उजड़ते आंगन में उम्मीद की वापसी
कौशल्या जी ने कांपते हाथों से देवांश का चेहरा उठाया और उसे सीने से लगा लिया। “तू आ गया मेरे बच्चे… तू आ गया। लेकिन तू था कहाँ? हमने तुझे कितना ढूंढा। अंजलि ने तुझे हज़ारों मेल किए, सैकड़ों फोन किए, लेकिन तेरा कोई अता-पता नहीं था। क्या तू हमसे इतना खफा था कि हमारी … Read more