बेटे की शादी

सुशीला बहन, तुम्हारी नजर में कोई ऐसी सीधी-सादी और घरेलू लड़की है क्या, जो मेरे सुमित को संभाल सके? हम दहेज में एक पैसा नहीं मांगेंगे, बस लड़की हमारे बेटे को सुधार दे।” सुशीला तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए चहक उठी, “अरे मेरे मायके के पड़ोस में एक बहुत ही गरीब लेकिन … Read more

राखी

पिताजी की आवाज रुंध गई थी। उन्होंने आगे कहा, “जब मैं विमला की भेजी हुई इस साधारण सी सूती राखी को अपनी कलाई पर बांधता हूं, तो मुझे ऐसा लगता है जैसे मेरी छोटी बहन ने अपना सारा दर्द, अपना सारा संघर्ष इस धागे में पिरोकर मुझे भेज दिया है। यह राखी मुझे याद दिलाती … Read more

ईंट की दीवारें

“दीदी, तू आ गई! मुझे लगा तू भी मुझसे पराई हो गई।” मयंक रो पड़ा। स्मृति भी बाहर आ गई और शालिनी के पैर छूकर रोने लगी। शालिनी ने दोनों को बिठाया और भरे हुए गले से पूछा, “मयंक, ये सब क्या है? बाबूजी और अम्मा के जाने के बाद तुम दोनों ने इस घर … Read more

चाँदी की पायल

नेहा अपनी बालकनी में सूखते हुए कपड़े उतार रही थी कि तभी उसकी नज़र नीचे वाले घर के अहाते में पड़ी। नीचे के हिस्से में मिस्टर और मिसेज़ शर्मा रहते थे, जिन्हें पूरी कॉलोनी वाले प्यार से ‘रघु अंकल’ और ‘कल्याणी आंटी’ कहते थे। नेहा ने देखा कि कल्याणी आंटी बड़ी बेचैनी से मुख्य द्वार … Read more

दिल के दरवाजे

“अंकल… मुझे माफ कर दीजिए… अंजलि… अंजलि को लेबर पेन हो रहा है। कोई गाड़ी नहीं है, नेटवर्क नहीं है, मेरी कोई मदद नहीं कर रहा। वो मर जाएगी अंकल… प्लीज मेरी मदद कीजिए!” सिद्धार्थ फूट-फूट कर रोने लगा और उनके पैरों में गिर पड़ा। तभी पीछे से कौशल्या जी हाथ में शॉल और कुछ … Read more

नेकी वापस लौटते हैं

“जी, आप किसे ढूँढ रहे हैं?” दीनानाथ जी ने अपनी कांपती हुई आवाज में पूछा। नौजवान की आँखें दीनानाथ जी की जर्जर हालत देखकर छलक पड़ीं। वो बिना कुछ बोले सीधे उनके पैरों पर गिर पड़ा और फफक-फफक कर रोने लगा। “ये क्या कर रहे हैं आप? उठिए… कौन हैं आप?” दीनानाथ जी पीछे हटते … Read more

 ऊपर वाले का दरवाजा

सुमेधा को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। दस दिन का वह नर्क, वह पल-पल मरने का एहसास, वह रातों की नींद और आंसुओं का सैलाब… सब कुछ एक झटके में खत्म हो गया था। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। डॉक्टर माथुर ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “देखिए मिसेज … Read more

बेटी को सीख – संगीता अग्रवाल

सुमित्रा जी ने एक गहरी सांस ली और कहा, “अच्छा! तो वहां तेरी ननद आनी चाहिए थी अपनी माँ की सेवा करने के लिए, क्योंकि तू थक गई थी? और यहाँ? यहाँ तू ननद बनकर आई है, तो तेरी भाभी को तेज बुखार में भी तेरी और तेरे बच्चों की गुलामी करनी चाहिए? ये कैसा … Read more

झूठे रुतबे की बुनियाद

और फिर एक रात वह हुआ जिसने दोनों परिवारों की बची-खुची इज्जत को भी खाक में मिला दिया। विक्रम उस रात बहुत ज्यादा शराब पीकर घर आया था। किसी बिजनेस डील में उसे भारी नुकसान हुआ था और उसका सारा गुस्सा काव्या पर फूट पड़ा। काव्या भी उस वक्त अपने किसी दोस्त के साथ वीडियो … Read more

निस्वार्थ कर्म

शहर के जाने-माने रिटायर्ड बैंक अधिकारी सुधीर बाबू अपनी ईमानदारी और दरियादिली के लिए पूरे मोहल्ले में मशहूर थे। उनके दरवाजे से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता था। किसी की बेटी की शादी हो, किसी के बच्चे की फीस भरनी हो या किसी के इलाज का खर्च उठाना हो, सुधीर बाबू हमेशा अपनी हैसियत … Read more

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