स्वाभिमान मेरा भी – गीता अस्थाना
पुरुष विहीना नारी का समाज में जीना मुश्किल सा हो जाता है। खास तौर पर तब जब वह साधारण मध्यम वर्ग से होती है। इज़्जत, मान सम्मान, प्रशंसा, निंदा इन सबका बोझ मध्यम वर्ग के कंधे या सिर पर रहता है। दूसरे शब्दों में मध्यम वर्ग इन्हीं मकड़जालों में फंसा रहता है। न वह ऊपर … Read more