त्याग की मूरत और स्वार्थ का आईना

शहर की चकाचौंध और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच, माधव अपनी पत्नी कामिनी और सात साल की बेटी रिया के साथ एक आलीशान फ्लैट में रहता था। माधव ने अपने जीवन में बहुत तरक्की की थी। एक साधारण से घर से निकलकर उसने अपनी एक अच्छी खासी कंस्ट्रक्शन कंपनी खड़ी कर ली थी। इस सफलता … Read more

ससुराल की देहरी और मायके का आँगन: एक अनकही सच्चाई

अलार्म की तीखी आवाज़ ने काव्या की नींद तोड़ दी। उसने फोन की स्क्रीन पर समय देखा—सुबह के साढ़े पाँच बज रहे थे। नवंबर की हल्की ठंड में रजाई से बाहर निकलने का बिल्कुल मन नहीं था, लेकिन रसोई की जिम्मेदारियां उसे पुकार रही थीं। काव्या की शादी को अभी महज़ आठ महीने ही हुए … Read more

ज़िंदा लाश: एक बहन का खौफ़नाक इंसाफ़

अदालत के उस विशाल और शांत कमरे में आज एक अजीब सा सन्नाटा पसरा था। यह सन्नाटा किसी डर का नहीं, बल्कि एक स्तब्ध कर देने वाले सच का था। कटघरे में अट्ठाईस वर्षीय देविका खड़ी थी। उसके चेहरे पर न तो कोई पछतावा था, न कोई खौफ और न ही किसी तरह की घबराहट। … Read more

लौटते कदमों की आहट

 लड़की की आँखों में एक अजीब सी चमक आई, लेकिन यह चमक सम्मान की नहीं, बल्कि एक तीखे सवाल की थी। उसने कहा, “तो फिर अंकल, जब आप इतने बड़े आदमी हैं, तो आपने इस भूखी बच्ची को दस रुपये का बिस्किट क्यों नहीं दिला दिया? आप तो बैठकर बस देखते रहे।” अंकल थोड़ा सकपका … Read more

एक अनकही विदाई

 “पापा… ये क्या हो गया? आपने बताया क्यों नहीं कि आपकी तबीयत खराब है? आपको कोई परेशानी थी तो मुझसे कहना चाहिए था, आख़िर मैं आपका बेटा हूँ!” अभिनव के आँसू श्रीनाथ जी के हाथों पर गिर रहे थे। श्रीनाथ जी ने एक बहुत ही फीकी, लेकिन दर्द भरी मुस्कान के साथ उसकी तरफ देखा। … Read more

कांच के रिश्ते और आभासी दुनिया

 रामेश्वर जी ने एक व्यंग्यात्मक लेकिन दर्द भरी मुस्कान के साथ कहा, “यही तो दुख है बेटा। दुनिया तुम्हें श्रवण कुमार समझ रही है, लेकिन तुम्हारे माता-पिता यहाँ प्यासे बैठे हैं। तुमने लिखा कि ‘स्वर्ग माता-पिता के चरणों में है’, लेकिन इस घर में कदम रखे तुम्हें आठ घंटे हो गए हैं, और तुमने एक … Read more

डिग्रियों के बोझ तले दब गए रिश्ते

 सुशीला जी ने अपने आंसू पोंछते हुए कहा, “बेटा, हमने उन्हें इतना पढ़ा दिया कि वे अब हर रिश्ते, हर भावना को नफे-नुकसान के तराजू पर तौलने लगे हैं। जब तक हम उनके काम आते रहे, बच्चों को संभालते रहे, तब तक हम अच्छे थे। लेकिन जैसे-जैसे हम बूढ़े हुए, बीमारियां बढ़ने लगीं, तो हम … Read more

रिश्तों का बाज़ार

आकाश और रिया के बीच दूरियां इतनी बढ़ गईं कि दोनों एक ही छत के नीचे अजनबियों की तरह रहने लगे। दोनों के बीच कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं था। एक दिन आकाश को रिया के फोन में उसके किसी पुराने दोस्त के साथ हुई कुछ ऐसी चैट्स मिल गईं जो उसे नागवार गुजरीं। उसने शराब … Read more

अहसास के धागे

मीनल यह सब देख और समझ रही थी। वह जानती थी कि एक नई लड़की को नए घर में ढलने में वक्त लगता है और कभी-कभी असुरक्षा की भावना हावी हो जाती है। घर की शांति भंग न हो और परिवार एक डोर में बँधा रहे, सिर्फ इसलिए मीनल चुपचाप काव्या की सारी गुस्ताखियों को … Read more

खामोश दर्द

कांता बुआ ने भी मुंह बनाते हुए जवाब दिया, “सही कह रही हो भाभी! आखिर बेटी तो बेटी ही होती है न। खून का रिश्ता है उसका। बहू तो पराये घर से आई है, उसे क्या दर्द होगा अपनी सास के मरने का। बस नाम का रोना-धोना भी नहीं कर रही।” पास ही बैठी एक … Read more

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