मोहभंग: वो आखिरी कदम

 “जाओ काव्या, लौट जाओ अपने घर,” कबीर ने गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए कहा। “यह तुम्हारे लिए एक सबक है। भगवान का शुक्र मनाओ कि मैं कोई बुरा इंसान नहीं था, वरना रात के इस अंधेरे में तुम्हारा क्या अंजाम होता, तुम सोच भी नहीं सकती। मैंने तुम्हें सिर्फ यह एहसास दिलाने के लिए यहाँ … Read more

अनकहे शब्दों की चुभन

मैंने आगे कहा, “नए रिश्तों की ज़मीन बहुत नाज़ुक होती है सुमित्रा। इसमें मज़ाक का भारी हल नहीं चलाया जाता, बल्कि प्यार और समझदारी का बीज बहुत नरमी से बोना पड़ता है। तुम्हारी और निशांत की जान-पहचान पुरानी हो सकती है, लेकिन श्रुति के लिए तुम अभी भी ‘सास’ हो, ‘मां’ नहीं बनी हो। मां … Read more

रक्त की रोटी और नियति का क्रूर खेल

चिंटू अपनी पूरी ताकत लगाकर अपनी मां की छाती से चिपका हुआ था। वह बार-बार अपना छोटा सा मुंह अपनी मां के स्तनों पर मार रहा था, इस उम्मीद में कि शायद उसकी क्षुधा शांत करने के लिए वहां से दूध की कोई बूंद छलक पड़े। लेकिन एक मां, जिसके अपने ही पेट में पिछले … Read more

अनदेखी बेड़ियाँ: ‘चार लोगों’ का खौफ

विदाई की रुलाई और सफर की थकान से राधिका का पोर-पोर दर्द कर रहा था। भारी लहंगे और गहनों के बोझ से उसका शरीर जैसे सुन्न पड़ गया था। ससुराल की दहलीज पार करने के बाद उसने सोचा कि अब वह अपने कमरे में जाकर थोड़ी देर आँखें मूंद लेगी। लेकिन अभी वह बिस्तर के … Read more

भ्रम का आईना

नीता मेरी कॉलेज के दिनों की सबसे करीब सहेली थी। हम दोनों ने साथ में पढ़ाई की, साथ में सपने देखे थे, लेकिन शादी के बाद नीता की दुनिया पूरी तरह से बदल गई। उसकी शादी एक बहुत ही अच्छे परिवार में हुई थी। उसके पति, राघव, एक मल्टीनेशनल कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट थे और … Read more

रिश्तों का बाज़ार और एक बेटी का स्वाभिमान

रमाकांत जी भारी मन और झुके हुए कंधों के साथ घर लौटे। सुमित्रा ने जब उनका उतरा हुआ चेहरा देखा, तो वह तुरंत समझ गईं कि कुछ गड़बड़ है। रात के अंधेरे में दोनों पति-पत्नी अपने कमरे में बैठकर इस नई मुसीबत पर चर्चा करने लगे। “सुमित्रा, उन्होंने इतनी बड़ी मांग रख दी है कि … Read more

चमकता घर और वो उंगलियों के निशान

 आज रश्मि घर के हर कोने में जाकर उन निशानों को ढूंढती है जो कभी उसे चुभते थे। वह डाइनिंग टेबल के कांच को छूकर महसूस करने की कोशिश करती है कि शायद कहीं काव्या की उंगलियों की छाप छूट गई हो। वह अंश के कमरे में जाकर उस खाली बिस्तर को घंटों निहारती है … Read more

मज़बूत नींव की खुरदरी ईंट

निधि अपने माता-पिता की इकलौती और सबसे लाडली बेटी थी। उसके मायके का माहौल ऐसा था कि अगर वह सुबह के दस बजे तक भी सोती रहे, तो उसकी माँ दबे पाँव कमरे में आती और बहुत ही प्यार से उसके माथे पर हाथ फेरकर कहती, “बेटा उठ जा, चाय ठंडी हो रही है।” निधि … Read more

रिश्तों की चुभन और एक माँ का खोखला आदर्श

“अनन्या, सुन रही है? कल करवा चौथ है और तू जानती है कि रिया का यह पहला व्रत है। घर में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। तू आज ही बाज़ार जाकर सरगी का सारा सामान, फल, मेवे और मठरियाँ ले आ। और हाँ, कल सुबह रिया को भूल से भी जल्दी मत उठाना। बेचारी का … Read more

सोने की चेन – शुभ्रा बैनर्जी 

अब मां की तबीयत दिन ब दिन खराब ही होती जा रही है।कभी शुगर बिल्कुल कम हो जाता है,तो हाइपो में चली जाती हैं।अस्पताल में भर्ती करना उन्हें ,कोई कम टेढ़ी खीर नहीं।इस असंभव से काम को करने की जिम्मेदारी भी शुभा पर ही थी।इनके बेटे की भी यही आदत थी, इंजेक्शन लगवाने से और … Read more

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