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ममता के नियम
अंजलि के जाते ही कमरे में ऐसा सन्नाटा छा गया मानो किसी ने वक्त को वहीं थाम दिया हो। अंजलि के उन चंद शब्दों ने सुमित्रा देवी के अंतर्मन पर किसी हथौड़े की तरह वार किया था। उनके पास अंजलि की बात का कोई जवाब नहीं था। जो नसीहतें वे अपनी बेटी को उसके ससुराल … Read more
उम्र के साथ इंसानी रिश्ते अपनी अहमियत खो देते हैं?
उस दिन सुधा की आँखों में आँसू आ गए थे। उसने आयुष को सीने से लगाते हुए कहा था, “पागल बच्चे, मेरी तो जान तुझमें बसती है। मैं तुझे छोड़कर भला कहाँ जा सकती हूँ?” माधवी और आस-पड़ोस की औरतों ने तब मुस्कुराते हुए कहा था कि सुधा सचमुच बहुत भाग्यशाली है जिसे इतना प्रेम … Read more
बदलाव की शुरुआत
शाम का समय था। सुमित्रा जी रसोई में खड़ी अपने और अपने पति के लिए चाय छान रही थीं। घर में एक अजीब सी शांति थी, लेकिन यह शांति अचानक एक तेज़ और कर्कश आवाज़ से टूट गई। आवाज़ उनके बेटे विकास के कमरे से आ रही थी। “मैंने तुम्हें तीन बार कॉल किया! तुम्हारी … Read more
कड़वी सच्चाई
अलमारी से कपड़े निकालकर तेज़ी से सूटकेस में ठूंसती हुई नीता के हाथ कांप रहे थे। उसकी आँखों से लगातार बहते गर्म आंसू उसके गालों को भिगो रहे थे, लेकिन इस वक्त उसे अपने आंसू पोंछने की भी फुर्सत नहीं थी। कुछ ही मिनटों पहले उसे अपनी माँ का फोन आया था कि उसके पिता, … Read more
खुशी के आँसू
रिश्तेदारों ने खूब ताने दिए कि “दीनानाथ ने अपनी बेटियों को सिर पर चढ़ा रखा है।” लेकिन बापू टस से मस नहीं हुए। समय का पहिया घूमता रहा। दीदी ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली और सिविल सर्विसेज़ की तैयारी शुरू कर दी। मैं भी कॉलेज पहुँच चुकी थी। लेकिन ज़िंदगी कभी भी एक सी … Read more
निस्वार्थ प्रेम
शहर के एक पुराने और शांत मोहल्ले में मास्टर शिवनारायण जी का मकान किसी समय अपनी रौनक के लिए जाना जाता था। मास्टर जी इलाके के सबसे सख्त और उसूलों वाले व्यक्ति माने जाते थे। उनका एक ही नियम था—जो उन्होंने कह दिया, वही पत्थर की लकीर है। इसी झूठे गुरूर के चलते आज से … Read more
अनमोल खज़ाना
“राघव, पिछले कुछ दिनों से मेरी कमर और पैरों में बहुत तेज़ दर्द रहता है। सुबह उठते ही चक्कर भी आते हैं,” नीता ने आटा गूंथते हुए बहुत ही धीमी और थकी हुई आवाज़ में अपने पति से कहा। राघव, जो आईने के सामने खड़े होकर अपनी टाई की गांठ ठीक कर रहा था, बिना … Read more
एक नया सवेरा
“मां जी, मेरी अपने घर पर तफ्सील से बात हो गई है। मेरे बाबूजी और परिवार वाले इस रिश्ते के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्हें कोई भी आपत्ति नहीं है। बस अब आप किसी तरह काव्या को समझा लीजिए…” अभिनव ने बहुत ही संकोच लेकिन एक गहरे विश्वास के साथ सुभद्रा जी से … Read more