चौखट का मोह
“मुझे माफ़ कर दो मेरे बच्चों…” गजेंद्र बाबू का गला रुंध गया। “मैं अपनी झूठी ठसक और इस मिट्टी के मोह में अंधा हो गया था। मैं भूल गया था कि ज़िंदगी का असली सुख चारदीवारी में नहीं, अपनों की बाहों के घेरे में होता है। आज इस मकान का मोह खत्म हुआ। अब हम … Read more