*वक्त की मार* – तोषिका

ऐसे ही चलता रहा ना तो इस *वक्त की मार* में पीछे रह जाओगे और सब तुम्हारे आगे निकल जाएंगे। बचपन से यही सुनता आ रहा हू, और मानता आ रहा हू पर इस भेड़ चाल के चलते मैने अपना सब कुछ पीछे छोड़ दिया, सही कहते है लोग कि वक्त किसी का अपना नहीं … Read more

कल क्या हो जाए किसको खबर।। – अंजना ठाकुर

निधि शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी की बेटी थी बचपन से ही हर मांग पूरी होने पर उसके मन में यही बस गया कि खुशी सिर्फ पैसों से मिलती है रिश्तों की कद्र करना सीखा नहीं और ना देखा क्योंकि पापा व्यवसाय बढ़ाने में लगे रहते और मां सामाजिक कार्य और पार्टी में अपना समय गुजारती … Read more

वक्त की मार – मधु वशिष्ठ

बहुत समय बाद भावना को एक सेमिनार के सिलसिले में दिल्ली आना पड़ा। पूरी रात मां के साथ पुरानी यादें ताजा करते रहे। क्योंकि सेमिनार पुराने घर के पास था, और भावना ने विचार बनाया था कि वह ताई जी ताऊ जी से मिलकर ही सेमिनार स्थल पर जाएगी।      रह रहकर बचपन का वह समय … Read more

“जब एक भूल ने छीन लिया मायके का आँगन” – वैशाली आडेसरा

सुबह की नीरव शांति में भी जैसे बिखरे शब्द निशा के कानों में गूंज रहे थे— “ससुराल चली गई हो, तो अब मायके की चिंता तुम्हें क्यों होगी? हमारा जो हो, सो हो… तुम्हें क्या?” निशा की बात, उसकी सफाई—कुछ भी सुना नहीं गया। एक झटके में जैसे उसका मायके का आँगन उससे छीन लिया … Read more

मेरे आसुंओं की कीमत तो चुकानी पड़ेगी – मंजू ओमर 

सामने गायत्री जी का पार्थिव शरीर पडा था और विमला फूटफूटकर रो रही थी। अंतिमयात्रा की तैयारियां चल रही थी। वही गायत्री देवी के पार्थिव शरीर से थोड़ी दूर पर गायत्री के दोनों बहू बेटे बैठे थे। बहुए नकली रोने का ढोंग कर रही थी और बड़े बहू और बेटे की आखों मे तो तनिक … Read more

वक्त की मार – करुणा मलिक

  पार्वती, बस कर, बाकी काम सवेरे खत्म कर लेंगे। घर पहुँचते-पहुँचते दिन ढल जाएगा।  हाँ जिज्जी, सोच तो मैं भी यही रही थी पर कहीं बूँद ना पड़ जाएँ रात में….. बड़ी मुश्किल से तो गेहूँ काटे है ं …  ना… आज रात बूँद ना पड़ेगी। और पड भी गई तो, कितने गेहूँ खड़े हैं … Read more

मेरे जैसे बदनसीब दुनिया में कोई नहीं – सीमा सिंघी 

नंदू के जाने के बाद गीता की जिंदगी बड़ी वीरान हो गई थी। उसने बड़ी भाग दौड़ कर अपने पति नंदू का इलाज कराया मगर अचानक ऐसी निगोड़ी बीमारी आ लगी । जो नंदू को ले जाकर ही शांत हुई। नंदू तन से गरीब था मगर मन से नहीं इसीलिए वो गीता और अपनी दस … Read more

बड़े भाई हो बाप मत बनो। – सीमा सिंघी

छोटे भाई राज के घर में घुसते ही ब्रजेश बोल उठा। छोटे लाइट का बिल कल याद कर के दे देना और हां कल दुकान पर भी तुम थोड़ी जल्दी चले जाना, कुछ ग्राहक आने वाले हैं। अभी आते वक्त तुम सब्जी लेकर घर आ सकते थे। खैर कोई बात नहीं, अब आ गए हो … Read more

घर के लक्ष्मी का सम्मान – डाॅ उर्मिला सिन्हा

   बड़ी सी हवेली कई-कई  हवादार कमरे सुसज्जित।  हवेली के पीछे बड़ा सा फलों का बाग साम tcने रंग-बिरंगे फूलों का बागीचा। चारदिवारी के भीतर ही स्वच्छ न निर्मल जल का पोखरा जिसमें तरह-तरह की मछलियां तैरती रहती। माली के साथ दो-चार सेवक बाहर-भीतर घर की साफ-सफाई देखभाल में लगे रहते।  सुख-समृद्धि,रिद्धि -सिद्धि का वास था … Read more

अजनबी सफ़र  : एक अनकहे रिश्ते की दास्तान – शशि चोपड़ा

 “मैं जानता हूँ कि तुम यहाँ अपने अतीत को समेटने आई हो,” माधव ने बहुत ही कोमल स्वर में कहा। “लेकिन जब तुम वापस दिल्ली लौटो, और अगर तुम्हें लगे कि उस बड़े शहर की भीड़ में तुम्हें एक ऐसे दोस्त की ज़रूरत है जो तुम्हारे साथ सिर्फ एक कप चाय पीकर तुम्हारी खामोशी को … Read more

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