बुढ़ापे का अकेलापन – अमिता कुचया

आज जज साहब अनोखा केस पढ़कर अपने केबिन में बाप बेटे को बुलाते है…. गोपाल लाल जी और उनका बेटा सुरेश जज के पास दलील दे रहे थे। तभी वो दोनों से पूछते है आप लोग एकदूसरे को जानते है? तो हां… सुरेश बोलता है मेरे बाबू जी… और गोपाल लाल जी भी कहते ये … Read more

अपने और पराए, वक्त ने बतलाए। – परमा दत्त झा

मां के आपरेशन के लिए पैसे का इंतजाम हो गया है -रानी अपने पति राजेश को कह रही थी। कहां से ,किसने दिया इतने पैसे -राजेश अकचकाते हुए पूछा था। अरे मेरे हरि काका ने -रानी सिर झुकाए बोली। अभी मामले की नजाकत को देखते हुए दस लाख उस पेपर वाले हरि काका ने जमा … Read more

मकान बना घर – गीता वाधवानी

 मायरा ने खीर की कटोरी दादी के हाथ में देते हुए कहा “-यह लो दादी जल्दी से खा लो ज्यादा गम नहीं है और कटोरी वापस मुझे दे दो।”   दादी ने जल्दी से कटोरी मुंह से लगाकर खीर खाली और मायरा को आंसू भरी आंखों से आशीर्वाद देने लगी।   मायरा कटोरी ले जाकर रसोई में … Read more

होली क़ी यादें – एम. पी. सिंह

होली का त्योहार आते ही मेरे बचपन की यादें ताज़ा हों जाती है. ये बात है ज़ब में कॉलेज मे पढ़ता था. मेरा दोस्त राहुल अपने ही कॉलेज की एक लड़की सुनीता से दिल ही दिल प्यार करता था, पर इज़हार करने से डरता था. उसने होली पर सुनीता के साथ होली खेलने ओर प्यार … Read more

*कभी भी किसी पर आंख बंद करके भरोसा मत करना* – तोषिका

आप ही कहते थे ना *कभी भी किसी पर आंख बंद करके भरोसा मत करना* तो फिर आपने कैसे आंख बंद कर भरोसा कर लिया पापा एक लड़के की रोती हुई आवाज आई। एक दम से किशन अपनी नींद से जगा और देखा वो एक बुरा सपना था। किशन के बेटे राजीव को गुजरे हुए … Read more

भरोसा – खुशी

मेरी मां हमेशा कहती थी कि किसी पर भी आंख मूंद भरोसा मत करना और मै और पिताजी मजाक बनाते क्या मां? पिताजी कहते तुम्हारे साथ हुआ है इसलिए क्या सारे ही लोग गलत हो गए फिर शुरू हो गई तुम आज बेटे का खास दिन है और तुम आज भी शुरू हो गई।आइये पहले … Read more

सबसे बड़ा घाव तो अपने ही देते है – मंजू ओमर

आज उपासना और अखिलेश जी बेटे की शादी की बधाई देने प्रमोद जी के घर पर आए थे। क्योंकि उपासना और अखिलेश जी प्रमोद और आशा के बेटे की शादी में आ नही पाए थे। और आंटी अकंल कैसी रही रोहित की शादी बहुत मजा आया होगा। क्या बताऊ हम लोग आ नहीं पाए थे … Read more

बुढ़ापा तो सबको आता है!! – संजय सिंह

गोपाल और उमा अपने परिवार का पालन पोषण करते-करते कब अपनी जिंदगी के इस के इस मोड़ पर आ गए हैं कि उन्हें यह तक याद नहीं रहा कि उन्होंने अपना जीवन कभी खुशी से जिया या नहीं ।बस जो किया वह अपने बच्चों की खुशी और तरक्की के लिए ही किया। गोपाल और उमा … Read more

मायके की देहरी – विनीता सिंह

समीर ने अपना लैपटॉप बंद किया और लापरवाही से कंधे उचकाते हुए बोला, “अरे यार नव्या, तुम भी छोटी-छोटी बातों का बतंगड़ बनाती हो। माँ कह रही हैं तो चली जाओ। उनकी अपनी मान्यताएं हैं। वैसे भी मेरी इस महीने बहुत बिजी शेड्यूल है, तुम जाओगी तो मुझे भी थोड़ा काम पर फोकस करने का … Read more

ज़िंदगी की कड़वी चाय – प्रियंका नाथ

सुमित्रा जी से अपनी बेटी की यह हालत देखी नहीं जा रही थी। तभी घर की बड़ी बहू, काव्या, रसोई से बाहर आई। काव्या न सिर्फ इस घर की बहू थी, बल्कि श्रुति की एक बहुत अच्छी दोस्त भी थी। सुमित्रा जी ने काव्या का हाथ पकड़ा और रुंधे हुए गले से बोलीं, “बहू, तुम … Read more

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