अनकहे वात्सल्य

राधिका जब ब्याह कर ‘आनंद भवन’ में आई थी, तो उस घर की भव्यता से ज्यादा वहां के कड़े अनुशासन ने उसे डरा दिया था। शहर के नामी और प्रतिष्ठित ‘शर्मा परिवार’ की बहु होना कोई आसान बात नहीं थी। घर की हर चीज़ घड़ी की सुई के साथ चलती थी। और इस पूरे घर … Read more

अधूरा दिल

बनारस के घाटों पर शाम की आरती की गूंज और उन सीढ़ियों पर बैठे दो युवा दिल—राधिका और कबीर। उन दोनों की दुनिया एक-दूसरे से शुरू होकर एक-दूसरे पर ही खत्म होती थी। कबीर एक उभरता हुआ चित्रकार था, जिसके पास सपनों का एक बड़ा आसमान था, लेकिन हकीकत की जमीन अभी तक बंजर थी। … Read more

अनकहा प्यार

रागिनी ने गुस्से से अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और बिस्तर पर धम्म से बैठ गई। उसकी आँखों में आँसू थे और मन में एक ही बात बार-बार गूँज रही थी— “आखिर मैं इस घर में अपनी मर्जी से साँस भी क्यों नहीं ले सकती?” शादी से पहले उसकी सहेलियों ने उसे चेताया था … Read more

हर बहू एक जैसी नहीं होती – मुकेश पटेल

सास बड़ी बहू की ज्यादतियों की सजा छोटी बहु को दे रही थी.. फिर हुआ कुछ ऐसा रसोई घर के बर्तनों की खड़खड़ाहट के बीच भी सावित्री देवी की तीखी नज़रों से कुछ नहीं छुपता था। जैसे ही उनकी छोटी बहू, वंदना, ने फ्रिज खोला, सावित्री देवी हॉल से ही चिल्लाईं, “वंदना! दूध का पैकेट … Read more

जब पिता ने बेटों से मांग लिया.. मकान में रहने का किराया : मुकेश पटेल

“माँ, आज फिर परांठे में घी ज्यादा है। आपको पता है न मैं डाइट पर हूँ? और यह वाई-फाई (Wi-Fi) फिर से अटक रहा है। पापा से कहिए न कि प्लान अपग्रेड करवाएं। मेरा वर्क फ्राम होम डिस्टर्ब होता है,” बड़े बेटे, नमन ने चिढ़ते हुए कहा। वह एक एमएनसी में सीनियर मैनेजर था, उम्र … Read more

माँ ने घर छोड़ दिया… क्योंकि वो सम्मान चाहती थी, सहारा नहीं 💔 – : संगीता अग्रवाल

शाम के सात बज रहे थे। ड्राइंग रूम में महंगी क्रॉकरी के कपों में चाय की भाप उठ रही थी, लेकिन माहौल में एक बर्फ़ीली ठंडक जमी हुई थी। सोफे पर सुधीर और उसकी पत्नी नमिता बैठे थे। उनके चेहरों पर हवाइयां उड़ रही थीं। सामने आरामकुर्सी पर सुधीर की माँ, कावेरी देवी, बेहद शांत … Read more

“बहू पर आरोप लगा… लेकिन सास ने ऐसा जवाब दिया कि मोहल्ला चुप हो गया!” – गरिमा चौधरी

“अरे बहन, आजकल की बहुओं का तो यही ड्रामा है। मोबाइल पर लगी रहती होंगी। अब देखो, तुम्हारा बेटा ‘रजत’ तो बेचारा सुबह आठ बजे ही अपनी गाड़ी साफ करता दिख रहा था। और महारानी जी अभी तक बिस्तर तोड़ रही हैं? छुट्टी का दिन तो पति की सेवा के लिए होता है, या कुंभकर्ण … Read more

घर की राह – गरिमा चौधरी

 अचानक से मोबाइल का स्क्रीन चमका और एक मैसेज आया  “माँ, बाबा… इस बार नहीं आ पाएँगे। ऑफिस में बहुत काम है।” मैसेज उनका बेटा अमित भेजता था—हर बार वही कारण, हर बार वही दूरी। धनिया ने चुपचाप फोन रख दिया। फिर भी वह हँसने की कोशिश करते हुए बोली,“काम तो होता है बेटा… शहर … Read more

आख़िरी समय की जीवनसंगिनी

बरामदे की कुंडी खटकी तो रमाकांत ने अख़बार मोड़कर एक तरफ़ रखा। इस वक़्त किसी के आने की उम्मीद नहीं थी। दरवाज़ा खोला तो सामने खड़े व्यक्ति को देख वह ठिठक गए। सामने उनके कॉलेज के पुराने मित्र नरेश खड़े थे—चेहरा उतरा हुआ, आँखों के नीचे गहरे साये और कंधों पर ऐसा बोझ जैसे बरसों … Read more

पहला पहला प्यार है – वीणा सिंह

आज नील और मैं एक-दूसरे से ऐसे बात कर रहे थे जैसे सालों पुराने अजनबी हों।सूखे से, औपचारिक, जैसे बस ज़रूरत भर की बात करनी हो। मैंने बालकनी के शीशे में अपना चेहरा देखा तो मन ही कसक उठा—कहाँ गया वो नील जो मेरी हँसी सुनते ही खुद हँसने लगता था?कहाँ गई वो आर्या जो … Read more

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