उजड़ते आंगन में उम्मीद की वापसी

कौशल्या जी ने कांपते हाथों से देवांश का चेहरा उठाया और उसे सीने से लगा लिया। “तू आ गया मेरे बच्चे… तू आ गया। लेकिन तू था कहाँ? हमने तुझे कितना ढूंढा। अंजलि ने तुझे हज़ारों मेल किए, सैकड़ों फोन किए, लेकिन तेरा कोई अता-पता नहीं था। क्या तू हमसे इतना खफा था कि हमारी … Read more

तुम्हारे साथ, ढलती शाम तक…

 आदित्य ने मीरा की आँखों में गहराई से देखते हुए कहा, “मीरा, तुमने कल कहा था कि मैंने तुम्हें कभी प्रपोज नहीं किया। सच कहूँ तो, मुझे वो भारी-भरकम शब्द और फिल्मी डायलॉग बोलने नहीं आते। मुझे नहीं पता कि चाँद-तारे कैसे तोड़े जाते हैं, क्योंकि मुझे पता है कि हकीकत में हमें इसी ज़मीन … Read more

रिश्तों की नई परिभाषा: जब कमियों को मिला प्यार

 “मुझे तुम्हारी ईमानदारी बहुत पसंद आई मीरा,” सुमित्रा जी की आवाज में एक अजीब सी नरमी थी। उन्होंने अपनी जगह से उठकर मीरा के पास आकर उसके सिर पर हाथ रखा और कहा, “तुम्हें पता है? जब मेरी शादी श्रीकांत जी से हुई थी, तब मैं अपने कॉलेज की एथलेटिक्स चैंपियन थी। दिन भर ग्राउंड … Read more

“आँगन की छाँव”

शिखा अपनी माँ की बात सुनकर सन्न रह गई। उसे पहली बार एहसास हुआ कि मायका सिर्फ बेटियों के आरामगाह का नाम नहीं है। उसे याद आया कि कैसे पिछली बार उसने अंजलि को कितना परेशान किया था। सुमित्रा देवी ने बहुत ही शांति से अपनी बेटी को जीवन का एक बहुत बड़ा पाठ पढ़ा … Read more

स्वाभिमान की उड़ान: एक गृहणी की अनकही दास्तान

मीरा ने उनके पैर छुए और बहुत ही कोमलता से कहा, “माँ जी, अगर आप उस दिन मुझे उस गाजर के हलवे पर ताना न मारतीं, अगर आप मुझे यह एहसास न दिलातीं कि बिना कमाए इस दुनिया में कोई इज्जत नहीं है, तो शायद मैं अपनी डिग्रियों को अलमारी में दीमक लगने के लिए … Read more

एक रंगीन खामोशी

 उनका यह दर्द सुनकर मैं अवाक रह जाता था। एक पिता, जिसने अपनी बेटी को जन्म दिया, उसे पाला, वो आज उसके लिए मौत की भीख मांग रहा था। प्रतीक्षा सचमुच बहुत थकान भरी और असह्य होती है, और जब प्रतीक्षा मौत की हो, तो वह जिंदगी से भी ज्यादा भयानक हो जाती है। लेकिन … Read more

साँसों की वसीयत

माधव, जो उम्र के इस पड़ाव पर आकर थोड़े और भावुक हो गए थे, एक बच्चे की तरह जिद पर अड़ जाते। जैसे कोई छोटा बच्चा अपनी मनमानी करता है, वैसे ही वे सुलोचना को समझाते हुए कहते, “सुलोचना, मेरी बात समझने की कोशिश करो। तुमने जिंदगी भर मुझे सिर्फ खुशियाँ दी हैं। तुमने मुझे … Read more

परिश्रम का अजेय सिक्का

 अपनी सारी पीड़ा, दुकान जलने का दुख और परिवार की भुखमरी की हालत अपने भाई के सामने रख दी और हाथ जोड़कर कुछ रुपयों का कर्ज मांगा। विकास ने एक ठंडी सांस ली और व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “देखो रघु, आजकल हर दूसरे दिन कोई न कोई रिश्तेदार ऐसी ही मनगढ़ंत कहानी लेकर आ जाता … Read more

गुरूर की टूटती दीवारें और अपनों का प्यार

विक्रम ने कठोरता से कहा, “माफी मुझसे नहीं, पापाजी से मांगो नीलू । शायद वही तुम्हारे इस कठोर व्यवहार को माफ कर सकें, मैं तो नहीं कर सकता।” नीलू  ने महेश  जी के पैर कसकर पकड़ लिए, “पापाजी, मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई। मैं वचन देती हूं कि आज के बाद आपको मुझसे कभी … Read more

कच्चे धागों का अटूट बंधन

प्रकाश की ये बातें सुनकर मालती की आंखों से आंसुओं का बांध टूट पड़ा। उसने रोते हुए कहा, “बस कीजिए। एक शब्द और मत कहिएगा। माफी तो मुझे मांगनी चाहिए। पता नहीं मुझे क्या हो गया था जो मैं इतनी अंधी हो गई थी। मैं कैसे भूल गई कि इन मुश्किल हालातों में भी आप … Read more

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