सपनों की उड़ान और रिश्तों की दहलीज
शाम का धुंधलका गहराने लगा था और बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। ड्राइंग रूम में टीवी पर समाचार चल रहे थे, जहाँ विक्रम अपने मोबाइल में उलझा हुआ था, पास ही सोफे पर बैठी उसकी माँ सुमित्रा जी स्वेटर बुन रही थीं और पिता रघुनाथ जी अपने चश्मे को नाक पर टिकाए अखबार के … Read more