राख से उठी उड़ान

सावन का महीना अपने पूरे शबाब पर था। बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी और मिट्टी की सौंधी महक से पूरा वातावरण महक रहा था। आज हरियाली तीज का त्योहार था। महिलाओं के लिए यह दिन सुहाग और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। शहर की हर सड़क, हर मोहल्ले में सुहागिनें हरे रंग … Read more

अपना आसमान

कौशल्या देवी की आँखों से भी आंसुओं की अविरल धारा बह रही थी। उन्होंने झुककर अपने घर की उस पावन चौखट को चूमा। दीनानाथ जी ने कांपते हाथों से उस नेमप्लेट को छुआ। अपनी खुरदुरी उंगलियों से उन्होंने अपने नाम के एक-एक अक्षर को ऐसे महसूस किया जैसे कोई अंधा व्यक्ति वर्षों बाद अचानक रोशनी … Read more

वो बरगद की छांव और बाबूजी की निशानी

 मालती देवी के कांपते होंठों पर कई दिनों बाद एक हल्की, सुकून भरी मुस्कान खिल उठी। उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपना हाथ उठाकर अंकित के सिर पर रख दिया। उनके स्पर्श में वही पुरानी ममता, वही आशीष लौट आया था। मालती ने कमजोर आवाज में कहा, “जीते रहो मेरे बच्चे… तुमने आज अपने दादाजी की … Read more

स्वाभिमान की नई सुबह

“फिर मेरे अंदर की ममता और मेरा डर, दोनों खत्म हो गए दीदी। मैंने उस दिन रोना छोड़ दिया। मैंने घर में रखी कपड़े धोने वाली मूसली उठाई और उसे बता दिया कि अब और नहीं। मैंने उसे घर से धक्के मारकर निकाल दिया है। कह दिया है कि अगर मुड़कर इस गली में आया, … Read more

महकते जज़्बात

 नीरजा ने बड़ी शांति से आनंद के हाथ अपने हाथों में ले लिए और हल्की सी मुस्कुराहट के साथ बोली, “शिकायत किससे करती? आपसे? मैंने आपसे प्यार किया था आनंद। प्यार में कोई शर्त नहीं होती, कोई व्यापार नहीं होता कि मैंने आपको अपना पूरा दिल दिया तो बदले में मुझे भी आपका पूरा दिल … Read more

जड़ों की पुकार

दीनानाथ जी की आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। आकाश और विकास ने आगे बढ़कर अपने पिता के पैर छुए। आकाश ने रुंधे हुए गले से कहा, “हमें माफ कर दीजिए बाबूजी। हम भूल गए थे कि पेड़ चाहे कितना भी बड़ा हो जाए, अगर उसकी जड़ें कट जाएं, तो वह हरा-भरा नहीं रह … Read more

अनकहा ऋण

उस रात मीनाक्षी बहुत रोई। एक तरफ उसका अपना बसा-बसाया घर और बच्चे थे, और दूसरी तरफ मौत की कगार पर खड़ा उसका छोटा भाई। लेकिन मीनाक्षी ने अपने मन को मजबूत किया। अगली सुबह उसने अपने पति से कहा, “मेरे पिता ने मुझे क्या दिया, यह मैं नहीं जानती। लेकिन अंशुल मेरा भाई है। … Read more

अटूट आस की डोर

 जब काव्या को यशोदा के कमरे में ले जाया गया, तो वहां का दृश्य देखने लायक था। पालने में एक नन्हा सा जीव मखमली कपड़े में लिपटा हाथ-पैर चला रहा था। काव्या कमरे में ऐसे दाखिल हुई जैसे कोई तपस्वी अपनी तपस्या का फल लेने आया हो। उसके चेहरे पर जो संतोष, तेज और गर्व … Read more

 उड़ान और जड़ें

 राघव अवाक रह गया। उसने सोचा था कि मीरा उसे देखते ही रो पड़ेगी, शिकायतें करेगी और फिर उसकी दौलत देखकर सब माफ कर देगी। लेकिन यहां तो मीरा किसी और ही मिट्टी की बन चुकी थी। एक ऐसी स्त्री जिसे अब किसी सहारे की दरकार नहीं थी। उसे एहसास हुआ कि उसने दुनिया तो … Read more

दिल की वसीयत

दीपावली का दिन था। छोटे से कस्बे के उस पुराने लेकिन सजे-धजे घर के आंगन में दीये जल रहे थे। घर के दालान में बैठे रिटायर्ड मास्टर दीनानाथ जी की नज़रें बार-बार दरवाज़े की तरफ उठ रही थीं। उनका छोटा बेटा समीर आँगन में रंगोली बना रहा था, जबकि उनकी पत्नी रसोई से पकवानों की … Read more

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