माटी का मोल

बाबूजी की डांट सुनकर शालिनी सहम गई और नजरें झुका लीं। लेकिन राघवेंद्र का मन अब शांत होने वाला नहीं था। उन्होंने बाबूजी की तरफ देखकर हाथ जोड़ लिए, “नहीं बाबूजी, अब मुझे मत रोकिए। मैंने अपनी पूरी जवानी सबको खुश रखने में और समझौते करने में निकाल दी। समर जब चाहता है, अपनी मर्जी … Read more

पत्थर के शहर में एक टूटा आईना

दीनू ने अपने गमछे से आँखें पोंछते हुए बताया, “बिटिया, तारा हमेशा से ऐसी नहीं थी। गाँव में सबसे होनहार लड़की थी। माँ तो इसके पैदा होते ही गुजर गई थी, मैंने ही माँ और बाप दोनों बनकर इसे पाला था। बड़ी लाड़-प्यार से इसका ब्याह किया था। पर इसके ससुराल वालों ने दहेज के … Read more

अनकहे धागों की मिठास

 उधर स्वाति का मन ऐसा बुझ गया जैसे जलते हुए दीये पर किसी ने अचानक मूसलाधार बारिश कर दी हो। वह चुपचाप रसोई में लौट आई। उसकी आंखों के कोर भीगने लगे। जिस यात्रा के लिए उसने दिन-रात एक करके घर के काम निपटाए थे, जिस सुकून के लिए उसने पिछले एक साल से इंतज़ार … Read more

बिखरे धागे, सुलझी ज़िंदगी

 जानकी ने रोते हुए मंगत के दोनों हाथ अपने हाथों में ले लिए और बहुत धीमे स्वर में कहा, “मंगत, कल रात तूने जो किया, वह तू नहीं था, वह तेरी शराब थी। पर आज मैं तुझसे कुछ मांगने आई हूँ। जिस दिन माँ मरी थी, उसने तेरा हाथ मेरे हाथ में देकर कहा था … Read more

विरासत का ऋण और तराशा हुआ हीरा

दीनानाथ जी की आँखें एक बार फिर भर आईं, पर आज उन आंसुओं में बुढ़ापे की बेबसी या लाचारी नहीं थी, बल्कि एक पिता का गर्व और एक गुरु की सार्थकता छलक रही थी। उन्होंने कांपते हाथों से राघव का सिर उठाया और उसे अपने सीने से लगा लिया। पूरे सभागार में उपस्थित लोग खड़े … Read more

विरासत की स्याही: एक अनोखा बंटवारा

पिता का यह अद्भुत और न्यायपूर्ण फैसला सुनकर दोनों भाइयों की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्हें अपनी नासमझी का अहसास हुआ। दोनों ने एक साथ आगे बढ़कर पिता के चरण स्पर्श किए। सूर्यकांत ने चंद्रकांत को गले से लगा लिया और बोला, “पिताजी ने आज हमें असली विरासत का मतलब समझा दिया है। हम … Read more

आँगन की गूंज: एक अनमोल वसीयत

 देवकी जी के झुर्रीदार गालों पर आँसुओं की धारा बह निकली। रुंधे हुए गले से उन्होंने बताया कि आकाश दुबई में एक नई बहुराष्ट्रीय कंपनी शुरू करना चाहता है और इसके लिए उसे करोड़ों रुपयों की सख्त जरूरत है। आकाश ने उन्हें फोन करके एक तरह का अल्टीमेटम दे दिया था कि ‘आनंदमयी’ जैसे बड़े … Read more

मौन का प्रहार

मालती देवी पिछले कई दिनों से घर के बदलते हुए माहौल को बहुत गहराई से महसूस कर रही थीं। उनका बेटा अनिरुद्ध पेशे से एक सरकारी शिक्षक था—बेहद शांत, सुलझा हुआ और अपनी दुनिया में मगन रहने वाला इंसान। लेकिन उसकी यही खामोशी उसकी पत्नी कविता को हमेशा अखरती थी। कविता एक चुलबुली और महत्वाकांक्षी … Read more

प्रतीक्षा के उस पार: एक अनकही दास्तां

 उस दिन उन दोनों के बीच जो बातें शुरू हुईं, वो सिर्फ एक परिचय नहीं, बल्कि दो ऐसी आत्माओं का मिलन था जो बिना बोले भी एक-दूसरे के बहुत करीब थीं। काव्या ने वेदांत के विचारों, उसकी सादगी और समाज के प्रति उसके समर्पण को जाना, तो उसके प्रति उसका सम्मान और भी बढ़ गया। … Read more

राख से उपजा पारिजात

 अवनि ने समर का हाथ एक झटके से पीछे धकेल दिया और अपनी आवाज़ को बेहद संयत रखते हुए कहा, “बस समर, बहुत हो चुका। आज तक तुमने मेरे शरीर पर अधिकार जमाया, मेरे मन को रौंदा, लेकिन मेरी आत्मा अब भी आज़ाद है। आज इस घर की दहलीज के साथ मैं तुम्हारे इस सड़े … Read more

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