वक्त का पहिया – सीमा सिंघी

घड़ी का कांटा नौ पर पहुंच चुका था। रागिनी अपने काम जल्दी-जल्दी निपटाने में लगी हुई थी इसीलिए राज को और दोनों बच्चों को टिफिन देकर विदा किया और खुद भी नाश्ता लेकर बैठ गई और फिर नाश्ते के बर्तन सिंक में डाले और जल्दी-जल्दी हाथ चलाने लगी । रसोई का काम निपटाकर रागिनी ऑफिस … Read more

वक्त का पहिया घूमता जरूर है – मंजू ओमर

सुनिए  जी दीपक को जरा फोन करिए बात करने का मन कर रहा है, किया था फोन अरविंद जी ने कहा ,पत्नी सुनीता से । तो क्या हुआ नहीं उठाया फोन कभी उठाता है वह मेरा । और ना कभी अपने आप  फोन करता है ।  अरे नहीं उठाता भाग्यवान मैं कितनी बार तुमसे बता … Read more

वक्त के आईने में – सुनीता मुखर्जी “श्रुति”

आकृति एक छोटे-से कस्बे में अपने तीन भाई-बहनों के साथ रहती थी। माता-पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार सभी बच्चों का पालन-पोषण किया था। माँ घर सँभालती और पिता दिन-रात मेहनत करके किसी तरह धन अर्जन करते थे। आकृति ने बचपन से ही अभावों का जीवन देखा था। उसके मन में कुछ करने की चाह … Read more

कुछ नहीं जाता साथ – शुभ्रा बैनर्जी 

घर की बड़ी बेटी थी अपर्णा।वैसे तो एक बड़ा भाई था,जो डेढ़ साल बड़ा था उससे,पर घर में राज उसी का चलता था।पिता ने हमेशा उसे लाड़ करते हुए यही कहा था “मेरी मां आई है।” और वो उसे मां कहकर ही बुलाते थे।अपनी छोटी बहन सुपर्णा के अलावा शायद ही वह किसी और को … Read more

समय का पहिया – खुशी

जानकीनाथ और रामप्रसाद दोनों भाई थे। जानकीनाथ ने एक कपड़े की दुकान पर काम किया। वहीं से उन्होंने कपड़े के व्यापार का काम सीखा और अपनी साइकिल पर छोटी-सी दुकान शुरू की। मेहनत, लगन और ईमानदारी से वह छोटी-सी दुकान धीरे-धीरे बढ़ती गई और कुछ ही वर्षों में जानकीनाथ एक मिल के मालिक बन गए। … Read more

वक़्त का इंसाफ – श्वेता अग्रवाल

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के बाहर शंभू सिर झुकाए बैठा हुआ था। तभी उसके कानों में ज़ोर से ठहाके की आवाज़ आई। जानी-पहचानी आवाज़ सुनकर उसने जैसे ही सामने की ओर देखा, उसकी आँखें आँसुओं से भर गईं। सामने उसका बेटा गर्व, शहर के सबसे नामचीन वकील माथुर साहब के साथ हँसते हुए आ रहा था। माथुर … Read more

भाग्य भरोसे (अर्चना सिंह)

स्नेहा अपने चार वर्षीय बेटे चीकू को लेकर अभी गेट के अंदर ही घुसी थी तो पाया कि मुख्य दरवाजे का ताला टूटा हुआ था। स्नेहा के चेहरे की तो मानो हवाई उड़ रही थी। बहुत हिम्मत करके घर के अंदर घुसी तो देखा सारे सामान इधर उधर फैले -उलझे हुए पड़े थे। जैसे ही … Read more

वक्त का पहिया – दीपा माथुर

“वक्त का पहिया कहाँ रुकता है? है न?” सुधा जी ने मुस्कुराते हुए विद्यार्थियों की ओर देखा और फिर बोलीं— “तो हम कैसे रुक सकते हैं? हमें भी चलना ही होगा, है न? क्यों? हम रुक जाएँ… रील, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और फेसबुक स्क्रॉल करते-करते वक्त को आगे जाने दें और हम पीछे रह जाएँ। फिर … Read more

वक्त का पहिया – डॉ.आभा माहेश्वरी

शहर के पुराने हिस्से में एक आलीशान हवेली थी—‘शांति निवास’। कभी इस हवेली के नाम से ही पूरे शहर में उसके मालिक सेठ हरदयाल की पहचान थी। अनाज का बड़ा कारोबार था। गोदाम भरे रहते, तिजोरियाँ धन से और आँगन मेहमानों से भरा रहता। हरदयाल को अपने धन पर बड़ा गर्व था। वह अक्सर कहा … Read more

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