अनकहे रिश्ते
देवकी जी की आँखें शून्य में ठहर गईं। जो दर्द उन्होंने सालों से अपने सीने में दबा रखा था, वह अब बाहर आने के लिए तड़प रहा था। उन्होंने गहरी सांस ली और कहा, “हाँ बेटा, तूने मुझे फिर से जीना सिखाया है। मेरा सिद्धार्थ… वह मेरा सब कुछ था। मैं तुझे सब बताऊँगी।” कबीर … Read more