सच्ची मुस्कान

मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई थी। “हमारा पड़ोसी है ना रोहन… वो हमारी बहुत मदद करता है।” आंटी के ये शब्द मेरे कानों में गूंज रहे थे। मैं? मैं उनकी मदद करता था? मैं तो वो इंसान था जो उनसे बचने के लिए सीढ़ियों में छिप जाता था। मैं वो था जो उन्हें अपना … Read more

घरवाला

क्या तुम्हें कभी ऐसा नहीं लगता कि तुम एक ‘औरत’ का काम कर रहे हो? या शिखा तुम पर हुक्म चला रही है?” समीर ने झिझकते हुए वह सवाल पूछ ही लिया जो उसके मन में अटका था। अभिनव ज़ोर से हंस पड़ा। उसकी हंसी में कोई बनावट नहीं थी। “औरत का काम? खाना पकाना … Read more

उम्र की ढलान

“ये आप क्या कर रहे हैं? इस उम्र में आकर हाथ जोड़ने शोभा नहीं देते। पति-पत्नी का रिश्ता तो एक गाड़ी के दो पहियों जैसा होता है। कभी एक पहिया घिस जाता है, तो दूसरा उसका भार सँभाल लेता है। इसमें माफी कैसी?” सावित्री की आवाज़ में एक अजीब सा सुकून था। “और वैसे भी, … Read more

बदला हुआ इंसान – रमा शुक्ला

“हाँ, मैंने गलती की। मैं धन बटोरने में अंधा हो गया था। मुझे लगा पैसा ही सब कुछ है।” रघुनाथ जी का गला रुंध गया। “लेकिन सबसे बड़ा पाप जो हमने किया है, वह विक्रम को बिगाड़ना नहीं है। वह पाप है इस मासूम लड़की मीरा की जिंदगी बर्बाद करना। याद है तुम्हें? जब विक्रम … Read more

अहंकार – गरिमा चौधरी

“अरे रूचि, खुशकिस्मत तो ये हैं कि इन्हें मेरे जैसा पति मिला,” विक्रांत ने एक व्यंग्यात्मक हँसी हँसते हुए कहा, “वर्ना सोचो, किसी और से शादी होती तो आज भी किसी दो कमरों के फ्लैट में बर्तन मांज रही होतीं। ये तो मेरा विजन है, मेरी मेहनत है, जो आज ये महारानियों की तरह इस … Read more

जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा

सुबह के आठ बज रहे थे, लेकिन मास्टर रघुनाथ जी के भीतर जैसे कोई तूफ़ान उबल रहा था। उनकी पत्नी सुमित्रा ने मेज़ पर चाय का प्याला रखते हुए कहा, “चाय ठंडी हो रही है, इसे तो पी लीजिए। सुबह से उस कागज़ में सिर खपाए बैठे हैं, जैसे आज ही कोई बड़ा किला फतह … Read more

बाबूजी की ज़िद

रघुनाथ जी के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आईं। उन्होंने चाय का कप लिया और बेंच पर बैठ गए। “हम्म… सूजन आ गई है। मैंने कल ही कहा था कि डॉक्टर के पास चलते हैं, लेकिन मेरी सुनती कहाँ है वो।” मीरा ने हिम्मत जुटाते हुए कहा, “बाबूजी, अगर आप बुरा ना मानें तो … Read more

 प्रेम की शुरुआत

लेकिन जब बुआ जी ने कहा, “ये हमारी मीता है,” तो समीर के माथे पर भी सिलवटें पड़ गईं। उसे थोड़ा बुरा भी लगा। क्या लड़की वालों ने उसे इतना हल्के में लिया है कि वे ठीक से तैयार भी नहीं हो सकते? क्या उसके पास पहनने के लिए एक ढंग का सूट नहीं था? … Read more

वफ़ादार

अंदर का नजारा देखकर रोहन के होश उड़ गए। ब्रूनो तुरंत रोहन के पैंट को अपने मुंह से पकड़कर उसे बेडरूम की तरफ खींचने लगा। रोहन दौड़ा-दौड़ा बेडरूम में गया, तो देखा कि सुमित्रा जी फर्श पर बेसुध पड़ी थीं। शायद वे बाथरूम से लौटते वक्त फिसल कर गिर गई थीं। उनका पूरा शरीर बुखार … Read more

काँच के रिश्ते

“अंजलि, जो तुमने नीचे देखा, वो बहुत दुखद था, लेकिन तुम्हें एक बात समझनी होगी। जब दो अलग-अलग इंसान, जिनकी सोच अलग है, परवरिश अलग है, एक ही छत के नीचे पूरी जिंदगी बिताने का फैसला करते हैं, तो उनके बीच वैचारिक मतभेद होना एक बेहद स्वाभाविक सी बात है। जहां गहरा प्यार होता है, … Read more

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