ममता की छांव

“इतना बड़ा पाखंडी? इतना घिनौना झूठ? मां को सड़क पर बेसहारा छोड़ दिया और यहां आकर लाखों के टूर की झूठी कहानियां सुना रहा है!” चारों तरफ से लानतों और तानों की बौछार होने लगी। विकास का सिर शर्म से झुककर सीने से लग गया था। वह अपनी जगह पर पत्थर की तरह गड़ा हुआ … Read more

पिता की अनमोल कमाई

 “बेटा, तेरे बाप ने हमें बीस साल रोटी दी। बीस साल, एक दिन भी नागा नहीं किया। जिस दिन मेरी घरवाली गुज़री, उस दिन भी वे ख़ुद मेरे घर खाना लेकर आए थे। आज उनके जाने की ख़बर सुनी तो लगा जैसे मेरा बाप चला गया।” उसकी आवाज़ रुँधी हुई थी। बच्चे वाली औरत भी … Read more

सांवली बहू

नंदिनी रसोई की खिड़की के पास बैठी विज्ञान की कॉपियाँ जाँच रही थी, तभी माँ गीता देवी हाथ में एक छोटा-सा थैला लिए कमरे में आईं। थैले से किसी क्रीम की तेज़ खुशबू आ रही थी। “नंदू, ये देख, पड़ोस वाली शर्मा आंटी ने बताया है। इसे रोज़ रात को लगाना है, पंद्रह दिन में … Read more

रिश्तों की कसौटी

 “बड़ा वह होता है जो बड़प्पन दिखाए, जो ज़िम्मेदारी उठाए,” निर्मला जी ने उनकी बात काटते हुए कहा। “सुमित ने अपनी जवानी, अपने सपने सब कुछ इस घर के लिए कुर्बान कर दिए। अंजलि ने इस घर को अपना माना और राधिका को अपनी बेटी की तरह पाला। कन्यादान कोई महज़ रस्म या दिखावा नहीं … Read more

उजड़े गुलशन की नई बहार

“ओंकार जी, ऐसे कब तक चलेगा? प्रणय की उम्र ही क्या है अभी, बत्तीस साल! कब तक इस वीरान घर में अकेले दिन काटेगा? और फिर हमारे छह साल के नन्हे कबीर का क्या? जब वह स्कूल से आकर पूछता है कि सबकी माँ आती हैं, मेरी माँ कब आएगी, तो मेरा कलेजा मुँह को … Read more

ममता का मोल

 “और उस मां का क्या, जिसका दिल तुमने पिछले दस सालों से हर रोज छलनी किया है?” प्रणव ने गरजते हुए कहा। “तुम्हें शर्म नहीं आती अपनी उस मां को लापरवाह कहते हुए, जो अपने टूटे हुए घुटनों के बावजूद तुम्हारे बच्चे के लिए फर्श पर घिसटती हुई आई? जरा देखो उनके पैरों की तरफ! … Read more

समंदर से पहली मुलाक़ात – मुकेश पटेल

शाम के सात बज रहे थे। प्रभा रसोई में रोटियाँ सेंक रही थी और बगल में रखा उसका पुराना फ़ोन बार-बार घनघना रहा था। स्कूल की सहेलियों के व्हाट्सऐप ग्रुप “सखियाँ बैच 1987” में आज सुबह से ही संदेशों की झड़ी लगी थी। मालती ने लिखा था, “इस बार नवंबर में हम सब पुरी चल … Read more

फर्ज की छांव

 अनुराग अवाक रह गया। उसकी आंखों से खुशी और कृतज्ञता के आंसू बह निकले। उसने गरिमा के माथे को चूम लिया और बोला, “गरिमा, तुमने आज मुझे दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान बना दिया। हम कल ही गांव चलेंगे। भाभी मां के आशीर्वाद के बिना यह शादी का मंडप अधूरा रहेगा। उनके चरणों की धूल … Read more

पश्चाताप – सुनीता माथुर

आज निवेदिता अकेले कमरे में बैठी हुई सोच रही थी कि मेरे 10 साल यूं ही बर्बाद हो गए हैं शादी इतने अच्छे सम्भ्रान्त परिवार में हुई थी ससुर अनुराग रिटायर्ड गवर्नमेंट ऑफिसर थे सास स्मिता हाउसवाइफ थीं और पति ऋषि इंजीनियर था निवेदिता भी एक कंपनी में मैनेजर थी लेकिन देखते ही देखते कंपनी … Read more

संस्कार की थाली

मयंक ने अपनी पत्नी के इस बदले हुए रूप, चेहरे की सौम्यता और घर में लौटी शांति को देखकर मुस्कुराते हुए चुटकी ली, “अरे वाह शालिनी! आज तो घर सचमुच घर लग रहा है। अगर अल्पना भाभी के घर जाकर ऐसा चमत्कार होता है, तो मेरा सुझाव है कि तुम महीने में दो-चार बार उनके … Read more

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