गुमनाम दहलीज़ का स्वाभिमान
शारदा जी की आँखों में नमी तैर गई। उन्होंने नव्या के हाथों को थामकर कहा, “बेटा, बाहर मेरी छोटी बहन विमला और मेरे मायके की भाभी बैठी हैं। शाम की गाड़ी से वे वापस अपने घर चली जाएँगी। तेरे ससुर जी ने सभी रिश्तेदारों की विदाई के लिफाफे बनाए हैं, पर मेरे मायके वालों के … Read more