सपनों की उड़ान और रिश्तों की दहलीज

शाम का धुंधलका गहराने लगा था और बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। ड्राइंग रूम में टीवी पर समाचार चल रहे थे, जहाँ विक्रम अपने मोबाइल में उलझा हुआ था, पास ही सोफे पर बैठी उसकी माँ सुमित्रा जी स्वेटर बुन रही थीं और पिता रघुनाथ जी अपने चश्मे को नाक पर टिकाए अखबार के … Read more

उड़ान : एक अनकहा सफर

दूसरी ओर, रोहन भी अपने पिता के इस हस्तक्षेप से बुरी तरह चिढ़ गया था। पिता के सामने वह पलट कर जवाब तो नहीं दे सकता था, लेकिन उसका पुरुषार्थ इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहा था कि उसकी पत्नी अब उससे एक कदम आगे निकल चुकी है। पति और पत्नी एक गाड़ी … Read more

परंपराओं की दोहरी कसौटी: एक नई बहू की अनकही कहानी

 सिद्धार्थ, जो अब तक इस पूरे मामले से अनजान था, तुरंत सारी स्थिति समझ गया। उसने अपनी भाभी का साथ देते हुए कहा, “बड़ी अम्मा, भाभी बिल्कुल सही कह रही हैं। सम्मान दिल में होता है, दिखावे में नहीं। तान्या ने हमारे घर और हमारे रीति-रिवाजों को पूरे दिल से अपनाया है। अगर मेरे ‘ताई … Read more

असली दौलत

 सुधाकर बाबू ने तुरंत बीच में टोकते हुए कहा, “अरे तो इसमें सोचने वाली क्या बात है? पागल है क्या तू? पुणे में क्या रखा है! तू अमेरिका जाएगा। मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी इस सीलन भरे घर में और दफ्तर की घिसी हुई कुर्सियों पर बिता दी, ताकि तू खुले आसमान में उड़ सके। अपने … Read more

कर्मों की वसीयत

“हम किसी को दोष नहीं दे सकते अंजलि,” आंटी ने बड़ी सहजता से कहा। “रोहन कोई बुरा बेटा नहीं है। वह बस हमारी ही परछाईं है। उसने वही सीखा जो हमने उसे दिखाया। हम अपने माता-पिता के बुढ़ापे की लाठी नहीं बने, तो हम किस हक से उम्मीद करें कि रोहन हमारा सहारा बनेगा? प्रकृति … Read more

कुछ बंधन तोड़ देना ही अच्छा है – चित्रलेखा व्यास ‘नीलचित्रा’

आँगन में रखी तुलसी सूखने लगी थी। सावित्री रोज उसे पानी देती, फिर भी उसकी पत्तियाँ मुरझाती जातीं। शायद पौधे को भी वही चाहिए था, जो मनुष्य को चाहिए—थोड़ी धूप, थोड़ी हवा और जीने की आज़ादी। सावित्री की बेटी नंदिनी भी पिछले कई वर्षों से भीतर ही भीतर ऐसी ही सूख रही थी। शादी के … Read more

ममता का बँटवारा

मीरा के हाथों में मायके से आया वह लिफाफा किसी सूखे पत्ते की तरह कांप रहा था। खिड़की से छनकर आती दोपहर की उदास हवा उस पन्ने को फड़फड़ा रही थी, मानो वह कागज भी मीरा के सीने में उठते तूफान की गवाही दे रहा हो। उसकी आँखों से गिरती गर्म बूंदों ने खत की … Read more

स्वाभिमान की छत

रात के खाने का समय हो चुका था, लेकिन घर में पसरा सन्नाटा किसी तूफान के आने का संकेत दे रहा था। डाइनिंग टेबल पर रखे खाने से उठती भाप धीरे-धीरे ठंडी हो रही थी। तभी बेडरूम से एक ज़ोरदार आवाज़ आई। कांच का एक गिलास ज़मीन पर गिरकर चकनाचूर हो गया था। “तुम्हें मेरी … Read more

समर्पण के अनकहे रंग: एक कामकाजी माँ की खामोश तपस्या

“कभी खुद को आईने में देखा है तुमने, मीरा? क्या हाल बना लिया है अपना। न बालों में कंघी करने का होश है, न ढंग के कपड़े पहनने का। आंखों के नीचे काले घेरे पड़ गए हैं और वजन तो जैसे बढ़ता ही जा रहा है। घर का हाल देखो, ऐसा लगता है जैसे कोई … Read more

सूने आँगन की छाँव

“समीर ने लंदन में खुद ही कोर्ट मैरिज कर ली है, रघुनाथ जी। ना हमसे कुछ पूछा, ना कोई बात की। बस एक मैसेज और दो तस्वीरें भेज दीं। क्या हम उसके जीवन में इतने गैर हो गए थे?” सुमित्रा जी की आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उनके हाथों में … Read more

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