*जब एक भूल ने छीन लिया मायके का आंगन* – तोषिका
कई बार एक छोटी सी भूल भी, जन्मों के ज़ख्म दे जाती है, इसीलिए अपने और पराए में फर्क को परखना आना चाहिए। निडर आवाज में कामिनी अपनी बहु शिल्पी से बोली। जी मां बोल कर वह अपने कमरे में चली गई। शिल्पी अभी नई नई चोपड़ा खानदान की बहु बनी थी। चोपड़ा खानदान का … Read more