एक रात का सफर
आज, मोहिनी ने वही किया था। वह अपने ही घर में एक चोर की तरह दबे पांव उठी थी। अलमारी से अपनी मां के गहनों का डिब्बा निकाला, कुछ नगद रुपये रखे और अपनी सालों की यादों को एक छोटे से बैग में ठूंसकर उस दहलीज को पार कर गई, जिसने उसे चलना सिखाया था। … Read more