खामोश प्रीत का मुखर उपहार

 आज वह स्मृति रघुनाथ जी के सीने में किसी खंजर की तरह चुभ रही थी। “इस उम्र में क्या ज़रूरत है?” क्या प्यार और उपहार की कोई उम्र होती है? क्या सुमित्रा का मन नहीं करता होगा कि उसका पति भी उसे खास महसूस कराए? रघुनाथ जी की आँखों से पहली बार आँसू छलक पड़े। … Read more

रिश्तों का आइना

अंजलि की आंखों से अब आंसुओं की धार बह निकली। ये आंसू दर्द के नहीं, बल्कि पछतावे के थे। उसे अपनी सोच पर, अपने उस शक पर घिन आने लगी जो उसने आभासी दुनिया के उस कचरे को देखकर अपने मन में पाला था। जो परिवार उसके लिए अपनी जान छिड़कता है, जो सासू मां … Read more

अदृश्य डोर: ममता का संदूक

नीलिमा  अब अपने आँसू नहीं रोक पाई। उसने रोते हुए ससुर जी के अस्पताल जाने वाली बात बताई और फिर फफकते हुए बोली, “दीदी, मुझे बहुत ज़ोर से भूख लगी है। पिछले तीन दिन से मैंने पेट भर के कुछ नहीं खाया है। यहाँ सब इतने परेशान हैं कि मैं किसी से कुछ कह भी … Read more

धूप के बाद की छाँव

अस्पताल के उस सफेद, नीरस कमरे में लेटे हुए देवनाथ अक्सर खिड़की के बाहर खाली आसमान को घूरते रहते थे। लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी ने शरीर को इस कदर खोखला कर दिया था कि करवट लेना भी एक जंग जीतने जैसा लगता था। जब इंसान के पास भविष्य के लिए कुछ खास नहीं बचता, … Read more

अनकहे अल्फ़ाज़: एक नई सुबह की तलाश

इतना सुनते ही इशिता  की आँखों से आंसुओं का बांध टूट पड़ा। वह फूट-फूट कर रोने लगी। कबीर ने उसे चुप नहीं कराया। उसने इशिता  को रोने दिया, उसके मन के सारे गुबार को आंसुओं के रास्ते बाहर निकलने दिया। जब इशिता  थोड़ी शांत हुई, तो उसने अपने दिल का एक-एक पन्ना कबीर के सामने … Read more

अनुपस्थित

आज एक हफ्ते से ज्यादा हो गया, जगदीश बाबू सुबह की सैर पर नहीं आ रहे हैं. शायद बीमार हो गये हों. अब बुढापे में बीमार होना कौन बडी बात है. सर्दी के प्रकोप को इस उमर में झेलना आसान भी नहीं है. इस साल लगता है सर्दी सारे रिकार्ड तोड कर रहेगी.आठ बजे के … Read more

“भरोसे की कीमत ” – कमलेश आहूजा

सरोज के घर में सुनीता कई वर्षों से काम करती थी।वह ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थी, लेकिन मेहनती और ईमानदार थी।अपनी छोटी-सी दुनिया में वह परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करती थी। उसकी बेटी पूजा ने भी अब एक पैकेजिंग कंपनी में काम करना शुरू कर दिया था।पढ़ाई अधिक नहीं कर … Read more

सच्ची आस्था का मार्ग

रमाकांत ने एक सरसरी निगाह उस वृद्धा पर डाली और फिर झुंझलाते हुए बोले, “अरे देवकी, तुम भी कहाँ इन सब के चक्कर में पड़ रही हो। ये तीर्थ स्थान है, यहाँ ऐसे हज़ारों लोग रोज़ आते हैं। हमारा संकल्प टूट जाएगा। चलो जल्दी, हमें बहुत देर हो रही है।” रमाकांत ने देवकी को फिर … Read more

विश्वासघाती – बालेश्वर गुप्ता

चले गये ना,कहते थे जीवन भर साथ निभाऊंगा। तुम्हारे इतने भर कहने मात्र से सब घरबार,सब रिश्ते नाते छोड़ तुम्हारे साथ चली आई थी।बताओ,अब किसके सहारे और किसके लिए जिऊं? विलाप करती करती सरोज बेहोश हो गयी।        तीस वर्ष पूर्व एक छोटे से कस्बे में एक प्रेम पुष्प विकसित हुआ था।तीस वर्ष  पहले,तब प्रेम होना … Read more

शिकायत नहीं समझौता – मधु वशिष्ठ

पापा वाली गाड़ी में पेट्रोल कैसे खत्म हो सकता है, गाड़ी तो चली ही नहीं। पवन और अमित के हॉस्टल जाने के बाद मैंने खुद गाड़ी की टंकी फुल करवाई थी। नीचे ही तो खड़ी हुई थी चलो मम्मी से पूछते हैं। रहने दो, हो सकता है अब तक सो गई होंगी वैसे तुमने नोटिस … Read more

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