स्मृतियों की धुंध

“अरे वाह! मुझे हमेशा से पता था कि तुम एक दिन बहुत बड़े अफसर बनोगे। तुम्हारी मेहनत और लगन ही ऐसी थी,” अवंतिका की आंखों में एक सच्चा गर्व झलक रहा था। “मैं यहां हिमाचल यूनिवर्सिटी में बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) की एक नेशनल कांफ्रेंस में मुख्य वक्ता के तौर पर आई हूं। मैं चंडीगढ़ की … Read more

खोखली सोच और एक पाक रिश्ता

लेकिन, यह पूरा नजारा दूसरी मंजिल की बालकनी में खड़ी मालती जी की गिद्ध जैसी नजरों से नहीं बच पाया। उन्होंने देखा कि एक जवान लड़की एक बूढ़े आदमी को महंगे फूल और तोहफे दे रही है और वह बूढ़ा आदमी उसे देखकर खुशी से फूला नहीं समा रहा है। मालती जी के खुराफाती दिमाग … Read more

कांच के ख्वाब

 एक शाम जब मीरा काम से लौटी, तो उस का चेहरा उतरा हुआ था और आँखें सूजी हुई थीं। शांति से अब और रहा नहीं गया। उन्होंने मशीन बंद की और मीरा के पास जाकर बैठ गईं। “मीरा… बेटी, मुझे बहुत डर लग रहा है। तू पिछले कई दिनों से बहुत परेशान दिख रही है। … Read more

सच्चाई का स्पर्श

मैंने बहुत कम उम्र में ही दुनिया का असली चेहरा देख लिया था। मैंने अपने हक के लिए लड़ना सीखा है। अगर कोई मुझसे तेज आवाज में बात करता है, तो मैं चुप होकर रोने वाली लड़की नहीं हूं, मैं पलटकर जवाब देती हूं। मेरे व्यवहार में एक तरह का कड़कपन है, जो असल में … Read more

ममता की बगावत

“अब यह मेरे साथ रहेगा!” मीरा ने कबीर को गोदी में उठाते हुए एक सख्त आवाज में कहा। “तू इसे कहीं नहीं ले जा सकती! मैं पुलिस बुला लूंगा! तुझे जेल भिजवा दूंगा, चरित्रहीन औरत!” राहुल ने चिल्लाते हुए मीरा का हाथ पकड़ने की कोशिश की। मीरा ने राहुल का हाथ झटक दिया और उसकी … Read more

विश्वास घात – लक्ष्मी कनोडिया ‘अनिका’

दिल्ली की भीड़भरी गलियों में रहने वाली बाईस वर्ष की नंदिनी अपने घर की सबसे छोटी बेटी थी। घर में सबसे छोटी होने के कारण उसे हमेशा बहुत लाड़-प्यार मिला था। माता-पिता और बड़े भाई-बहनों ने कभी उस पर घर की बड़ी जिम्मेदारियाँ नहीं डालीं। उसका जीवन पढ़ाई, खेल-कूद, सहेलियों और अपनी छोटी-सी दुनिया में … Read more

परछाईयों की तलाश – अनीता रवि

ऐसे लगता है जैसे सारी मनौतियाँ पूरी करने कर के गंगा नहा आई हूँ या हज से लौटी हूँ या पवित्र रोमनगरी से हो आई हूँ  । शब्‍दों के धागे जैसे मन की भावनाओं को गूँथ ही नहीं पा रहे । बस महक रही हूँ मैं अखंड तृप्ति के फूलों की सुगंध से । विश्‍वास … Read more

विश्वासघात – मधु वशिष्ठ

तनु धीरे-धीरे थाने के अंदर  गई और वहां बैठे पुलिसकर्मी से अपनी एफआईआर लिखने के लिए कहा। थाने में उसकी अतिरिक्त बहुत से लोग बैठे थे तभी वहां पर घूमती एक महिला पुलिसकर्मी  ने कहा आप अपनी  रिपोर्ट पीछे वाली टेबल पर बैठी महिला पुलिसकर्मी को लिखवाइए। तनु वहां पर गई , उसकी आंखें आंसुओं … Read more

कच्चे धागे – एम. पी. सिंह

पूनम की डोली ससुराल पहुची, वो बहुत खुश थी। परिवार में ननद और ससुर के अलावा कोई नहीं था। पति अंगद की अच्छी नोकरी थी। सब ठीक चल रहा था, ओर जल्दी ही वो पति औऱ ससुर की चहेती बन गई। परंतु पूनम की ननद बिमला ज्यादा घुल मिल नहीं रही थीं।  उसे भाभी की … Read more

बहू की विदाई – शुभ्रा बैनर्जी

बचपन से जानती थी सुषमा मधु को।मधु ,सुषमा की सहेली की इकलौती बेटी थी।सुषमा और सविता(मधु की मां)का मायका एक ही कस्बे में था।दोनों ने बारहवीं कक्षा तक साथ में ही पढ़ाई की थी।सुषमा का ब्याह कॉलेज पूरा होते ही शहर में रहने वाले सरकारी नौकरी में कार्यरत एक क्लर्क से हो गई।सविता ज्यादा पढ़ … Read more

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