रौशनी की दहलीज
सिद्धार्थ ने अपनी माँ निर्मला देवी की तरफ देखा, जिनकी आंखों में आंसू थे। निर्मला देवी को भी अपनी गलती का अहसास हो रहा था। वो दौड़कर गायत्री के पास गईं और उसे गले लगा लिया। “मुझे माफ़ कर दे बेटी। मैं दुनिया के डर से एक माँ का फर्ज़ भूल गई थी।” मीरा मुस्कराई … Read more