आस्तीन का साँप

मनोरमा जी ने नंदिनी के सिर पर हाथ रखते हुए रुंधे गले से कहा, “बेटी, मुझे माफ़ कर दो। मैं एक माँ होकर भी एक ईर्ष्यालु औरत के बहकावे में आ गई और तुम्हारे जैसी साक्षात देवी स्वरूपा बच्ची को पहचानने में भूल कर बैठी। भारती जी, मुझे क्षमा कर दीजिए। अगर आप हमें क्षमा … Read more

अहसास का आईना

शारदा ने उठकर पानी का गिलास उसके सामने रखा और बड़े सहज भाव से कहा, “रागिनी, हमने कभी आलोक जी की उस कड़वाहट का बदला लेने की नहीं सोची। पर उस दिन हमें एक बहुत बड़ा सबक मिला। हमने सीखा कि स्वाभिमान से बड़ा कोई धन नहीं होता, और यह भी सीखा कि हर इंसान … Read more

हक की दीवार

 जब वंदना अपनी ससुराल के आंगन में खड़ी होकर अपने ससुर और जेठ के सामने जोर-जोर से बोल रही थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि रिश्तों की कड़वाहट इतनी दूर तक जाएगी। वंदना की शादी को सात साल हो चुके थे। पति नितेश एक निजी बैंक में कार्यरत थे और सीधे-सादे स्वभाव के … Read more

ममता की विरासत

मयंक बिना कुछ कहे चाची के पैरों में गिर पड़ा और उनके घुटनों पर सिर रखकर बच्चों की तरह सुबकने लगा। “मुझे माफ कर दीजिए चाची… मुझे माफ कर दीजिए। मैं भटक गया था। आपके बिना हमारा घर श्मशान जैसा है, कोई शांति नहीं है वहां। आपको कहीं नहीं जाना है। आपका घर वही है … Read more

ज़हर का प्याला

 “मैं बिल्कुल पूरे होश-ओ-हवास में हूँ अनिरुद्ध,” गरिमा ने बिना पलक झपकाए कहा। “तुमने अभी-अभी कहा ना कि यह तुम्हारी ज़िंदगी है, अपनी कमाई है और तनाव मिटाने के लिए पीते हो। तो सुनो, तनाव मुझे भी है। सुबह पाँच बजे उठने से लेकर रात के ग्यारह बजे तक, घर का हर कोना साफ करने, … Read more

रिश्तों की डोर

 पति-पत्नी के रिश्ते में काहे की हेकड़ी और कैसी अकड़ दीदी? झुकने से अगर अपना घर बचता है, तो झुक जाना कोई हार तो नहीं होती।” तुलसी के इन सीधे, अनगढ़ और ठेठ शब्दों ने अवनि के कानों में पिघले हुए शीशे की तरह असर किया। अवनि अवाक रह गई। वह कुर्सी पर वापस बैठ … Read more

मौन की देहरी पर बंधा विश्वास

अवनि के हलक से आवाज़ नहीं निकली। बस एक गहरी, भारी सिसकी फोन के उस पार पहुँची। “अवनि, बोलो भी! तुम डरा रही हो मुझे। क्या बात है?” समर का स्वर अब बेचैनी से भर गया था। “समर… बस एक आखिरी बार तुम्हारी आवाज़ सुननी थी। आज के बाद शायद कभी इस तरह तुम्हें फोन … Read more

माँ का आंचल

 कल्याणी जी के इन शब्दों ने नूपुर के भीतर की सारी ग्रंथियां खोल दीं। नूपुर को अपनी गलती का गहरा अहसास हुआ। उसे समझ आ गया कि जिस कड़वाहट का शिकार आज कल्याणी जी बनी थीं, उसकी शुरुआत जाने-अनजाने खुद उसी के हाथों हुई थी। कल्याणी जी ने न केवल अपने बेटे की मानसिक स्थिति … Read more

फर्ज की आहुति

देवानंद को लगा कि इतने सालों बाद शायद भाभी का दिल पिघल गया हो, और वैसे भी अनन्य उनकी अपनी ही भतीजी थी। अपनी लाडली के सुनहरे भविष्य की खातिर देवानंद अपना आत्मसम्मान एक तरफ रखकर फिर से कामिनी के आलीशान बंगले पर पहुँचे। उन्होंने विनती करते हुए कहा, “भाभी, अनन्य का दाखिला यहाँ के … Read more

नेकी की कसौटी

“बस प्रह्लाद जी,” आलोक जी ने हाथ उठाकर उन्हें वहीं रोक दिया, “शब्दों का और अपमान मत कीजिए। झूठी तारीफों का जो नशा आप मुझे बेच रहे थे, उसकी कीमत मैंने बहुत अच्छे से चुका दी है।” इतना कहकर आलोक जी मुड़े और हॉल में लौट आए। अब उनका दृष्टिकोण पूरी तरह बदल चुका था। … Read more

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