बहू की विदाई – शुभ्रा बैनर्जी

बचपन से जानती थी सुषमा मधु को।मधु ,सुषमा की सहेली की इकलौती बेटी थी।सुषमा और सविता(मधु की मां)का मायका एक ही कस्बे में था।दोनों ने बारहवीं कक्षा तक साथ में ही पढ़ाई की थी।सुषमा का ब्याह कॉलेज पूरा होते ही शहर में रहने वाले सरकारी नौकरी में कार्यरत एक क्लर्क से हो गई।सविता ज्यादा पढ़ … Read more

घुटन भरे रिश्ते – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका’

नंदिनी को अब याद भी नहीं था कि वह आखिरी बार बिना किसी डर के कब जोर से हंसी थी। कभी उसकी हँसी पूरे घर में गूँजती थी। छोटी-सी बात पर खिलखिला उठना, बारिश की बूँदों को हथेली पर रोकना, माँ से घंटों बतियाना और अपनी पसंद के गीत गुनगुनाना—ये सब उसके जीवन का हिस्सा … Read more

घुटन भरे रिश्ते से आज़ादी – तन्वी

क्या कभी तुम्हें ऐसा लगा है कि तुम सांस ले रही हो पर जी नहीं रही हो? रिया के साथ हर दिन वही होता था। लोग कहते हैं लड़कियां पराया धन होती हैं पर रिया को लगता था कि वह धन नहीं, एक पिंजरा है जिसमें सिर्फ उसकी सांसें घुट रही थीं। रिया 20 साल … Read more

घुटन भरे रिश्ते से आजादी – डॉ आभा माहेश्वरी

शहर की भीड़ में रहने वाली मान्या बाहर से जितनी खुश दिखाई देती थी, भीतर से उतनी ही अकेली थी। उसका विवाह हुए आठ वर्ष हो चुके थे। घर सुंदर था, सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उस घर की दीवारों के भीतर उसका अपना कोई कोना नहीं था। उसकी हर पसंद पर सवाल … Read more

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