खौफ के पार एक उम्मीद
रमा देवी बार-बार दरवाजे की ओट से बाहर झांकतीं और फिर निराश होकर आंगन में लौट आतीं। उनके माथे की लकीरें उनके भीतर चल रहे तूफान को साफ बयां कर रही थीं। उनके पति, जो कभी एक मिल में काम करते थे, पिछले तीन सालों से लकवे का शिकार होकर बिस्तर पर थे। घर में … Read more