धुंध से परे का सवेरा

पंखुड़ी उठी, उसने झुककर मेरे माथे को चूमा और बोली, “मैं समर के साथ लिव-इन में इसलिए रह रही हूँ माँ, ताकि मैं अपने फैसले खुद ले सकूं। मैं आपकी तरह किसी डर के साए में घुट-घुट कर नहीं जीना चाहती। और हाँ… आलोक चाचा पिछले हफ्ते ही यूनिवर्सिटी से रिटायर हुए हैं। वे आज … Read more

साए से सवेरे तक

सुनंदा ने कसम खाई थी कि जिस उपेक्षा, अकेलेपन और तिरस्कार के साए में उसका अपना बचपन बीता था, उसकी परछाई भी नयनतारा पर नहीं पड़ने देगी। उसने अपनी हर सांस, अपनी हर ख्वाहिश अपनी बेटी के नाम कर दी। नयनतारा भी विलक्षण प्रतिभा की धनी निकली। जब वह छोटी थी, तो स्कूल से लौटते … Read more

बद्रीनाथ की छाया में

 मंदाकिनी के संशय के सारे बांध टूट गए। उसने रोते हुए कल्याणी देवी के चरण स्पर्श कर लिए और फिर शास्त्री जी के चरणों में सिर झुका दिया। बद्रीनाथ के पावन प्रांगण में, अलकनंदा की कल-कल बहती धारा और भगवान बद्री विशाल की साक्षी में, बिना किसी आडंबर और दहेज के, केवल वैदिक मंत्रों और … Read more

परंपरा की बेड़ियां

 “मम्मी जी, जब कोई इंसान अपने सबसे प्यारे शौक को, अपनी आत्मा की आवाज को मजबूरी में मार देता है, तो उसके भीतर एक टीस रह जाती है। आपने अपनी जवानी में त्याग किया क्योंकि तब का समाज ऐसा था। लेकिन आज जब आप मुझे गाते हुए देखती हैं, तो आपको मेरा गाना बुरा नहीं … Read more

घर की असली लक्ष्मी

देवांश के हर एक शब्द ने मालती आंटी के अहंकार पर करारा प्रहार किया था। उनके चेहरे का रंग उड़ गया था। पहली बार उन्हें आईना दिखाया गया था, और वह आईना किसी गैर ने नहीं, बल्कि उनके अपने बेटे ने दिखाया था जिसे वे अपनी सबसे बड़ी जागीर समझती थीं। हरिशंकर जी भी आगे … Read more

तकदीर की देहरी पर ठहरी मोहब्बत

“तुमने ऐसा क्यों किया देवांग? तुमने मुझे इतना कमजोर, इतना स्वार्थी समझ लिया?” नैना ने रोते हुए उसके सीने पर अपनी हथेलियों से मारा, “क्या मेरा प्यार सिर्फ तुम्हारी अच्छी सेहत, तुम्हारी दो सीधी टांगों से था? अगर आज मेरी जगह तुम्हारे साथ यह हादसा हुआ होता, तो क्या तुम मुझे छोड़कर चले जाते? बोलो!” … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी

सुमित्रा जी की आँखों में भी नमी उतर आई। उन्होंने कृतिका के सिर पर ममता से हाथ फेरते हुए कहा, “पगली बच्ची, इसमें माफ़ी कैसी? गलती तुम्हारी नहीं है। हमारे समाज में टीवी सीरियलों ने, पुरानी दकियानूसी कहानियों ने और कुछ कड़वे अनुभवों ने सास-बहू के रिश्ते को एक जंग का मैदान बना दिया है। … Read more

देहरी के पार का आसमान

 कौशल्या जी की आंखों से खुशी और आत्मग्लानि के मिले-जुले आंसू बह निकले, “मैंने अपनी झूठी जिद और उस निर्जीव ईंट-पत्थर की हवेली के मोह में अपनी जिंदगी के सात सबसे खूबसूरत साल अकेले घुट-घुट कर गंवा दिए। जिस सुख, शांति और स्वर्ग को मैं वहां ढूंढ रही थी, वह तो यहां तुम बच्चों की … Read more

प्रेम की परिपक्वता

 मानसी ने चाय का एक कप अर्णव को थमाया और दूसरा कप कल्याणी जी के हाथों में देते हुए बोली, “माँ जी, आज आपकी मालिश अर्णव नहीं, मैं करूँगी। यह दिन भर के थके हुए हैं, इन्हें तो मालिश करना भी ठीक से नहीं आता होगा। अर्णव, आप जाकर गर्म पानी से नहाइए और फ्रेश … Read more

रिश्तों की धूप-छांव  

 मिहिर थोड़ा रुका, उसने माँ के हाथ को अपने गाल से लगाया और आगे बोला, “और रही बात सौम्या की, माँ… तो सौम्या तो मेरी आत्मा है, मेरी अर्धांगिनी है। उसके साथ तो मुझे अपना पूरा जीवन बिताना है। अगर मैं पहले आपके पास आ गया, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मेरा … Read more

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