“भरोसे की कीमत ” – कमलेश आहूजा

सरोज के घर में सुनीता कई वर्षों से काम करती थी।वह ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थी, लेकिन मेहनती और ईमानदार थी।अपनी छोटी-सी दुनिया में वह परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करती थी। उसकी बेटी पूजा ने भी अब एक पैकेजिंग कंपनी में काम करना शुरू कर दिया था।पढ़ाई अधिक नहीं कर … Read more

विश्वासघाती – बालेश्वर गुप्ता

चले गये ना,कहते थे जीवन भर साथ निभाऊंगा। तुम्हारे इतने भर कहने मात्र से सब घरबार,सब रिश्ते नाते छोड़ तुम्हारे साथ चली आई थी।बताओ,अब किसके सहारे और किसके लिए जिऊं? विलाप करती करती सरोज बेहोश हो गयी।        तीस वर्ष पूर्व एक छोटे से कस्बे में एक प्रेम पुष्प विकसित हुआ था।तीस वर्ष  पहले,तब प्रेम होना … Read more

शिकायत नहीं समझौता – मधु वशिष्ठ

पापा वाली गाड़ी में पेट्रोल कैसे खत्म हो सकता है, गाड़ी तो चली ही नहीं। पवन और अमित के हॉस्टल जाने के बाद मैंने खुद गाड़ी की टंकी फुल करवाई थी। नीचे ही तो खड़ी हुई थी चलो मम्मी से पूछते हैं। रहने दो, हो सकता है अब तक सो गई होंगी वैसे तुमने नोटिस … Read more

जिसे उसने अपना सच समझा – लक्ष्मी कनोडिया ‘अनिका’

“माँ, आप मुझे पहचानती हैं?” सामने बैठी वृद्धा ने कुछ क्षण उस लड़की को देखा। फिर मुस्कराकर बोलीं— “बिल्कुल। तुम मेरी बेटी हो।” लड़की की आँखों में आँसू आ गए। “नहीं माँ… मैं आपकी बेटी नहीं हूँ।” वृद्धा चुप हो गईं। कमरे में कुछ देर तक सिर्फ दीवार पर लगी घड़ी की टिक-टिक सुनाई देती … Read more

‘मुनिया’ – श्वेता अग्रवाल 

अभी अम्मा जी दोपहर का खाना खाकर लेटी ही थी कि अचानक गेट खटखटाने की जोर-जोर से आवाज़ आने लगी।  “अम्मा! ओ अम्मा दरवाजा खोलो।” “आ रही हूॅं। कौन आ गया इस वक्त? दो घड़ी सुस्ताने भी नहीं देता।” धीरे-धीरे दरवाजे की ओर बढ़ती अम्मा जी बड़बड़ाई। लेकिन जैसे ही वह दरवाजे के करीब पहुॅंची … Read more

इस गुनाह की माफी नहीं – शुभ्रा बैनर्जी

सविता जी की उम्र अब सत्तर के करीब हो चुकी थी।शरीर तो कमजोर हुआ था,पर इच्छाशक्ति और भी मजबूत हो रही थी।पति अरिहंत जी उम्र में उनसे पांच-छह साल बड़े थे।एक बेटे और दो बेटियों का परिवार था उनका।बच्चों की शादी करवा कर चिंता मुक्त हो चुके थे दोनों।बेटियां तो अपने ससुराल में रह रहीं … Read more

विश्वास घात – लक्ष्मी कनोडिया ‘अनिका’

दिल्ली की भीड़भरी गलियों में रहने वाली बाईस वर्ष की नंदिनी अपने घर की सबसे छोटी बेटी थी। घर में सबसे छोटी होने के कारण उसे हमेशा बहुत लाड़-प्यार मिला था। माता-पिता और बड़े भाई-बहनों ने कभी उस पर घर की बड़ी जिम्मेदारियाँ नहीं डालीं। उसका जीवन पढ़ाई, खेल-कूद, सहेलियों और अपनी छोटी-सी दुनिया में … Read more

विश्वासघात – मधु वशिष्ठ

तनु धीरे-धीरे थाने के अंदर  गई और वहां बैठे पुलिसकर्मी से अपनी एफआईआर लिखने के लिए कहा। थाने में उसकी अतिरिक्त बहुत से लोग बैठे थे तभी वहां पर घूमती एक महिला पुलिसकर्मी  ने कहा आप अपनी  रिपोर्ट पीछे वाली टेबल पर बैठी महिला पुलिसकर्मी को लिखवाइए। तनु वहां पर गई , उसकी आंखें आंसुओं … Read more

विश्वासघात – मंजू ओमर

आज अनूप अपने बड़े भाई का कालर पकड़कर घर से बाहर निकाल रहा था ,चले जाओ यहां से कुछ नहीं है तुम्हारा यहां। आसपास खड़ी अनूप की दोनों बड़ी बहनें अनूप को समझा रही थी क्या कर रहे हो अनूप बड़ा भाई है तुम्हारा। देखो अनूप ज़र, ज़मीन, पैसा में किसी का हक नहीं मारना … Read more

विश्वासघात – उमा वर्मा

अजी सुनती हो,शोभा का रिश्ता तय करके आया हूँ “राघव जी ने पसीना पोछते हुए अपनी पत्नी गीता को पुकार कर कहा ।”कहाँ तय कर दिया? कुछ बताया भी नहीं “गीता अचानक खुशी से अकबका गई ।”अरे वो शुक्ला जी हैं न, रामपुर वाले,उन्ही का बेटा है श्याम उसी से बिना लेनदेन के बात पक्की … Read more

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