निस्वार्थ भावना
मुझे उस पांच सौ के नोट को देखकर हंसी आ गई। मैंने मन ही मन सोचा, ‘माँ भी किस दुनिया में जी रही हैं। आजकल इतने पैसों में तो बड़े अस्पतालों के पार्किंग और पर्चे का खर्च भी पूरा नहीं होता।’ कार में बैठते ही दादा जी, जो पीछे की सीट पर दर्द से कराह … Read more