Emotional Kahaniya
दो पीढ़ियों का रिश्ता
लंदन की सर्द और भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, जब कार ने बनारस की संकरी और जानी-पहचानी गलियों में प्रवेश किया, तो कबीर के चेहरे पर एक अजीब सी सुकून भरी मुस्कान तैर गई। कबीर और उसकी पत्नी मायरा शादी के तीन साल बाद पहली बार भारत आ रहे थे। मायरा वैसे तो भारतीय मूल … Read more
भाई का निस्वार्थ प्रेम
“तू बहुत बड़ा मूर्ख है, केदार! तुझे क्या लगा, मुझे तेरी चोरी का पता नहीं चलेगा?” सोमनाथ रुंधे गले से बोला। केदार भी रोते हुए मुस्कुराया, “और आप? आप कब से इतने चालाक हो गए भैया कि मेरे ही बक्से में सेंध मार दी?” दोनों भाई एक-दूसरे के गले लगकर बच्चों की तरह रो रहे … Read more
संस्कार के बीज
रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे। पैंसठ वर्षीय सुमित्रा देवी अपनी पंसदीदा किताब के कुछ पन्ने पलट कर बस सोने की ही तैयारी कर रही थीं। उनका यह पच्चीस सौ स्क्वायर फुट का दो मंजिला घर, जिसे उन्होंने अपने पति के गुजर जाने के बाद अपनी पाई-पाई जोड़कर बनाया था, अब उनकी एकांत दुनिया … Read more
दिल के रिश्ते
“अनन्या, उठो। लगता है नीचे अंकल की तबीयत ज्यादा खराब है,” सिद्धार्थ ने अपनी पत्नी को जगाते हुए कहा। दोनों दौड़कर नीचे गए। देवकी जी ने रोते हुए दरवाजा खोला। अंदर रमाकांत जी सीने पर हाथ रखे सोफे पर गिरे हुए थे और उन्हें सांस लेने में भयंकर तकलीफ हो रही थी। उनका चेहरा पसीने … Read more
मेरी बेटियां बोझ नहीं है
“भाभी, मैं हाथ जोड़कर विनती करती हूँ कि मेरी बच्चियों को इस तरह मनहूस और बोझ कहना बंद कर दीजिए। जब मुझे और इनके पिता को इनका कोई भार नहीं लगता, तो आप लोग क्यों इनके भविष्य की चिंता में अपना खून जला रही हैं?” सुमेधा ने अपनी तीन छोटी-छोटी बेटियों को सीने से चिपकाते … Read more
गिरवी रखा हुआ मकान
“पापा कहाँ हैं माँ?” घर की दहलीज पर कदम रखते ही सुमित ने अपनी माँ, सुलोचना जी से पूछा। उसके चेहरे पर एक अजीब सी थकावट और आँखों में एक छिपी हुई उलझन थी। सुलोचना जी बरामदे में बैठी स्वेटर बुन रही थीं। उन्होंने सुमित की आवाज़ सुनकर एक बार नज़र उठाई, लेकिन अगले ही … Read more