बड़ी माँ – सविता गर्ग 

“दीदी, आप हमेशा आईने के सामने इतनी देर लगाती हैं! मैं पिछले आधे घंटे से बाहर खड़ी आपका इंतज़ार कर रही हूँ, और आप हैं कि आपकी बिंदी ही सेट नहीं हो रही।” निहारिका ने अपने हाथों में पहनी कांच की चूड़ियों को खनकाते हुए अपनी बड़ी चचेरी बहन काव्या से शिकायत की। काव्या ने … Read more

दौड़ती जिंदगी और ठहरे हुए संस्कार… – संध्या त्रिपाठी

क्यों परेशान है मिसराइन जी….. संयुक्त का हाथ पकड़ते हुए मिश्रा जी ने पूछा…  अरे कुछ नहीं मिश्रा जी… मैं तो बस ऐसे ही…  कुछ कुछ सोचती रहती हूं ना … अच्छा बताइए  आप अभी क्या सोच रही थीं …मुस्कुराते हुए मिश्रा जी ने कहा … आप हसेंगे…  तो क्या हुआ …अच्छा तो है आप … Read more

बुढ़ापा तो सब पर आना है – नीलम गुप्ता

वह इस सोसाइटी में पिछले काफी वर्षों से रह रही हैं ।घर में कोई दूसरा नहीं है ,ना पति ना बच्चे बस एक नौकरानी है जो उनके सब काम करती है। 4 वर्ष पूर्व जब हम यहां रहने आए तो सबसे पहले हमारा परिचय उन्हीं से हुआ। वह छड़ी के सहारे धीरे-धीरे चलती हुई हमारे … Read more

छोटी बहन – नीलम गुप्ता

अनुपमा उर्फ़ अनु, मेरी छोटी बहन बहुत प्यारी है l मेरा हर कहा मानती है l अपने चार साल छोटी अनु पर मैं खूब रॉब चलाती हूँ – अनु एक गिलास पानी देना l अनु मेरे बेग में से हिन्दी की किताब निकाल कर ला l मेरे कपडे में अलमारी में रख दे ! वगैरह … Read more

मेंहदी अभियान – विभा गुप्ता

      बचपन में गर्मी की छुट्टियाँ होते ही हम सब भाई-बहन नानी घर चले जाते थें।दोपहरी में घर के बड़े आराम करते और हम छोटे खूब उधम मचाते।ऐसे में एक दिन हमारी नानी ने हम बच्चों को बगीचे से मेंहदी के पत्ते तोड़ लाने का काम सौंप दिया। हम सभी ने बड़े उत्साह से अपने-अपने रुमाल … Read more

सुयोग्य बहू की तलाश – साधना वैष्णव

गौरव आज बहुत खुश है। खुश क्यों न हो उसे आज पहली तनख्वाह जो मिली है। वह खुशी-खुशी लगभग दौड़ता हुआ माँ के पास पहुँचा। उनको अपनी आँखें बंद करने कहा। माँ बोलीं- क्यों? मैं अभी संध्या आरती की तैयारी कर रही हूँ, मेरे पास तुम्हारे साथ खेलने के लिए समय नहीं है।         गौरव ने … Read more

घर की लक्ष्मी – मंजू ओमर

अरे उठ जा कलमुँही कबतक लेटी रहेगी, सुबह के आठ बजे रहे है चाय नाश्ता नहीं बनाएगी क्या, सर दर्द से फटा जा रहा है मेरा बिना चाय के। अरे अब उठ, इतना धीरे धीरे क्यों उठ रही है शरीर मे जान नहीं है क्या, कामचोर कहीं की। बस काम से जी चुराती रहती है। … Read more

अपमान – करुणा मलिक

 बहुत बधाई हो मंजू, नए प्यारे से घर की, बहुत सुंदर मकान बनाया है।  धन्यवाद जी, क्या करे ं …. मेरी पसंद तो थी ही अव्वल, मेरे तो बच्चों को भी कोई चीज आसानी से पसंद नहीं आती। तुम्हें पता है कुमुद, ठेकेदार ने छह- सात महीने का टाइम दिया था मकान पूरे करने का…..पर … Read more

स्वाभिमान की नई उड़ान – रमा देवी

पैंसठ वर्षीया सावित्री देवी के हाथों में चाय का कप हल्का-हल्का कांप रहा था। सुबह के सात बजे थे और रसोई से उनकी बहू तान्या की कर्कश आवाज़ पूरे घर में गूंज रही थी। “पता नहीं इस घर में दूध की नदियां बहती हैं क्या! सुबह उठते ही सबको दो-दो बार चाय चाहिए। बैठे-बैठे मुफ्त … Read more

मंज़िल की ओर कदम – नीतू चौहान

मीरा जब ब्याह कर इस घर में आई थी, तो उसकी आँखों में एक नई ज़िंदगी के साथ-साथ अपने करियर को लेकर भी कई सुनहरे सपने थे। शादी से पहले ही उसने बता दिया था कि वह राज्य लोक सेवा आयोग (PCS) की तैयारी कर रही है। शुरुआत में तो ससुराल वालों ने बड़ी-बड़ी बातें … Read more

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