असली चरित्र
ट्रेन के पहियों की एक लयबद्ध खट-खट और खिड़की से पीछे छूटते हुए पेड़ों के दृश्य मुझे हमेशा सुकून देते थे, लेकिन आज यह सफर मुझे अंदर ही अंदर एक अजीब सी बेचैनी दे रहा था। मेरे सामने वाली सीट पर मेरी पत्नी, सुमेधा बैठी थी, और उसकी त्योरियां इस बात का सुबूत थीं कि … Read more