इज्जत

लाल सुर्ख जोड़े में सजी राधिका आईने के सामने बैठी थी। आज उसका रूप निखर कर आ रहा था, लेकिन यह चमक सिर्फ महंगे लहंगे या पुश्तैनी गहनों की नहीं थी। यह चमक उस सुकून और विजय की थी जिसे पाने के लिए उसने एक लंबा, मानसिक और भावनात्मक सफर तय किया था। बाहर आंगन … Read more

मुझे माफ़ कर दे छोटे…

सुरेखा भाभी ने आगे कहा, “वही तो! अगर इतना ही प्यार है अपनी माँ से, तो ले क्यों नहीं जाता अपने साथ? वहां जाकर कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा! लेकिन नहीं, वहां तो साहब को अपनी आज़ादी चाहिए। यहाँ हम दिन-रात खटते रहें और नाम उसका होता रहे कि ‘छोटा बेटा बहुत होनहार है’। सच … Read more

औरत का दिल

थोड़ी सी शर्म कर! तू एक जानवर से भी बदतर है। जिस बाप ने तुझे उंगली पकड़ कर चलना सिखाया, आज जब उसे तेरी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तो तूने उसे मरने के लिए छोड़ दिया। और जिस औरत पर तू ये हाथ उठा रहा है, आज उसी की वजह से तेरे पिता की सांसें … Read more

 परिवार सिर्फ खून के रिश्तों से नहीं बनता

रघुनाथ जी रो पड़े। उन्होंने शेखर को गले से लगा लिया। उनका बरसों का जमा हुआ दुख, वह धोखा, वह पीड़ा, सब शेखर के कंधों पर आँसुओं के रूप में बह निकली। “तुम सच कह रहे हो बेटा… मैंने जिसे अपना समझा, वह पराया निकला… और जिसे मैंने एक दिन यूँ ही इंसानियत के नाते … Read more

डांट में छिपे अथाह प्रेम – संगीता अग्रवाल

“अब तूने मुझे अपने हाथ से खिलाया है, तो थोड़ा मैं भी तुझे खिला दूँ। सुबह से तूने भी तो कुछ ढंग का नहीं खाया होगा मेरी इस ज़िद के चक्कर में,” शांति देवी ने कहते हुए एक निवाला सुमेधा के मुँह में डाल दिया। अयान, जो दरवाज़े के पीछे खड़ा सब कुछ सुन और … Read more

 काश… मेरा अपना कोई घर होता

विकास भी हमेशा अपने माता-पिता का ही पक्ष लेता। धीरे-धीरे बच्चों के मन में भी यह बात बैठ गई कि घर में असली सत्ता दादा-दादी और पापा की है, माँ तो बस घर का काम करने के लिए है। जैसे-जैसे शशांक और नव्या बड़े हुए, उन्होंने भी अंजलि की बातों को अनदेखा करना शुरू कर … Read more

शादी के बाद रोमांस

रोहन के लिए मीरा  का उस घर में होना एक अजीब सा मीठा अहसास था। वह रोज़ सुबह उसे चाय बनाते देखता, आंगन में तुलसी को जल चढ़ाते देखता और शाम को अपनी किताबों में उलझे हुए देखता। मीरा  की हंसी से जैसे पूरा घर गूंज उठता था। रोहन दिल ही दिल में मीरा  को … Read more

गर्व भरी नज़र से

मेरी एक बेहद करीबी दोस्त हुआ करती थी, नाम था अंजलि। अंजलि का परिवार शहर के नामी और रसूखदार लोगों में गिना जाता था। उसके परिवार को लोग ‘डॉक्टर्स फैमिली’ कहते थे। उसके पिता डॉ. माथुर शहर के सबसे बड़े न्यूरोसर्जन थे, माँ डॉ. रश्मि एक जानी-मानी गायनेकोलॉजिस्ट थीं और अंजलि का बड़ा भाई, विक्रम, … Read more

मातृत्व

“चुप कर पागल लड़के! कहाँ जाने की बात कर रहा है रात के इस पहर?” उन्होंने बैग को पलंग के नीचे धकेलते हुए डांटा, लेकिन इस डांट में वो पुराना वाला स्नेह था। “क्या समझता है तू अपनी माँ को? मेरी कोख से जन्मा है तू, क्या मैं तेरी तकलीफ नहीं समझूंगी? ठीक है… नहीं … Read more

दिखावा – संगीता अग्रवाल

लोगों की आँखों में आँसू आ गए थे। एक दोस्त गुस्से में बोल पड़ा, “लानत है ऐसे बेटे पर! ऐसे इंसान को तो सरेआम सजा मिलनी चाहिए। कौन था वो नरपिशाच?” माधव ने एक गहरी साँस ली। उसकी नज़रें सीधे सुशांत पर जाकर टिक गईं। सुशांत, जो अब तक बड़े आराम से खड़ा था, अचानक … Read more

error: Content is protected !!