महलों की छाँव और मिट्टी की धूप
गंगा की तराई वाले एक छोटे से कस्बे में सुबह की पहली किरण जब कच्ची दीवारों पर पड़ती, तो कंचन के घर की रसोई से छन-छनकर इलायची और ताज़ी चाय की महक गली तक फैल जाती थी। कंचन का संसार सीमित था, पर उसकी सीमाएँ कभी किसी तंगी की वजह से संकरी नहीं हुईं। उसके … Read more