आसमान की दो उड़ानें

गजेंद्र ने भरी सभा में देविका को वे कानूनी कागज थमा दिए और धमकी दी कि अगर उन्होंने शांति से हवेली नहीं छोड़ी, तो वह पुलिस और अदालत का सहारा लेकर उन्हें बेइज्जत करके बाहर निकालेंगे। देविका यह सुनकर टूट गईं। एक तरफ बेटी की शादी सर पर थी, अगर यह विवाद बाहर जाता तो … Read more

अपने-पराए का दायरा

 रोहिणी भी आगे आई और उसने विशाखा के कंधे पर हाथ रखा। उसकी आँखों में भी पश्चाताप के आंसू थे। “भाभी, मुझे सच में माफ कर दीजिए। मैं अपनी माँ की सेवा में इतनी व्यस्त हो गई कि मैंने कभी आपकी तरफ देखा ही नहीं। मैं सोचती रही कि मैं माँ के पास रुककर बहुत … Read more

आँसुओं की छाँव में खिला सिंदूर

 कल्याणी जी उठकर खड़ी हो गईं। उन्होंने लाल चुनरी अवंतिका की गोद में रख दी। “फैसला अब तेरे हाथ में है। या तो इसी कमरे में बैठकर सारी ज़िंदगी आंसुओं के समंदर में डूबती रह और अपने पिता की आत्मा को भी कष्ट देती रह, या फिर एक वीर पिता की बहादुर बेटी बनकर उठ, … Read more

निश्छल प्रेम

रोहन के इन शब्दों में इतनी सच्चाई और दृढ़ता थी कि सुनयना की आंखों में खुशी और अविश्वास के आंसू छलक आए। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि शहर का इतना पढ़ा-लिखा और अमीर लड़का उसे इस कदर मान देगा। वह बिना कुछ कहे रोहन के सामने हाथ जोड़कर वहां से चली … Read more

दूरियों के पार का अपनापन

 “मैं समझ गई हूं बेटा,” मालती देवी ने अपनी साड़ी के पल्लू से आंखें साफ करते हुए एक हल्की मुस्कान के साथ कहा। “अब बहुत हो गया मेरा यह हठ। कल रविवार है। कल दोपहर का खाना इस घर की रसोई में नहीं बनेगा। कल हम सब—मैं, तुम्हारे बाबूजी, तुम दोनों और हमारे पोते-पोती—सब मिलकर … Read more

कांच के महल की दरारें

  “यह आपने क्या किया सिद्धार्थ? बिना किसी दूसरी नौकरी के आपने इस्तीफा दे दिया? बच्ची का स्कूल, मकान का किराया, घर का राशन… ये सब कैसे चलेगा?” सिद्धार्थ ने बड़ी बेपरवाही और बेशर्मी से अवनि की तरफ देखा और अपने कंधे उचकाते हुए बोला, “तुम किसलिए हो? तुम्हारी नौकरी तो चल ही रही है ना! … Read more

ममता की कोई कीमत नहीं

“सुनीता भाभी, कुछ तो मर्यादा रखिए अपनी जुबान की। मैं इस घर की बेटी हूँ, कोई बाहर से आई लालची औरत नहीं,” अंजलि ने अपने आंसुओं को पलकों पर ही रोकते हुए भारी गले से कहा। वह अभी-अभी अपनी बीमार माँ के कमरे से बाहर निकली थी और वापस अपने घर जाने के लिए अपना … Read more

मौन की दीवारें 

 अगले कुछ हफ़्ते उस छोटे से फ्लैट में एक दमघोंटू सन्नाटे की तरह गुज़रे। दोनों एक ही बिस्तर पर सोते थे, लेकिन उनके बीच अनकहे शब्दों की एक विशाल खाई बन चुकी थी। नयना को लगने लगा कि उसकी आधुनिकता, उसकी समझदारी और उसकी स्वतंत्रता शायद इस मौन के सामने हार रही थी। उसने महसूस … Read more

ममता की कोई जात नहीं होती

कौशल्या देवी ने बहुत ही गंभीर, मगर स्पष्ट और बुलंद आवाज में कहा, “कांति बहन, तुम हमारी समवयस्क हो, इसलिए तुम्हारी बात का मान रखते हुए बड़े प्यार से एक बात पूछना चाहती हूं। जब कोई बच्चा अपनी मां के गर्भ में नौ महीने पलता है, तो क्या उस मां का खून, उसकी हड्डियां और … Read more

आँचल की छाँव

 सलोनी पलटी और उसने गौरव की आँखों में सीधे देखा, “तमाशा मैंने नहीं, तुम्हारी संवेदनहीनता ने खड़ा किया है भैया। जो इंसान कल तुम्हारे लिए एक गैर-जरूरी बोझ था, आज उसके जाने पर तुम्हें सिर्फ अपनी झूठी लोक-लाज की चिंता है? तुम्हें मुबारक हो यह बड़ा मकान, मैं अपने भगवान को अपने साथ ले जा … Read more

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