तुम दोनों की शादी हो … Read more

घर इंटों से नहीं , दिलों से बनता है | – सुदर्शन सचदेवा

दिल्ली की एक ऊँची सोसायटी के बारहवें माले पर स्थित फ्लैट नंबर 1204 बाहर से किसी सपनों के घर जैसा दिखता था। आधुनिक फर्नीचर, चमकदार इंटीरियर, हर कमरे में एसी, नवीनतम गैजेट्स और हर सुविधा मौजूद थी। सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें देखकर लोग कहते, “वाह! क्या शानदार घर है!” लेकिन उस फ्लैट के भीतर … Read more

पैसा ही सब कुछ नहीं – बिमला रावत जड़धारी

रिया ने अपने बाबा को फोन किया। “बाबा, रोहन का फोन आया था। वह कह रहा था कि बाबा और मम्मी वसीयत बनाने वाले हैं।” “हाँ, बेटा। रोहन ठीक ही बोल रहा था। मैं और मम्मी सोच रहे हैं कि अब वसीयत बना दें, पर रोहन मना कर रहा था कि अभी कोई जरूरत नहीं … Read more

error: Content is protected !!