पूनम की डोली ससुराल पहुची, वो बहुत खुश थी। परिवार में ननद और ससुर के अलावा कोई नहीं था। पति अंगद की अच्छी नोकरी थी। सब ठीक चल रहा था, ओर जल्दी ही वो पति औऱ ससुर की चहेती बन गई। परंतु पूनम की ननद बिमला ज्यादा घुल मिल नहीं रही थीं। उसे भाभी की सुंदरता और पढ़ी लिखी होने से जलन हो रही थी।
बात बात पर वो भाभी को कुछ न कुछ बोलती रहती, पर पूनम मुस्कुरा देती ओर कुछ न बोलेगी। समय बीतता गया और ननद की भी शादी हो गई और जल्दी ही एक प्यारी सी बेटी भी हो गई.
पूनम के ससुर की भी उम्र हो रही थी और वो बीमार भी रहने लगे थे। तभी एक दिन अंगद को बुलाकर बोले, बेटा मैं सोचता हूँ कि गांव वाली जमीन बेच देते हैं, वहां जाना तो होता नही। अंगद बोला जैसा आप ठीक समझे पिता जी।
अगले दिन अंगद के पिता जी ने ब्रोकर से बात करके ज़मीन बेचने के लिए कह दिया। कुछ दिन बाद ब्रोकर का फोन आया और डील फाइनल कर दी।
कुछ दिन बाद सारी कागजी कारवाही पूरी हों गईं और पैसे उनके एकाउंट में आ गए।
रात को खाना खाते समय पापा ने अंगद से कहा कल ऑफिस जाते समय चेक ले जाना ओर अपने एकाउंट में जमा कर देना। अंगद बोला ठीक है पिता जी।
लेकिन सारे पैसे आप मुझे क्यो दे रहे हो? क्या आप बिमला को कुछ नहीं दोगे? वो भी तो इस घर का हिस्सा है। अंगद ओर उसके पिता दोनों एक दूसरे को देखते रहै.
तभी अंगद के पिताजी बोले, बेटा शादी में तो सब दे दिया था, अब क्या जरूरत है? पिताजी कुछ और बोलते, इससे पहले अंगद बोला, माँ के जाने के बाद बिमला ने इस घर को संभाला, यहाँ तक की अपनी पढ़ाई भी कुर्बान कर दी, अगर मै कुछ बन पाया तो उसकी वो भी बराबर की हकदार है. राखी भी आ रहीं है, इस बहाने उसकी कुछ मदद भी हों जाएगी.
तभी पूनम बोली, ये ठीक कहते है, बिमला के पति इनके जितना नहीं कमाते, ओर उनकी एक बेटी भी है, घर गृहस्ती में काम आएगा।
मेरी मानो तो आधा पैसा बिमला को बाकी आधा अपने पास रखो। कल इनकी नीयत बदल गई तो आपका क्या होगा? किसी पर भी ज्यादा भरोसा नहीं करना चाहिए। ये तो अपना घर अच्छे से चला रहे है। और अगर भाई, पिता ही ध्यान नहीं रखेंगे तो कौन रखेगा?
अंगद के पिताजी भावुक हो गए और बोले, अंगद, तू कितना समझदार हों गया है, चाहता तो मै भी था की बिमला को कुछ पैसे दें दू पर डरता था की तुम नाराज हों जाओगे.
आज अगर तुम्हारी माँ जिंदा होती, तो बहुत खुश होती। फिर बोले, अंगद बेटा, तू बिमला को फोन कर दे, आकर पैसे ले जाए।
अंगद कुछ बोलता, इससे पहले पूनम बोल पड़ी, पिताजी, मेरी बिमला से बात हो गई है, वो संडे को राखी पर आ रहे हैं।
अंगद ने अपने अकाउंट से बिमला के नाम का एक चेक बनाया और पापा को दें दिया और बोला आधी रकम आप बिमला को अपने हाथों से दें देना.
संडे को जब बिमला राखी के लिए आई तो अपने पिता से इतनी बड़ी रकम का चेक देखकर फूली नहीं समाई, अंगद बोला, बिमला, मै तेरा “राखी का कर्ज” कभी नहीं उतार सकता, इस साल मुझे माफ कर दें, अगले साल तुझे अच्छा गिफ्ट दें दूँगा.
दो बहन भाई गले मिल गए लेकिन बिमला की आँखों मै आँसू थे.
ये सच है की “राखी का कर्ज” उतरना किसी भी भाई के लिए नामुमकिन होता है.
एम. पी. सिंह
कोटा, राज़.
स्वरचित