एक नई सुबह की उम्मीद
शाम के साढ़े छह बज रहे थे। छह साल की मिस्टी अपनी छोटी सी गुड़िया लिए दरवाज़े की चौखट पर टकटकी लगाए बैठी थी। उसके पिता, सिद्धार्थ, पिछले एक महीने से अपने किसी ज़रूरी प्रोजेक्ट के सिलसिले में दूसरे शहर गए हुए थे और आज लौट रहे थे। मिस्टी ने पूरे घर को अपने छोटे-छोटे … Read more