दौलत का भ्रम

दीपावली का समय था और पूरे घर में रौनक छाई हुई थी। घर की बड़ी बहू निर्मला हमेशा की तरह रसोई से लेकर मेहमानों के स्वागत तक की सारी जिम्मेदारियां चुपचाप निभा रही थी। वहीं छोटी बहू, राखी, अपने महंगे रेशमी कपड़ों और भारी गहनों से लदी, बस सोफे पर बैठकर अपनी बेटी तान्या के … Read more

जिंदगी की धूप और छाँव

 रेस्टोरेंट के एक कोने वाली टेबल पर दो लोग आमने-सामने बैठे थे। मेज पर रखी चाय से उठती भाप उन दोनों के बीच पसरी खामोशी को और भी गहरा कर रही थी। माधव, जिसकी उम्र पैंतीस के पार हो चुकी थी, अपनी चाय के कप को दोनों हाथों से पकड़े हुए कुछ सोच रहा था। … Read more

घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है – शशि नरूला

एक गाँव में नीलम नाम की एक लड़की रहती थी। उसके पिता बढ़ई थे और माँ सिलाई का काम करती थीं। उनका घर बहुत छोटा था। घर में केवल दो कमरे थे और सुविधाएँ भी बहुत कम थीं। लेकिन उस घर में प्रेम, सम्मान और अपनापन इतना था कि वहाँ आने वाला हर व्यक्ति खुश … Read more

रिश्तो की कीमत – एम पी सिंह ‘मोहि”

नीलम शादी करके ससुराल पहुची, वो बहुत खुश थी। परिवार में पति और ससुर के अलावा कोई नहीं था। पति आनंद की अच्छा पड़ा लिखा, सरकारी नौकरी मैं था. सब ठीक चल रहा था, ओर जल्दी ही वो पति औऱ ससुर की चहेती बन गई। नीलम से ससुर एक सेवानिवृत सरकारी अधिकारी थे. अच्छी सोसाइटी … Read more

रिश्तों की कीमत – करुणा मलिक

प्रकाश के पापा, मुझे लगता है कि वसीयत लिखकर वकील के पास रखने में ही ठीक रहेगा वरना प्रभात की बहू हमारे मरते ही तुरंत घर- जमीन के दो टुकड़े करवा देगी और औने-पौने दाम में बिकवा कर चलती बनेगी।  हाँ, कह तो तुम ठीक रही हो पर क्या दोनों बेटियाँ अपना हिस्सा लेंगी? वे  … Read more

रिश्तों की कीमत – डाॅ संजु झा

रिश्तों की कीमत व्यक्ति को कब,किस रूप में चुकानी पड़ जाऍं, कोई नहीं बता सकता है? मैं सीमा अपने व्यस्त जीवन में  उलझी हुई आज फिर  काॅलेज के लिए लेट हो गई।काॅलेज में गाड़ी से उतरते हुए मैं जल्दी -जल्दी अपने क्लास रूम की ओर बढ़ रही थी,तभी मेरी नजर अचानक से एक लड़की पर … Read more

रिश्तों की अहमियत – मंजू ओमर 

बहु यह तूने कैसी चाय बनाई है ना मीठी है ना कोई स्वाद है।  फीकी फीकी अदरक भी नहीं डालती । कल्याणी जी ने बहु रजनी को टोका ,क्या हुआ मां जी ठीक तो बनी है चाय डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए बेटा सुरेंद्र बोला। हां तू तो बीवी का ही पक्ष लेगा । नहीं … Read more

*बेटी ये तुम्हारे संस्कारों की परीक्षा है* – तोषिका

आज से मेरा एक नया सफ़र शुरू होगा मां, मैं बहुत खुश हू। मुस्कुराते हुए खुशी बोली तभी उसकी मां उसके पास आई और उसको गले लगाकर बोली “अपना ध्यान रखना, तू पहली बार मेरे से इतनी दूर जा रही है तो थोड़ी बेचैनी सी हो रही है।” ओफ्फो मा इतनी टेंशन मत लिया करो, … Read more

धरोहर – शुभ्रा बैनर्जी

“मां,मैं कल आ रही हूं।रात ग्यारह बजे तक पहुंच जाऊंगी।तुम जगी मत रहना।आज शाम की ट्रेन है।”  निधि का फोन आते ही सुधा चहक कर बातें करने को व्याकुल हो उठी।निधि ने तीन वाक्य में ही बातें खत्म करते हुए बाय कर दिया तो,सुधा ने टोका”अरे,रुक तो जरा।फ्लाइट में आने वाली थी ना?फिर ट्रेन से … Read more

समर्पण – मीनाक्षी गुप्ता

“बरसात की हल्की फुहारें पड़ रही थीं। गाँव की मिट्टी से उठती सोंधी खुशबू वातावरण में घुल गई थी। दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली गौरी अपने घर के आँगन में बैठी किताबों के पन्ने पलट रही थी। उसकी आँखों में बड़े सपने थे, लेकिन उन सपनों तक पहुँचने का रास्ता आसान नहीं था।” गौरी के … Read more

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