सिल्क की साड़ी – परमा दत्त झा
आज रामदयाल काफी दिनों के बाद खुलकर हंसा था।कारण बहू और पोती खुशी से भरी थी। बाबा मामा की शादी होने वाली है -वह खुशी से चहक रही थी। अच्छा कब?-यह भी प्रतिप्रश्न किया। अगले महीने,हल्दी,मेंहदी और सारी चीजें इसी बनारस में होगी। लड़की बनारस की है -बहू सारी बात खुशी से बता रही थी। … Read more
रेशम की साड़ी – लीनू अहलूवालिया
मैं घर की सबसे छोटी बेटी थी। उस समय मेरी उम्र लगभग नौ वर्ष थी। पिताजी को गुज़रे चार वर्ष हो चुके थे। उनके जाने के बाद माँ ने अकेले ही हम बहनों का पालन-पोषण किया। आर्थिक तंगी थी, जीवन संघर्षों से भरा था, फिर भी माँ ने कभी हमें प्रेम, संस्कार और आत्मसम्मान की … Read more
कलंकिनी या जीवन दायिनी – शिव कुमारी शुक्ला
दीप्ति सात साल की मासूम बच्ची हतप्रभ खडी थी।उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एकाएक उसके घर में लोगों का आना-जाना क्यों शुरू हो गया। मम्मी पापा अभी कुछ समय पहले ही घर से गये थे कुछ काम करने के लिए उसे मैड के पास छोड़ कर। फिर ये पड़ोसी अंकल घबराए से … Read more
रिश्तो की जमा पूंजी – सीमा सिंघी
मम्मी जी जब आपका मन क्रोधित होता है तो उस वक्त आप मुझे कुछ भी सुनाने से पीछे नहीं हटती है। यह घर आपका है उतना ही मेरा भी है ।जब आप मुझे प्यार नहीं दे पा रही हो तो मुझसे आप सम्मान की उम्मीद कैसे कर सकती है मैं आपकी जितनी अनुभवी तो नहीं … Read more
कब तक आत्म सम्मान खोकर जिएगी – सीमा सिघी
अरे सौम्या यह बिखरी हुई रसोई तुमने अब तक समेटी नहीं??? मैं तुमसे कितनी बार कहा है… मुझे सफाई पसंद है। मुझे इस तरह बिखरी हुई रसोई बिल्कुल अच्छी नहीं लगती है। तुम सब जानती हो…फिर भी तुम इन्हें अधूरा छोड़कर कमरे में चली गई कहते हुए निर्मला जी सौम्या के बिल्कुल करीब आकर खड़ी … Read more
सिल्क की साड़ी – सीमा सिंघी
मम्मी मैं सुबह से देख रही हूं । आप आते-जाते इस अलमीरा में कुछ ढूंढ रही हैं। अगर मुझे भी पता चले तो,मैं शायद कोई आपकी मदद कर दूं कहते हुए नीति ने मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी। नीति को इस तरह पूछते देखकर मैं भी मुस्कुरा कर कहने लगी। नीति मैं वह … Read more
रेशम की खुशबू – लक्ष्मी कानोडिया
अलमारी का सबसे ऊपर वाला खाना खोलते ही मीरा के हाथ ठिठक गए। सामने हल्के आसमानी रंग की बनारसी सिल्क साड़ी बड़े करीने से रखी थी। उसने साड़ी को धीरे से बाहर निकाला और हथेलियों पर फैला लिया। रेशम की मुलायम चमक जैसे वर्षों पुरानी यादों को फिर से जीवंत कर गई। “मम्मी, आप फिर … Read more
रिश्ते चलते हैं बराबरी से
मीरा के हाथों में वह कागज का टुकड़ा बुरी तरह से कांप रहा था। वह कोई मामूली कागज नहीं था, बल्कि समीर की कंपनी से आया हुआ ‘रिलीविंग लेटर’ था। कमरे में पसरा सन्नाटा इतना गहरा था कि मीरा को अपनी ही धड़कनें सुनाई दे रही थीं। सामने पलंग पर बैठा समीर नजरें झुकाए अपने … Read more
सिल्क की साड़ी – डॉ बीना कुण्डलिया
अनु ओ अनु अरे कहां है बिटिया अनु की दादी माँ लगातार पुकारे जा रहीं थीं और अनु का कहीं अता-पता नहीं, तभी उसके दादाजी आवाज सुनकर कमरे में प्रवेश करते हुए कहते हैं अरी भाग्यवती “क्यों चिल्ला रही बच्ची पर “? चैन से रहने दे उसे पल दो पल । दादी बोलीं चिल्ला नहीं … Read more