दिल का दर्द
“अबे ओए किताबी कीड़े! तुझे क्या लगा, तू आवाज़ बदलेगा और मूंछें बढ़ा लेगा तो हम तुझे पहचान नहीं पाएंगे? साले, पच्चीस साल तो क्या, अगर पच्चीस जनम भी बीत जाते, तो भी तेरी ये झुकी हुई शक्ल और सहमी हुई आँखें हम दूर से पहचान लेते। तू हमें खाना परोस रहा था, ये देखकर … Read more