ऐसी भाभी सबको मिले – कमलेश आहूजा

रिया अपने भाई रोहित के शहर में ही रहती थी,इसलिए हर रविवार मायके आना उसका जैसे नियम बन गया था। माँ के जाने के बाद मायके की सारी जिम्मेदारी उसकी छोटी भाभी नेहा ने अपने ऊपर ले ली थी। नेहा ने कभी उसे ननद समझकर नहीं, बल्कि अपनी बड़ी बहन की तरह सम्मान और प्यार … Read more

भाभी हो तो ऐसी! – श्वेता अग्रवाल

दरवाजे की घंटी बजी, और जैसे ही माला देवी ने दरवाजा खोला, सामने का नजारा देखकर उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। सामने उनकी बहू सिया उनकी बेटी अवनी को लिए खड़ी थी। अवनी के माथे से खून बह रहा था, उसके होंठ कटे हुए थे और चेहरे तथा हाथ-पांव पर चोट के नीले-काले … Read more

भाभी की चिट्ठी – गीता वाधवानी

 यह मैं क्या सुन रहा हूं, बड़े भैया अपनी साली ज्योति से शादी कर रहे हैं?   छोटे भाई सौरभ ने बड़े भाई दीपेश को फोन लगाया और पूछा-” भैया लोग यह क्या बातें कर रहे हैं, क्या सचमुच आप ज्योति से शादी कर रहे हो? ”   दीपेश ने कहा -हां!   सौरभ -” (सौरभ की भाभी … Read more

मेरी भाभी जैसी भाभी किसी की नहीं है – मंजू ओमर

कविता सौदामिनी का हाथ अपने हाथ में लेकर कस के थामे हुए थी।कविता जोर-जोर से रो रही थी।।अस्पताल की बिस्तर पर पडी सौदामिनी जिंदगी की अंतिम सांसे ले रही थी ,उसके पास  समय नहीं था पता नहीं कितना समय बचा था एक दिन दो दिन एक घंटा या एक क्षण कुछ पता  नहीं था । … Read more

ऐसी भाभी सबको मिले – सुदर्शन सचदेवा

“भाभी… एक बात पूछूँ?” “हाँ, पूछ न।” “अगर कभी मैं आपको छोड़कर चली गई, तो आप मुझे याद करेंगी?” भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, “पगली! तू घर से विदा होगी, मेरे दिल से थोड़ी।” इतना सुनते ही ननद की आँखें भर आईं और वह भाभी के गले लग गई। यह रिश्ता भले ही खून का … Read more

राह के मोड़ पर बंधी उम्मीद

 जिंदगी के रास्ते अक्सर अनजाने मोड़ों पर ही जुड़ते हैं। अवनि, जो खुद को तन्हा और लाचार समझती थी, उसे रिश्तों का एक नया संसार मिल गया था। और समर, जो निराशा के दलदल में डूब चुका था, उसे अपने आत्मसम्मान और मेहनत के बल पर एक नई जिंदगी मिल गई थी। मुश्किलें कितनी भी … Read more

फरेब की दीवार

 ओंकारेश्वर जी ने आगे बढ़कर सिद्धांत और अनन्या दोनों के सिर पर हाथ रखा और भावुक होकर कहा, “लोग कहते हैं कि बेटियां पराया धन होती हैं और शादी के बाद रिश्ते बदल जाते हैं। लेकिन आज मुझे गर्व है कि मेरी बेटियों ने मुझे दुनिया का सबसे अमीर पिता बना दिया है। मेरे पास … Read more

माँ का डर

 तान्या ने माँ के आंसू पोंछते हुए कहा, “माँ, आप गलत नहीं थीं। आपका डर अपनी जगह सही था क्योंकि आप दुनिया की नजरों से मुझे बचाना चाहती थीं। लेकिन पापा और भैया ने जो मुझे उड़ने का हौसला दिया, उसने मुझे कभी कमजोर नहीं बनाया। जब अपनों पर आंच आती है न माँ, तो … Read more

सरहद की सांध्यवेला

 अवनि छत के एक कोने में अपनी पूजा की थाली लिए जड़वत खड़ी थी। उसकी छलनी हाथ में थी, पर उसकी आँखें पूरी तरह बंद थीं। पलकों की कोर से गर्म आँसू ढुलक कर उसके गालों पर सज चुके सिंदूर को भिगो रहे थे। वह उस आसमानी चाँद को कैसे देखती? उसका अपना चाँद, उसका … Read more

सोने का कंगन

आलोक ने तुरंत सुहासिनी को सहारा देकर उठाया और अपने सीने से लगा लिया। उस आलिंगन में सारे शिकवे, सारी कड़वाहट और सारा खोखलापन धुल गया। सुहासिनी ने छलनी उठाई, पहले बादलों के बीच चमकते पूनम के चांद को देखा और फिर उसी छलनी की छांव में अपने जीवन के सबसे बड़े सत्य—अपने पति आलोक … Read more

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