खालीपन – करुणा मलिक 

निधि! सचमुच तुम बडे़ दिल वाली हो। मुझे तो तुम्हारे आने के बाद पता चला कि भाभी का सुख क्या होता है… बड़ी भाभी को तो कुछ नहीं पता कि ननदों का लेन- देन क्या होता है…  पर दीदी…. ऐसा कैसे हो सकता है कि  अमृता भाभी की मम्मी ने उन्हें कुछ भी नहीं सिखाया? … Read more

*जब एक भूल ने छीन लिया मायके का आंगन* – तोषिका

कई बार एक छोटी सी भूल भी, जन्मों के ज़ख्म दे जाती है, इसीलिए अपने और पराए में फर्क को परखना आना चाहिए। निडर आवाज में कामिनी अपनी बहु शिल्पी से बोली। जी मां बोल कर वह अपने कमरे में चली गई। शिल्पी अभी नई नई चोपड़ा खानदान की बहु बनी थी। चोपड़ा खानदान का … Read more

“जब एक भूल ने छीन लिया मायके का आँगन” – वैशाली आडेसरा

सुबह की नीरव शांति में भी जैसे बिखरे शब्द निशा के कानों में गूंज रहे थे— “ससुराल चली गई हो, तो अब मायके की चिंता तुम्हें क्यों होगी? हमारा जो हो, सो हो… तुम्हें क्या?” निशा की बात, उसकी सफाई—कुछ भी सुना नहीं गया। एक झटके में जैसे उसका मायके का आँगन उससे छीन लिया … Read more

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