धुंध से परे का सवेरा
पंखुड़ी उठी, उसने झुककर मेरे माथे को चूमा और बोली, “मैं समर के साथ लिव-इन में इसलिए रह रही हूँ माँ, ताकि मैं अपने फैसले खुद ले सकूं। मैं आपकी तरह किसी डर के साए में घुट-घुट कर नहीं जीना चाहती। और हाँ… आलोक चाचा पिछले हफ्ते ही यूनिवर्सिटी से रिटायर हुए हैं। वे आज … Read more