अनुपमा का आत्मसम्मान

मेघा ने व्यंग्यात्मक हंसी हंसते हुए कहा, “ओहो! कितनी भोली बन रही है। जैसे मुझे कुछ पता ही नहीं। अरे, नौकरानी तो बाहर आंगन में थी। माँ पूजा घर में थीं और मैं सो रही थी। तो फिर गहने किसने उड़ाए? तू ही तो पूरे घर में नागिन की तरह घूम रही थी।” दीवाली का … Read more

गहरे घाव

निशा जब भी आईने के सामने खड़ी होती थी, तो उसे अपनी आँखों की गहराई में एक अजीब सी खामोशी नज़र आती थी। लाल रंग की खूबसूरत बनारसी साड़ी, माथे पर सजी चमकती बिंदी और कलाइयों में खनकती चूड़ियाँ—आज वह पूरी तरह से एक सजी-धजी और खुशहाल पत्नी लग रही थी। लेकिन इस खुशी के … Read more

आत्मसम्मान माँ का

पैंसठ वर्षीया सावित्री देवी के हाथों में चाय का कप हल्का-हल्का कांप रहा था। सुबह के सात बजे थे और रसोई से उनकी बहू तान्या की कर्कश आवाज़ पूरे घर में गूंज रही थी। “पता नहीं इस घर में दूध की नदियां बहती हैं क्या! सुबह उठते ही सबको दो-दो बार चाय चाहिए। बैठे-बैठे मुफ्त … Read more

सबक

सावित्री देवी जब सुबह उठीं, तो उन्होंने देखा कि पूरा सिंक जूठे बर्तनों से भरा है और घर में झाड़ू तक नहीं लगी है। तभी सुहासिनी जमाइयां लेती हुई बाहर आई और बोली, “माँ जी, आज तो मेरे सिर में बहुत भयंकर दर्द है। मुझसे तो खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा। मीनल दीदी को … Read more

ममता के नियम

अंजलि के जाते ही कमरे में ऐसा सन्नाटा छा गया मानो किसी ने वक्त को वहीं थाम दिया हो। अंजलि के उन चंद शब्दों ने सुमित्रा देवी के अंतर्मन पर किसी हथौड़े की तरह वार किया था। उनके पास अंजलि की बात का कोई जवाब नहीं था। जो नसीहतें वे अपनी बेटी को उसके ससुराल … Read more

संघर्ष

ड्राइंग रूम के सोफे पर बैठी नंदिनी अपने पच्चीस साल के बेटे सिद्धार्थ को सूटकेस पैक करते हुए देख रही थी। सिद्धार्थ कल सुबह मुंबई जा रहा था, लेकिन मुंबई जाने से पहले उसे शहर के दूसरे कोने में अपने पिता से मिलने जाना था। जब नंदिनी ने देखा कि वह अपने पिता की ‘दूसरी … Read more

उम्र के साथ इंसानी रिश्ते अपनी अहमियत खो देते हैं?

उस दिन सुधा की आँखों में आँसू आ गए थे। उसने आयुष को सीने से लगाते हुए कहा था, “पागल बच्चे, मेरी तो जान तुझमें बसती है। मैं तुझे छोड़कर भला कहाँ जा सकती हूँ?” माधवी और आस-पड़ोस की औरतों ने तब मुस्कुराते हुए कहा था कि सुधा सचमुच बहुत भाग्यशाली है जिसे इतना प्रेम … Read more

बदलाव की शुरुआत

शाम का समय था। सुमित्रा जी रसोई में खड़ी अपने और अपने पति के लिए चाय छान रही थीं। घर में एक अजीब सी शांति थी, लेकिन यह शांति अचानक एक तेज़ और कर्कश आवाज़ से टूट गई। आवाज़ उनके बेटे विकास के कमरे से आ रही थी। “मैंने तुम्हें तीन बार कॉल किया! तुम्हारी … Read more

कड़वी सच्चाई

अलमारी से कपड़े निकालकर तेज़ी से सूटकेस में ठूंसती हुई नीता के हाथ कांप रहे थे। उसकी आँखों से लगातार बहते गर्म आंसू उसके गालों को भिगो रहे थे, लेकिन इस वक्त उसे अपने आंसू पोंछने की भी फुर्सत नहीं थी। कुछ ही मिनटों पहले उसे अपनी माँ का फोन आया था कि उसके पिता, … Read more

खुशी के आँसू

रिश्तेदारों ने खूब ताने दिए कि “दीनानाथ ने अपनी बेटियों को सिर पर चढ़ा रखा है।” लेकिन बापू टस से मस नहीं हुए। समय का पहिया घूमता रहा। दीदी ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली और सिविल सर्विसेज़ की तैयारी शुरू कर दी। मैं भी कॉलेज पहुँच चुकी थी। लेकिन ज़िंदगी कभी भी एक सी … Read more

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