आँगन की छाँव
आंचल की आँखों से झर-झर आँसू बहने लगे। उसने थाली को पास की मेज पर रखा और झुककर प्रमिला के पैर छूने लगी। प्रमिला ने तुरंत उसे ऊपर उठाया और अपने गले से लगा लिया। इस बार दोनों के आंसुओं में कोई दर्द नहीं था, बल्कि एक ऐसा पवित्र संतोष था जो शब्दों की सीमाओं … Read more