कई बार एक छोटी सी भूल भी, जन्मों के ज़ख्म दे जाती है, इसीलिए अपने और पराए में फर्क को परखना आना चाहिए। निडर आवाज में कामिनी अपनी बहु शिल्पी से बोली।
जी मां बोल कर वह अपने कमरे में चली गई।
शिल्पी अभी नई नई चोपड़ा खानदान की बहु बनी थी। चोपड़ा खानदान का बहुत नाम था पर जिस दिन शिल्पी घर में पहला कदम रखा था, उसी ही दिन आस पास के पड़ोसियों ने उसे कुछ सलाह के तौर पर और कुछ ताने मारते हुए बोले कि “अब तुम इस घर की बहु बन गई हो तो आप तो तुम्हारे भी पर निकल ही आएंगे।” उस समय शिल्पी थकी हुई भी थी और नींद में थी, तो उसने बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
उसके अगले ही दिन से वो देख रही थी कि उसकी सास कामिनी उसको जितना टोकती है, उतना घर में किसी और को नहीं टोकती, शुरू शुरू में उसने बात को जाने दिया पर कुछ समय बाद उसको घुटन होने लग गई थी।
तो जब वह कमरे में गई, उसने देखा कि उसका पति निवेश दफ्तर जाने की तैयारी कर रहा है, और अभी घर से निकलने में समय था तो उसने निवेश से पूछा “सुनो जी, आपसे बात करनी है, आप अभी फ्री है तो कर लू?” निवेश ने थोड़ी देर सोचा फिर कहा कि मैं शाम में वापिस आकर तुमसे बात करता हू क्योंकि कही न कही उसको अपनी पत्नी का चिंतित चेहरा दिख रहा था तो उसने सोचा बाद में आराम से वार्तालाप करना बेहतर है।
शिल्पी ने कहा “ठीक है”। इतना बोलते ही उसके पास उसकी बचपन की सहेली का कॉल आया और उसको मिलने के लिए बुला रही थी, तो उसने निवेश से पूछा तो निवेश कहता है “मां से पूछ लो, अगर उनको कोई ऐतराज नहीं है, तो मुझे भी कोई नहीं है”। इसके जवाब में शिल्पी कुछ बोले उतनी देर में निवेश वहां से चला गया।
शिल्पी हिम्मत करती हुई अपनी सास के पास गई और उनसे बाहर जाने का पूछा, तो उन्होंने उसको कठोर आवाज में बोला “तुम अकेले कही नहीं जाओगी, जहां भी जाना हो, निवेश के साथ जाना।” ये सुनते ही शिल्पी को गुस्सा आया पर वो कुछ कह ना सकी और उसका गुस्सा होना भी बनता था क्योंकि वो एक इंडिपेंडेंट लड़की थी और उस पर उसके मायके में आज तक इतनी रोक टोक नहीं थी जितनी उसके ससुराल में हो रही है। तभी वो ये सब सोच विचार कर रही थी कि उसको गली के औरतों की बात ध्यान आई तो उसने किसी बहाने से उनके घर जाने का फैसला किया।
पड़ोसी के घर पहुंच ने पर ऐसे ही बात चीत की और फिर घुमा फिर कर वो उस बात पर आई जो उन्होंने उसको उस रात बोली थी।
पहले शिल्पी की पड़ोसी थोड़ा हिचकिचाई फिर बोली “बेटा सख्ती तो होगी ही, तुम्हारी सास की बेटी और तुम्हारी ननद की एक छोटी सी भूल की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी और *जब उससे एक भूल ने छीन लिया मायके का आंगन* तो सदमा तो लगता है।
शिल्पी ये सब सुन कर चौंकी फिर थोड़ा होश में आकर बोली “ऐसा क्या हुआ था और घर में तो उनके बारे में कोई बात भी नहीं करता।”
उसकी पड़ोसी बोली “बेटा यह कुछ साल पहले की बात है, तुम्हारी ननद बहुत खुश मिजाज़ लड़की थी बस उसकी एक भूल हुई और वो थी किसी ऐसे इंसान से प्यार करने की जिसने कभी उसकी कदर नहीं करी। बेटी के ज़िद के आगे तुम्हारे सास ससुर भी झुक गए और शादी के बाद दहेज के चक्कर में उनकी बेटी को नहीं छोड़ा। खैर उसके ससुराल वालों को सजा तो मिली पर उनके दिल में अपनी बेटी को खोने का ज़ख्म दफ्न हो गया। साल बीत ते गए और सब की यादों से वो मिट ती चली गई। मेरे हिसाब से तो वो तुम्हे अपनी बेटी ही मानती है इसीलिए वो थोड़ा डरती हैं दुबारा किसी और को खोने से।”
ये सब सुन कर शिल्पी की आँखें भर आई और कुछ देर बाद वो घर आ गई। सारा दिन वो सोच विचार करती रही फिर रात को जब निवेश आया और आराम से बैठने के बाद उसने शिल्पी से पूछा “सुबह तुम्हे क्या बात करनी थी मेरे से?”
शिल्पी बोली “कुछ नहीं, कुछ सवाल थे अब मुझे उनके जवाब मिल गए है।”
धीरे धीरे फिर उसने अपनी सास कामिनी को समझा और अब उसको उनकी आंखों में प्यार छुपा दिख रहा था और उसने धीरे धीरे अपनी जगह कामिनी के सास में बनाई।
लेखिका
तोषिका