मज़बूत विश्वास

“माँ जी, मैंने आपको कितनी बार मना किया है कि आप रसोई के किसी भी काम में हाथ मत लगाया कीजिए। ये बर्तन मैं खुद मांज लूंगी और रोटियां भी सेंक लूंगी। आप बस अपने कमरे में जाकर आराम कीजिए।” मेघा ने अपनी सास कमला देवी के हाथ से आटे की परात लेते हुए बहुत … Read more

आत्मसम्मान

“महक , मेरी बात ध्यान से सुनो…” मीरा ने एक गहरी साँस लेते हुए अपनी छोटी बहन की आँखों में देखा। “आज तुम जिस मोड़ पर खड़ी हो, सालों पहले मैं भी ठीक वहीं खड़ी थी। तुम कहती हो कि तुम्हें अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीनी है, ये समाज और इसके बनाए नियम तुम्हें … Read more

निस्वार्थ त्याग

रिया  अपने कमरे में आईने के सामने खड़ी होकर कॉलेज के एक फंक्शन के लिए तैयार हो रही थी। तभी उसके पिता, मदन जी, अपने एक पैर से हल्का सा लंगड़ाते हुए कमरे में आए। उनके हाथ में रिया  की प्रेस की हुई ड्रेस थी। मदन जी के चेहरे पर एक पुराना, गहरा जलने का … Read more

एक नई शुरुआत

“मैं वहां खड़ा रहा, बुत बनकर,” अमन ने अपने आंसू पोंछते हुए कहा। “मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था। एक तरफ वो लोग थे जो बिना सोचे-समझे खाना फेंक रहे थे, और दूसरी तरफ वो मासूम जो उसी जूठन को अपनी ज़िंदगी मानकर खा रहे थे। ये कैसी दुनिया है नेहा? एक ही शहर … Read more

यादों की पगडंडी और सूना आँगन

रघुनाथ जी के लिए अपने ही घर के एक कोने में बैठकर अपनी बहू कृतिका की शिकायतें सुनना अब दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। आज सुबह भी कृतिका फोन पर अपनी सहेली से बात कर रही थी और उसकी आवाज़ रसोई से होते हुए रघुनाथ जी के कमरे तक साफ़ आ रही थी। “अरे … Read more

किराए का बचपन

मेघा को तो जैसे मुंहमांगी मुराद मिल गई। रातों की नींद जो पिछले कई महीनों से हराम थी, वह अब वापस लौट आई थी। रात को कियान रोता, तो सुभद्रा ही उठकर उसे संभालती। अब मेघा सुबह उठकर आराम से योग करती, अपना डाइट नाश्ता लेती और सज-धज कर ऑफिस निकल जाती। वीकेंड्स पर भी … Read more

वह रानी रंग की साड़ी: एक खामोश प्रेम की गवाही

यह पढ़ते ही दोनों ननद-भौजाई एक दूसरे के गले लगकर जोर-जोर से रोने लगीं। सुमित्रा जी ने अपनी मौत की तैयारी भी जैसे पहले से ही कर रखी थी, ताकि जाने के बाद भी उनके बच्चों को कोई तकलीफ न हो। रोने की आवाज सुनकर विकास और पीछे-पीछे रघुनाथ जी भी भारी कदमों से कमरे … Read more

कच्चे धागों का पक्का रिश्ता

नैना  ने राधिका की आँखों में देखते हुए आगे कहा, “राधिका, तुमने मुझे हमेशा अपनी बड़ी बहन माना है ना? तो आज से मेरे ये दोनों भाई, तुम्हारे भी भाई हुए। इस घर की दहलीज के अंदर अगर मैंने तुम्हें अपनी बहन मान लिया है, तो मायके से आए ये मेरे भाई आज से तुम्हारे … Read more

रिश्तों की धूप-छाँव

“मम्मी जी,” स्वाति ने बहुत ही कोमलता से सुमित्रा जी का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा, “मैं देख रही हूँ कि आप पिछले कुछ महीनों से बहुत परेशान हैं। हमने ममता को इसलिए रखा था ताकि आपको आराम मिले, लेकिन आप तो पहले से भी ज़्यादा थकने लगी हैं।” सुमित्रा जी ने गहरी … Read more

रिश्तों के खाली पन्ने

रोहन अपने कमरे से फोन पर बात करते हुए बाहर निकला। सामने माँ-बाप को देखकर उसके भी कदम रुक गए। उसने जल्दी से फोन काटा और आगे बढ़कर पिता के पैर छुए। फिर माँ के पैर छूते हुए थोड़ा झेंपते हुए बोला, “पापा, आप लोगों ने आने से पहले एक बार फोन तो किया होता! … Read more

error: Content is protected !!