ढीठ – संध्या त्रिपाठी 

बड़ी ढीठ हो यार तुम… एक बार मना कर दिया फिर भी मानती नहीं हो…जिद पकड़ कर बैठी हो …आखिर चाहती क्या हो तुम…?  तुम्हारे अंदर थोड़ा भी आत्मसम्मान है या नहीं ….बिल्कुल चिल्लाने वाले अंदाज में प्रत्यूष ने कहा… आपने मेरी ढिठाई अभी देखी कहां है प्रत्युष…?  बचपन से ये ढीठ शब्द सुनते आई … Read more

जब घर की धड़कन रूठ गई

 “भैया, मुझसे अब नहीं सहा जाता। मुझे बहुत तेज भूख लगी है और मेरा पूरा शरीर दुख रहा है। मां कैसे करती हैं यह सब? सुबह पांच बजे उठने से लेकर रात के ग्यारह बजे तक वह बिना रुके चलती रहती हैं। कभी हमारे लिए नाश्ता, कभी पापा का टिफिन, कभी कपड़े धोना, कभी झाड़ू-पोंछा… … Read more

पहली बारिश और वो अजनबी सा अपनापन

  कमरे के अंदर बैठी स्नेहा अपने कपड़ों को सूटकेस में सहेज रही थी, लेकिन उसकी नज़रें बार-बार खिड़की के बाहर गिरती बारिश की बूंदों पर जा टिकती थीं। उसकी शादी को अभी महज़ चार महीने ही हुए थे। शादी के बाद यह उसका पहला सावन था और मायके जाने की खुशी उसके चेहरे पर साफ … Read more

 दिल का दर्द

“अबे ओए किताबी कीड़े! तुझे क्या लगा, तू आवाज़ बदलेगा और मूंछें बढ़ा लेगा तो हम तुझे पहचान नहीं पाएंगे? साले, पच्चीस साल तो क्या, अगर पच्चीस जनम भी बीत जाते, तो भी तेरी ये झुकी हुई शक्ल और सहमी हुई आँखें हम दूर से पहचान लेते। तू हमें खाना परोस रहा था, ये देखकर … Read more

सच्चा दांपत्य जीवन

शाम के करीब चार बज रहे थे। गुलमोहर एन्क्लेव के सेंट्रल पार्क में सुहागिन महिलाओं की चहल-पहल शुरू हो चुकी थी। लाल और गुलाबी जोड़ों में सजी धजी महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनने के लिए इकट्ठा हो रही थीं। इसी सोसाइटी में पिछले महीने ही शिफ्ट हुई राधिका भी अपनी पूजा की थाली लिए … Read more

विश्वासघात

“यह… यह क्या बकवास है!” विकास अपनी जगह से उछल पड़ा। “आप ऐसा नहीं कर सकते पिताजी! यह हमारा हक है! हम आपके खून हैं!” शिखा भी चीखने लगी, “जरूर इस रमेश मुनीम ने या किसी और ने आपके कान भरे हैं पिताजी! आप बुढ़ापे में अपना दिमागी संतुलन खो बैठे हैं। हम इसे कोर्ट … Read more

सैंडविच जनरेशन’

सुधा जी ने अपनी साड़ी के पल्लू से आँखें पोंछते हुए कहा। “याद है आपको जब मेरी शादी होकर बनारस आई थी? अम्मा जी (रामनाथ जी की माँ) का कितना कड़ा अनुशासन था। सुबह चार बजे उठकर पूरे घर का आंगन लीपना, चूल्हे पर सबके लिए रोटियां सेंकना। मजाल है जो कभी अपनी मर्जी से … Read more

इंसानियत का असली पैमाना

“मम्मा, वो पुराने जूते तो घर की अलमारी में सुरक्षित रखे हैं ना? लेकिन उस दादी के पैर तो अभी जल रहे थे। क्या वो तपती हुई सड़क मेरे पुराने जूतों के आने का इंतज़ार करती? और मम्मा, आप ही तो कहती हो कि भगवान को हमेशा ताजे फूल और सबसे अच्छी चीज़ चढ़ानी चाहिए। … Read more

अधिकार

विवान ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “हां, मैं मान गया कि हक मांगना कोई गलत बात नहीं है। आखिर कानून भी कहता है कि संपत्ति में बराबरी का अधिकार होना चाहिए। लेकिन सौम्या, एक बात बताओ, यह बराबरी का अधिकार सिर्फ बेटों तक ही सीमित क्यों रहे?” सौम्या की मुस्कान थोड़ी फीकी पड़ी। … Read more

करवाचौथ

सुबह की पहली किरण अभी ठीक से फूटी भी नहीं थी कि घर में बर्तनों की हल्की सी खनक और सुमित्रा जी की आवाज़ गूंजने लगी थी। श्रुति के लिए आज का दिन बेहद खास था। शादी के बाद यह उसका पहला करवाचौथ था। वैसे तो उसने अपनी माँ को हमेशा पूरे विधि-विधान से यह … Read more

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