मेरे जैसे बदनसीब दुनिया में कोई नहीं – सीमा सिंघी 

नंदू के जाने के बाद गीता की जिंदगी बड़ी वीरान हो गई थी। उसने बड़ी भाग दौड़ कर अपने पति नंदू का इलाज कराया मगर अचानक ऐसी निगोड़ी बीमारी आ लगी । जो नंदू को ले जाकर ही शांत हुई। नंदू तन से गरीब था मगर मन से नहीं इसीलिए वो गीता और अपनी दस … Read more

बड़े भाई हो बाप मत बनो। – सीमा सिंघी

छोटे भाई राज के घर में घुसते ही ब्रजेश बोल उठा। छोटे लाइट का बिल कल याद कर के दे देना और हां कल दुकान पर भी तुम थोड़ी जल्दी चले जाना, कुछ ग्राहक आने वाले हैं। अभी आते वक्त तुम सब्जी लेकर घर आ सकते थे। खैर कोई बात नहीं, अब आ गए हो … Read more

घर के लक्ष्मी का सम्मान – डाॅ उर्मिला सिन्हा

   बड़ी सी हवेली कई-कई  हवादार कमरे सुसज्जित।  हवेली के पीछे बड़ा सा फलों का बाग साम tcने रंग-बिरंगे फूलों का बागीचा। चारदिवारी के भीतर ही स्वच्छ न निर्मल जल का पोखरा जिसमें तरह-तरह की मछलियां तैरती रहती। माली के साथ दो-चार सेवक बाहर-भीतर घर की साफ-सफाई देखभाल में लगे रहते।  सुख-समृद्धि,रिद्धि -सिद्धि का वास था … Read more

अजनबी सफ़र  : एक अनकहे रिश्ते की दास्तान – शशि चोपड़ा

 “मैं जानता हूँ कि तुम यहाँ अपने अतीत को समेटने आई हो,” माधव ने बहुत ही कोमल स्वर में कहा। “लेकिन जब तुम वापस दिल्ली लौटो, और अगर तुम्हें लगे कि उस बड़े शहर की भीड़ में तुम्हें एक ऐसे दोस्त की ज़रूरत है जो तुम्हारे साथ सिर्फ एक कप चाय पीकर तुम्हारी खामोशी को … Read more

प्यार की उड़ान – यशोदा सिंह

 “श्रुति बेटा,” कौशल्या देवी ने बहुत ही गंभीर लेकिन ममता भरी आवाज़ में बोलना शुरू किया, “मैं बहुत खुश हूँ कि मेरे बेटे ने अपने जीवनसाथी के रूप में तुम्हें चुना है। तुम बहुत प्यारी हो। लेकिन मुझे एक बात बताओ… इतनी रात गए तुम यहाँ मेरे बेटे के साथ हो, क्या तुम्हारे माता-पिता यह … Read more

औरत का दर्द – सुधा चौहान

 “चुप… एकदम चुप बेशरम!” शालिनी ने अपनी उंगली नीलू  के चेहरे की तरफ तानते हुए फुफकार कर कहा। “बोल तो ऐसे रही है जैसे वह तेरे मालिक न होकर तेरे बहुत अपने हो गए हों। अरे बदज़ात, तूने यह भी नहीं सोचा कि तू किस घर में सेंध मार रही है? पर तू भला क्यों … Read more

इश्क़ का नया सफर – दिव्या मिश्रा

 “मैं एक ऐसी लड़की का इंतज़ार कर रहा था, जिसने अपनी पूरी जवानी दूसरों के लिए कुर्बान कर दी। मैं इंतज़ार कर रहा था कि कब उसके कंधों से ज़िम्मेदारियों का बोझ कम हो, कब वो अपने परिवार के दायित्वों से मुक्त हो और कब मैं उससे कह सकूं कि अब उसे अकेले चलने की … Read more

*घर के लक्ष्मी का सम्मान* – तोषिका

आज भगवान ने हमारी सुन ली, हमें बहु के रूप में एक बेटी दे दी खुश होते हुए माही के सास ससुर बोले। अरे समधन जी आज से हमारे घर की लक्ष्मी, आपके घर की लक्ष्मी है। माही की सास बोली “आप लोग फिकर ना कीजिए, माही बेटी को हम बिल्कुल पलकों की छांव में … Read more

कड़वे बोल – करुणा मलिक 

कमलेश, कुछ भी करके भाभी के मायके वालों से बातचीत करवा दे वरना घर बिगड़ जाएगा मेरे भाई का।  अब मैं कैसे बात करवा दूँ जब तेरी माँ ने बहू के साथ मारपीट करके घर से निकाला था तब इस बात का ख्याल नहीं आया था कि बेटे का घर बिगड़ जाएगा। उन्होंने तो बड़े … Read more

भाग्य का दोष नहीं  _सोच का दोष है ।। – अंजना ठाकुर

कुसुम जी को अपनी बेटी सुरभि की शादी की बहुत चिंता थी उनका मानना था लड़की एक बार अपने घर चली जाए तो वो गंगा नहा ले ।सुरभि पढ़ी लिखी थी लेकिन कुसुमजी की सोच के कारण वो नौकरी नहीं कर पाई उनका सोचना था कि बाहर निकलते ही लड़कियां बिगड़ जाती है सुरभि के … Read more

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