मैली चादर का उजास

 आईने के सामने खड़ी मंदाकिनी अपनी कजरारी आँखों में सलीके से सुरमा लगा रही थी। उसके अधरों पर एक सहज और सच्ची मुस्कान थिरक रही थी, जो शायद उसने कई बरसों से खुद के चेहरे पर नहीं देखी थी। उसने गहरे हरे रंग की रेशमी साड़ी पहनी थी, जिसके किनारों पर सुनहरी गोटेदार किनारी लगी … Read more

मैली चादर 

महेंद्र भी आगे बढ़े, उनकी आंखें भी नम थीं। उन्होंने अनुष्का के सिर पर हाथ रखा और भरे गले से कहा, “बेटा, आज तन्वी ने हमारी आंखों से लालच की पट्टी उतार दी है। कल सुबह ही हम वकील को बुलाएंगे। तुम्हारे पिता का जो भी था—दुकान, मकान और बैंक बैलेंस—वह सब तुम्हारे नाम किया … Read more

खंडहरों से आसमां तक

वैदेही की आँखों से आंसू बह निकले। उसने कांपती आवाज में चिन्मय से कहा, “चिन्मय… जिस समंदर को मैं अपनी जिंदगी समझती थी, उसने आज हमसे हमारी छत ही छीन ली। देखो न, आज हमारे सिर पर वही खुला आसमान है, वही तारे हैं जिन्हें हम ढूंढते थे… लेकिन आज मुझे इनसे नफरत हो रही … Read more

उजालों का आँगन

 अमृता वहीं स्तब्ध खड़ी रह गई। उसे अपनी सास से ऐसी बेरुखी की उम्मीद नहीं थी। उसका दिल टूट गया। वह अपने कमरे में आई, बिस्तर पर गिर पड़ी और तकिए में मुँह छिपाकर सिसक-सिसक कर रोने लगी। उसे लगा कि भले ही ससुराल वाले कितने भी अच्छे हों, लेकिन आखिर में एक बहू के … Read more

पसीने की स्याही

तान्या के ये शब्द किसी जलते हुए अंगारे की तरह सुमित्रा के सीने पर गिरते। कई बार जब कॉलेज में फॉर्म भरते समय या किसी समारोह में अभिभावक का पेशा पूछा जाता, तो दोनों भाई-बहन ‘स्वर्गीय पिता शिक्षक थे’ लिखकर बात टाल देते, लेकिन कभी यह स्वीकार नहीं करते कि उनकी मां उसी व्यवस्था में … Read more

उजालों का नया सवेरा

 सावित्री के सीने पर जो पत्थर कई महीनों से रखा हुआ था, वह एकाएक पिघलकर आंसुओं के रास्ते बह निकला। वे जो आंसू बरसों से उनकी पलकों के पीछे कैद थे, वे आज पूरी शिद्दत से बह रहे थे। पर ये दुख के आंसू नहीं थे, ये मुक्ति, प्रेम और पुनर्जन्म के आंसू थे। उन्हें … Read more

ढाल से तलवार तक

“बेटी?” संध्या ने सीधे उसकी आँखों में देखा। उसकी आवाज में कोई कंपन नहीं था। “अपनी बेटी को कोई फार्महाउस पर बुलाने की धमकी देता है? अपनी बेटी की मजबूरी का फायदा उठाकर उसका घर छीनने की साजिश करता है? त्रिलोक चंद, तुम्हारे जैसे भेड़ियों को लगता है कि अगर किसी औरत के सिर से … Read more

मन का दर्पण 

 सब्जी बेचने वाली उस साधारण सी औरत के इन शब्दों ने अवनि के भीतर जैसे एक सोई हुई चेतना को झकझोर कर जगा दिया। अवनि को लगा मानो किसी ने उसके सामने एक आईना रख दिया हो। वह जिस समाज के तानों से डरकर रो रही थी, उस समाज का उसके जीवन में कोई वास्तविक … Read more

प्रेम का सफर

 मीनाक्षी ने अपनी भीगी हुई आंखों को उठाया। उसका चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था, लेकिन उसकी आवाज में एक अजीब सा ठहराव और दृढ़ता थी। उसने कहा, “साहब, इस इंसान से मैंने अपनी सांसों से भी ज्यादा प्यार किया है। इनके एक इशारे पर मैं अपनी जान तक दे सकती थी। लेकिन जो इंसान … Read more

कोरे आँगन में खिली लाल चूनर

 कल्याणी जी ने भावुक होकर कहा, “यह कंगन मेरी माँ ने मुझे दिए थे। आज तक इन्हें किसी रस्म में पहनने की हिम्मत नहीं जुटा पाई, पर आज मैं इन्हें अपनी बेटी को सौंप रही हूँ। तुम मेरी सिर्फ बहू नहीं, इस घर की रौनक हो। माना कि शादी के वक्त मैं अपनी झिझक के … Read more

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