माटी का मोल
बाबूजी की डांट सुनकर शालिनी सहम गई और नजरें झुका लीं। लेकिन राघवेंद्र का मन अब शांत होने वाला नहीं था। उन्होंने बाबूजी की तरफ देखकर हाथ जोड़ लिए, “नहीं बाबूजी, अब मुझे मत रोकिए। मैंने अपनी पूरी जवानी सबको खुश रखने में और समझौते करने में निकाल दी। समर जब चाहता है, अपनी मर्जी … Read more