वक्त की मार – खुशी

राजन एक स्मार्ट हैंडसम लड़का था।सिटी बैंक में मुंबई ब्रांच में नौकरी करता था।  माता सीमा और पिता योगेश दोनो govt employee थे।पिता योगेश आईजी ऑफिस में थे और मम्मी bhel में थी।एक बहन थी श्रेया जो डेवलपर का कोर्स कर रही थी।भोपाल शहर में अपना 500 गज में कोठी बनी थी। मां बाप को … Read more

**भ्रम के साये: एक पिता का मौन और बेटी की नादानी** – विनीता सिंह 

 शिवानी , जो अपने पिता के निस्वार्थ प्यार को भूलकर रोहन के झूठे आंसुओं पर पिघल गई थी, उसने हामी भर दी। रोहन ने उसे हिदायत दी कि वह घर से निकलते वक्त अपनी माँ के गहने और कुछ नकदी जरूर साथ ले आए, ताकि शुरुआत के कुछ दिन वे आराम से काट सकें।  शहर … Read more

फासलों के पुल: जब एक सास ने निभाया माँ का धर्म – सविता गर्ग 

 “माँ जी, मुझे माफ़ कर दीजिए। मुझे पता है आज मैंने आपको बहुत तकलीफ दी है,” मीरा सुबकते हुए कह रही थी। “सिद्धार्थ मुझे आज एक कैफे में ले गया था। उसने मुझसे वही बात कही जो उसने अभी आपसे कही। लेकिन माँ जी… मैंने उसे मना कर दिया है। मैंने सिद्धार्थ से साफ कह … Read more

सिंदूर की लाज – मीना सहाय

राघव ने तुरंत उठकर उसे अपने कंधों से पकड़ लिया। “नहीं मीरा, तुम में कोई कमी नहीं है। तुम मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी नेमत हो। लेकिन तुम खुद को देखो! तुम सुबह से लेकर रात तक इस घर की चक्की में पिसती रहती हो। माँ की हालत ऐसी नहीं है कि वो तुम्हारी कोई … Read more

समर्पण का आँगन – कविया गोयल

अंशुल ने विमला देवी की तरफ देखा कि शायद वो एक माँ होने के नाते इस दर्द को समझेंगी, लेकिन विमला देवी भी अपनी जेठानी के दबाव में चुप रहीं। अंशुल रोता हुआ, अपनी बहन की उजड़ती हुई दुनिया का बोझ सीने में लिए वहां से चला गया। एक बहुत ही शानदार और प्यार से … Read more

*वक्त की मार* – तोषिका

ऐसे ही चलता रहा ना तो इस *वक्त की मार* में पीछे रह जाओगे और सब तुम्हारे आगे निकल जाएंगे। बचपन से यही सुनता आ रहा हू, और मानता आ रहा हू पर इस भेड़ चाल के चलते मैने अपना सब कुछ पीछे छोड़ दिया, सही कहते है लोग कि वक्त किसी का अपना नहीं … Read more

कल क्या हो जाए किसको खबर।। – अंजना ठाकुर

निधि शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी की बेटी थी बचपन से ही हर मांग पूरी होने पर उसके मन में यही बस गया कि खुशी सिर्फ पैसों से मिलती है रिश्तों की कद्र करना सीखा नहीं और ना देखा क्योंकि पापा व्यवसाय बढ़ाने में लगे रहते और मां सामाजिक कार्य और पार्टी में अपना समय गुजारती … Read more

वक्त की मार – मधु वशिष्ठ

बहुत समय बाद भावना को एक सेमिनार के सिलसिले में दिल्ली आना पड़ा। पूरी रात मां के साथ पुरानी यादें ताजा करते रहे। क्योंकि सेमिनार पुराने घर के पास था, और भावना ने विचार बनाया था कि वह ताई जी ताऊ जी से मिलकर ही सेमिनार स्थल पर जाएगी।      रह रहकर बचपन का वह समय … Read more

“जब एक भूल ने छीन लिया मायके का आँगन” – वैशाली आडेसरा

सुबह की नीरव शांति में भी जैसे बिखरे शब्द निशा के कानों में गूंज रहे थे— “ससुराल चली गई हो, तो अब मायके की चिंता तुम्हें क्यों होगी? हमारा जो हो, सो हो… तुम्हें क्या?” निशा की बात, उसकी सफाई—कुछ भी सुना नहीं गया। एक झटके में जैसे उसका मायके का आँगन उससे छीन लिया … Read more

मेरे आसुंओं की कीमत तो चुकानी पड़ेगी – मंजू ओमर 

सामने गायत्री जी का पार्थिव शरीर पडा था और विमला फूटफूटकर रो रही थी। अंतिमयात्रा की तैयारियां चल रही थी। वही गायत्री देवी के पार्थिव शरीर से थोड़ी दूर पर गायत्री के दोनों बहू बेटे बैठे थे। बहुए नकली रोने का ढोंग कर रही थी और बड़े बहू और बेटे की आखों मे तो तनिक … Read more

error: Content is protected !!