आस्तीन का साँप
मनोरमा जी ने नंदिनी के सिर पर हाथ रखते हुए रुंधे गले से कहा, “बेटी, मुझे माफ़ कर दो। मैं एक माँ होकर भी एक ईर्ष्यालु औरत के बहकावे में आ गई और तुम्हारे जैसी साक्षात देवी स्वरूपा बच्ची को पहचानने में भूल कर बैठी। भारती जी, मुझे क्षमा कर दीजिए। अगर आप हमें क्षमा … Read more