अफसोस – मधु वशिष्ठ

नीता की रिश्तेदारी में लड़कियों की ही संख्या ज्यादा थी और सभी बहनें लगभग हम उम्र ही थी। चाची जी ताई जी नीता की मम्मी और बुआ सब अपनी  अपनी लड़कियों के लिए लड़के देख रहे थे। हालांकि ताई जी और बुआ जी की लड़कियां नीता से काफी बड़ी थी। नीता के पिता को दफ्तर … Read more

बहुत अफसोस है मुझे – मंजू ओमर

संजय अजय अरुण अरे कहां हो सब लोग भाई इधर आओ एक खुशखबरी है तुम  सबके रामावतार जी बेटे को आवाज लगा रहे थे। तभी रामावतार की दोनों बहुएं कावेरी और शिखा बाहर निकाल कर आई। बड़ी बहू कावेरी बोली संजय तो बाथरूम में है कोई काम हो तो हमें बता दीजिए बाबूजी। नहीं तुम … Read more

ममता का आंगन

सत्यनारायण जी और सरस्वती देवी ने आश्चर्य से उस पैकेट को देखा। सुगंधा ने बड़े ही मनोवैज्ञानिक और अपनेपन भरे अंदाज में समझाना शुरू किया, “मां जी, जब हमारे बच्चे छोटे थे, तो हम उन्हें डायपर पहनाते थे ताकि वे रातभर गीलेपन से परेशान न हों और सुकून से सो सकें। जीवन का पहिया जब … Read more

विश्वास की नई सुबह

अनघा ने बहुत ही शांत भाव से प्रणव की सारी बातें सुनीं और फिर मुस्कुराते हुए कहा, “प्रणव जी, जो बेटा अपने माता-पिता के दुख को देखकर खुद शादी से डरने लगे, वह इंसान दिल का कितना सच्चा होगा, यह समझने के लिए मुझे किसी परीक्षा की जरूरत नहीं है। माता-पिता का सम्मान करना किसी … Read more

चुप्पी की टूटी परतें

“मुझे माफ कर दो रोहिणी,” शैलेश जी का गला रुंध गया, “मैंने तुम्हें कभी वह साथी नहीं समझा जो बराबरी पर खड़ा होता है। मैंने हमेशा तुम पर अपनी मर्जी थोपी। आज मुझे एहसास हो रहा है कि बच्चे तो अपनी दुनिया में चले गए, अब इस ढलती उम्र में हम दोनों ही एक-दूसरे का … Read more

ममता की धूप

रितिका अब और खुद को संभाल नहीं पाई। उसके सब्र का बांध टूट गया और वह फफक-फफक कर कल्याणी जी के सीने से लिपट गई। वह किसी छोटी बच्ची की तरह रोने लगी, “मां… मुझे माफ कर दीजिए… मुझे माफ कर दीजिए मां!” कल्याणी जी ने उसे कसकर अपने आलिंगन में भर लिया। रितिका के … Read more

धूप की पहली चुस्की

सुनैना ने मुस्कुराते हुए अपने आंसू पोंछे और कहा, “बाबूजी, आज से रोज सुबह की पहली चाय आपके कमरे में, आपके उठने से पहले पहुंचेगी। और जब तक आप चाय नहीं पी लेंगे, इस घर का कोई दूसरा चूल्हा नहीं जलेगा।” पंकज ने आगे बढ़कर पिता और पत्नी दोनों को अपने आलिंगन में समेट लिया। … Read more

आत्मसम्मान की कसौटी

“अथर्व,” बृजेश जी की आवाज़ में अब क्रोध नहीं, बल्कि एक पिता का गहरा आत्ममंथन था, “तुझे बचाने की अंधी दौड़ में मैं यह भूल ही गया था कि मैं तुझे एक नागरिक और एक सच्चा इंसान बनाने की जगह एक कायर और धोखेबाज़ बनाना सिखा रहा था। तूने सही कहा बेटा, सच और प्रायश्चित … Read more

प्यार का धागा

 “भाभी! क्या सीरियसली?” तान्या की आवाज में साफ कड़वाहट और तंज था, “आप मेरे पच्चीसवें जन्मदिन पर अपने हाथ से सिली हुई ड्रेस गिफ्ट कर रही हैं? आपको पता भी है कि मैं किस सर्कल में उठती-बैठती हूं? मेरी सारी फ्रेंड्स इंटरनेशनल और प्रीमियम ब्रांड्स के कपड़े पहनती हैं। अगर मैं लोकल टेलर जैसी हाथ … Read more

रिश्ते की असली नींव

 गायत्री जी ने भरे गले से कहा, “तान्या, सच कहूँ तो जब मैं यहाँ आ रही थी, तो मेरे मन में बहुत सा मैल था। मुझे लगा था कि तुम आजकल की हवा में उड़ने वाली लड़की हो जो परिवार को अपनी शर्तों पर चलाना चाहती है। लेकिन आज तुमने मेरी आंखें खोल दीं। तुमने … Read more

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