खामोश प्रीत का मुखर उपहार
आज वह स्मृति रघुनाथ जी के सीने में किसी खंजर की तरह चुभ रही थी। “इस उम्र में क्या ज़रूरत है?” क्या प्यार और उपहार की कोई उम्र होती है? क्या सुमित्रा का मन नहीं करता होगा कि उसका पति भी उसे खास महसूस कराए? रघुनाथ जी की आँखों से पहली बार आँसू छलक पड़े। … Read more