सबक

दोपहर का समय था और शहर के उस आलीशान फ्लैट में एक अजीब सी शांति छाई हुई थी। यह शांति किसी सुकून की नहीं, बल्कि एक आने वाले तूफान की थी। सोफे पर लेटी हुई सुहासिनी अपने फोन में उलझी थी, तभी उसकी जेठानी, मीनल, हाथ में एक गंदा तौलिया लिए बड़बड़ाते हुए कमरे में दाखिल हुई। “सुहासिनी! यह क्या तरीका है? मैंने कहा था ना कि आज वाशिंग मशीन तू लगाएगी। यह तौलिया और बाकी कपड़े अभी तक ऐसे ही क्यों पड़े हैं?”

सुहासिनी ने बिना फोन से नज़र हटाए बड़ी ही बेपरवाही से जवाब दिया, “दीदी, अभी मेरा मूड नहीं है। मेरे नाख़ून खराब हो जाएंगे। और वैसे भी, कल तो मैंने ही सारा काम किया था। आज आपकी बारी है।”

“क्या मतलब कल तुमने किया था? कल सिर्फ तुमने सब्ज़ी काटी थी, बाकी सारा काम मैंने किया था। मुझे पागल समझ रखा है क्या?” मीनल का पारा चढ़ने लगा था।

दोनों देवरानी-जेठानी में काम को लेकर रोज़ इसी तरह तू-तू मैं-मैं होती थी। दोनों के पति, विक्रम और राहुल, जब भी घर आते, तो उन्हें यही नज़ारा देखने को मिलता। आज भी जब दोनों भाई ऑफिस से जल्दी घर लौटे, तो घर की हालत देखकर उनका सिर चकरा गया।

“क्या हो रहा है ये सब? पूरा घर कबाड़खाना बना हुआ है और तुम दोनों यहाँ लड़ रही हो!” विक्रम ने गुस्से में अपना लैपटॉप बैग टेबल पर पटकते हुए कहा। “माँ गाँव से बार-बार फोन कर रही हैं कि वो हमारे साथ शहर में आकर रहना चाहती हैं। अगर उन्हें यहाँ की हालत पता चली, तो वो क्या सोचेंगी? तुम दोनों से एक घर नहीं संभलता!”

राहुल ने भी चिढ़ते हुए कहा, “रहने दो भैया, इन दोनों से कोई उम्मीद रखना बेकार है। ये हमारी परेशानी कभी नहीं समझेंगी।” दोनों भाई बड़बड़ाते हुए अपने-अपने कमरों में चले गए।

पीछे से सुहासिनी के दिमाग की बत्ती जली। उसने एक शातिर मुस्कान के साथ मीनल की तरफ देखा और बोली, “दीदी! एक आईडिया है। क्यों ना हम माँ जी को यहाँ बुला लें?”

मीनल ने सुहासिनी को घूरते हुए कहा, “तेरा दिमाग खराब हो गया है क्या? एक तो वैसे ही हम काम से भागते हैं, ऊपर से सासू माँ आ गईं तो वो हमें काम के लिए और ताने मारेंगी।”

“अरे दीदी, आप भी ना, बिल्कुल ट्यूबलाइट हो!” सुहासिनी ने पास आते हुए धीरे से कहा, “माँ जी गाँव की हैं। उन्हें दिन भर काम करने की आदत है। अगर वो यहाँ आ गईं, तो हमारा आधा काम तो वो खुद ही कर देंगी। हम कह देंगे कि हमें ऑफिस का काम होता है या हमारी तबीयत ठीक नहीं है। सोचो, हमें बिना पैसे की एक 24 घंटे की नौकरानी मिल जाएगी!”

मीनल की आँखों में भी चमक आ गई। “सुहासिनी, बात तो तूने पते की कही है। वैसे भी अगले महीने घर की पुताई और सफाई होनी है। अगर माँ जी आ गईं, तो हमें वो सब भी नहीं करना पड़ेगा। चल, अभी जाकर विक्रम और राहुल से कहते हैं।”

दोनों बहुएं तुरंत अपने पतियों के पास गईं और भोली बनकर मीनल बोली, “सुनिए, हम दोनों सोच रही थीं कि माँ जी गाँव में अकेली बोर हो जाती होंगी। क्यों ना उन्हें कुछ महीनों के लिए यहाँ बुला लिया जाए? हमें भी उनका आशीर्वाद मिलेगा।”

विक्रम और राहुल अपनी पत्नियों का यह बदला हुआ रूप देखकर हैरान रह गए, लेकिन उन्होंने खुशी-खुशी अपनी माँ, सावित्री देवी, को शहर बुलाने का फैसला कर लिया।

दो दिन बाद सावित्री देवी शहर पहुँच गईं। मीनल और सुहासिनी ने उनका बहुत दिखावटी स्वागत किया। पहले दिन तो दोनों ने खूब सेवा की, लेकिन अगले ही दिन सुबह से उनका असली खेल शुरू हो गया।

सावित्री देवी जब सुबह उठीं, तो उन्होंने देखा कि पूरा सिंक जूठे बर्तनों से भरा है और घर में झाड़ू तक नहीं लगी है। तभी सुहासिनी जमाइयां लेती हुई बाहर आई और बोली, “माँ जी, आज तो मेरे सिर में बहुत भयंकर दर्द है। मुझसे तो खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा। मीनल दीदी को भी कुछ ज़रूरी काम से बाहर जाना है। क्या आप प्लीज़ थोड़ा सा घर का काम देख लेंगी? और हाँ, आपके बेटों को नाश्ते में आलू के पराठे पसंद हैं, वो भी बना दीजिएगा।”

सावित्री देवी, जो बहुत ही समझदार और अनुभवी महिला थीं, अपनी बहुओं की चाल एक ही झटके में समझ गईं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं बहू, तुम आराम करो। मैं सब देख लूँगी।”

शाम को जब दोनों बहुएं अपनी किटी पार्टी से लौटीं, तो उन्होंने देखा कि घर एकदम चकाचक है और रसोई से बहुत अच्छी खुशबू आ रही है। दोनों मन ही मन बहुत खुश हुईं कि उनका प्लान काम कर गया। रात को खाने पर दोनों भाइयों ने सावित्री देवी के बनाए खाने की जमकर तारीफ की।

“माँ, सच में आपके हाथ का स्वाद तो कोई नहीं भूल सकता। मीनल और सुहासिनी तो ऐसा खाना कभी बना ही नहीं सकतीं,” विक्रम ने उंगलियां चाटते हुए कहा।

मीनल ने तुरंत मौके का फायदा उठाते हुए कहा, “हाँ माँ जी, आप तो अन्नपूर्णा हैं। तो क्यों ना कल से घर का सारा खाना आप ही बनाएं? हम दोनों तो आपकी मदद कर दिया करेंगी।”

सावित्री देवी ने एक गहरी सांस ली और बहुओं की आँखों में सीधे देखते हुए कहा, “बिल्कुल बनाऊंगी। लेकिन बहुओं, मुझे लगता है तुम दोनों को भी मुझसे कुछ स्वादिष्ट पकवान बनाना सीख लेना चाहिए। कल से तुम दोनों रसोई में मेरे साथ काम करोगी।”

यह सुनकर मीनल और सुहासिनी के पसीने छूट गए। अगले दिन सुबह, दोनों ने फिर से बहाना बनाने की कोशिश की। मीनल ने पेट दर्द का बहाना बनाया और सुहासिनी ने कहा कि उसे डॉक्टर के पास जाना है।

सावित्री देवी ने अपनी चाय का कप नीचे रखा और बहुत ही शांत लेकिन कड़क आवाज़ में बोलीं, “अरे डॉक्टर के पास जाने की क्या ज़रूरत है? मेरे पास गाँव का ऐसा अचूक चूर्ण है कि एक बार खाते ही सारे दर्द गायब हो जाते हैं। और वैसे भी, मैं तो आज पड़ोस के मंदिर में हो रहे भजन-कीर्तन में जा रही हूँ। वहाँ मुझे पूरा दिन लग जाएगा। तो तुम दोनों ऐसा करना, पूरे घर की अच्छी तरह से सफाई कर देना। वो जाले जो मैंने कल छोड़े थे, वो साफ़ कर देना। और हाँ, दोपहर के लिए भिंडी की सब्ज़ी, दाल-चावल, रोटी, रायता और मीठे में गाजर का हलवा बनाकर रखना। मैं कीर्तन से लौटूंगी तो मुझे भूख लगेगी।”

इतना कहकर सावित्री देवी अपना पर्स उठाकर घर से बाहर निकल गईं। मीनल और सुहासिनी अवाक खड़ी रह गईं। जो जाल उन्होंने सासू माँ के लिए बुना था, वे खुद उसी में फँस चुकी थीं।

“ये क्या हो गया दीदी? हम तो इन्हें नौकरानी बनाने लाए थे, ये तो हम पर ही हुकुम चला कर चली गईं!” सुहासिनी ने झुंझलाते हुए कहा।

“मुझे क्या पता था कि गाँव की सासू माँ इतनी चतुर निकलेंगी! अब क्या करें?” मीनल ने माथा पीटते हुए कहा।

दोनों बहुएं गुस्से में थीं। उन्होंने तय किया कि जब सासू माँ लौटेंगी, तो वे उन्हें साफ-साफ कह देंगी कि अगर इस घर में रहना है तो काम करना पड़ेगा, वरना वो गाँव वापस जा सकती हैं।

शाम को जब सावित्री देवी लौटीं, तो दोनों बहुएं सोफे पर पैर पसारे बैठी थीं। उन्होंने कोई काम नहीं किया था। सावित्री देवी अंदर आईं और मुस्कुराते हुए बोलीं, “अरे बहुओं, आज तो कीर्तन में बड़ा मज़ा आया। वहाँ मुझे एक महिला मिली, जो बिल्कुल मेरी ही उम्र की थी। बेचारी बहुत दुखी थी।”

मीनल ने चिढ़ते हुए पूछा, “क्या हो गया उसे?”

सावित्री देवी ने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए कहानी सुनानी शुरू की, “उसकी बहुएं भी बड़ी चालाक थीं। उसे गाँव से काम कराने के लिए ले आईं। जब उस बेचारी ने काम करने से मना किया, तो बहुओं ने उसकी वापसी की टिकट कटा दी और उसका सामान घर से बाहर फेंक दिया।”

सुहासिनी और मीनल ने एक-दूसरे की तरफ देखा। उन्हें लगा जैसे सावित्री देवी उनके ही मन की बात कह रही हों।

“फिर क्या हुआ माँ जी?” सुहासिनी ने उत्सुकता से पूछा।

सावित्री देवी ने अपनी आँखों में एक खास तरह की चमक लाते हुए कहा, “फिर क्या होना था! वो सास भी मेरी तरह तजुर्बेकार थी। उसने अपना सामान वापस अंदर किया और उन दोनों बहुओं से कहा कि यह घर उनके बेटों की कमाई का है, और वो इस घर की मालकिन है। उसने उन दोनों बहुओं को घर से बाहर निकालने की धमकी दी। बेचारी बहुएं डर गईं और उन्होंने सास के पैर पकड़ कर माफ़ी मांगी। अब वो दोनों बहुएं सुबह-शाम अपनी सास की सेवा करती हैं और घर का सारा काम भी खुद करती हैं।”

सावित्री देवी रुकीं और अपनी बहुओं की तरफ देखते हुए बहुत ही मीठे लेकिन चेतावनी भरे लहजे में बोलीं, “मैंने उस महिला से कहा कि मेरी बहुएं तो बहुत अच्छी हैं। वो तो मुझे यहाँ आराम करने के लिए लाई हैं। वो कभी मेरे साथ ऐसा बर्ताव नहीं करेंगी। सही कहा ना मैंने, बहुओं?”

मीनल और सुहासिनी का चेहरा पीला पड़ चुका था। उन्हें सावित्री देवी का इशारा बिल्कुल साफ समझ आ गया था। उन्हें एहसास हो गया था कि उनकी चालाकी सासू माँ के तजुर्बे के आगे कुछ नहीं है, और अगर उन्होंने होशियारी दिखाने की कोशिश की, तो सासू माँ उन्हें घर से बाहर का रास्ता दिखाने में देर नहीं लगाएंगी।

दोनों बहुएं तुरंत सोफे से उठीं और सावित्री देवी के पास जाकर बोलीं, “हाँ… हाँ माँ जी, आपने बिल्कुल सही कहा। आप जाइए, कमरे में जाकर आराम कीजिए। हम दोनों अभी घर की सफाई कर देते हैं और आपके लिए गरमा-गरम खाना भी बनाते हैं।”

सावित्री देवी ने अपनी मुस्कान छिपाते हुए कहा, “ठीक है बहुओं। पर ध्यान रखना, सब्ज़ी में नमक कम हो और हलवे में ड्राई फ्रूट्स अच्छे से डालना। और हाँ, मेरे कमरे में भी पोंछा लगा देना।”

अगले ही पल मीनल हाथ में झाड़ू और सुहासिनी किचन में सब्ज़ी काटती नज़र आ रही थी। सावित्री देवी आराम से अपने कमरे में चाय पी रही थीं। जब शाम को विक्रम और राहुल लौटे, तो उन्होंने देखा कि घर चमक रहा है और उनकी दोनों पत्नियाँ किचन में पसीने से लथपथ होकर खाना बना रही हैं। दोनों भाई अपनी माँ के इस चमत्कार को देखकर हैरान रह गए और मन ही मन खुश भी हुए कि आखिरकार किसी ने तो इन दोनों को सबक सिखाया।

आशा करती हूँ दोस्तों आपको हमारी कहानी ज़रूर अच्छी लगी होगी।

**अगर इस कहानी ने आपके दिल को छुआ तो तो लाइक, कमेंट और शेयर करें अगर इस पेज पर पहली बार आए हैं तो ऐसे ही पारिवारिक और मज़ेदार कहानियाँ पढ़ने के लिए पेज को फ़ॉलो करें , धन्यवाद!**

error: Content is protected !!