सच्ची मुस्कान
मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई थी। “हमारा पड़ोसी है ना रोहन… वो हमारी बहुत मदद करता है।” आंटी के ये शब्द मेरे कानों में गूंज रहे थे। मैं? मैं उनकी मदद करता था? मैं तो वो इंसान था जो उनसे बचने के लिए सीढ़ियों में छिप जाता था। मैं वो था जो उन्हें अपना … Read more