अनकही चुभन: शहनाइयों के बीच एक खामोश चीख
“अरे विशाखा! तुम कहां छुप कर बैठी हो अपने कमरे में? आज तुम्हारी सगी बहन की मेहंदी है और तुम ही पूरे घर से गायब हो? माना कि तुम्हारे अपने भाग्य में सुख नहीं लिखा, पर कम से कम बहन की खुशियों में तो ऐसे मनहूसियत मत फैलाओ। मुंह लटका कर बैठने से क्या अब … Read more