तीसरी दस्तक: किस्मत का फैसला – रीता मक्कड़

  सरिता रसोई में बड़े ही जतन से दही और चीनी मिला रही थी। बाहर हॉल में चहल-पहल थी। आज उनकी सबसे छोटी बेटी, ईशानी, अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि की ओर कदम बढ़ाने वाली थी। वह आज शहर के जिला अस्पताल में ‘चीफ मेडिकल ऑफिसर’ के रूप में अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने वाली थी। … Read more

परिवार को जोड़े रखने की इच्छा ही परिवार बनाती है। – अंजना ठाकुर

रागिनी एक मिलनसार लड़की थी जरूरत पर सबके काम आना और आगे बढ़कर मदद करना उसकी आदत मैं शामिल था उसकी सहेली कहती आजकल ज़माना नहीं है बिना मतलब मदद करने का तू क्यूँ लगी रहती अपने काम से काम रख, पर रागिनी पर कुछ असर नहीं होता। रागिनी के घर मैं बड़ा भाई और … Read more

“परिवार की गर्माहट ” – कमलेश आहूजा

“बेटा,ले थोड़ा थोड़ा सरसों का साग अपने दोनों भाई भाभी को भी देकर आ।उन लोगों को मेरे हाथ का सरसों का साग बहुत पसंद है।”माँ की बात सुनकर नेहा को गुस्सा आ गया।बोली-“अब जब दोनों बहु बेटों ने अपनी अलग रसोई बना ली है तो फिर आप उनकी पसंद न पसंद का क्यों ख्याल रखती … Read more

परिवार – डाॅ संजु झा

परिवार मनुष्य की जिंदगी का वह मजबूत छत है,जिसके नीचे वह सुकून से रहता है। जिसे परिवार का सहयोग मिलता है,वह जिंदगी में असंभव को भी संभव बना लेता है। भोली-भाली राम्या की जिंदगी परिवार के सहयोग  के कारण  दूसरों के लिए उदाहरण बन गई।  राम्या की नौंवी की परीक्षा खत्म हो चुकी है।शाम के … Read more

*परिवार* – तोषिका

“ये घर, घर नहीं जेल लगता है और अगर मैं इस घर में थोड़ी देर और रही तो पता नहीं क्या हो जाएगा।” गुस्से में बिलबिलाती रिया बोली। तभी उसके ये शब्द सुनकर उसका पति कृष बोला “ये तुम क्या कह रही हो, ये घर तुम्हे जेल कब से लगने लगा?” “जब से इस घर … Read more

परिवार – खुशी

रजत का परिवार बहुत बड़ा था।दो ताया,चाचा बुआ दादा दादी सब एक साथ रहते थे।मिलजुल कर काम करना घूमना फिरना सब जुड़े रहते।रजत के दादाजी दीनानाथ एक सरकारी मुलाजिम थे उनकी पत्नी रत्ना एक सम्पन्न परिवार की लड़की थी।बस दीनानाथ की सरकारी नौकरी और शराफत देख उनका विवाह हो गया।फिर उनके 8 बच्चे हुए । … Read more

परिवार – गीता अस्थाना

विवाहोत्सव समाप्त हुए एक महीना बीत चुका था। मेहमान तो विवाह संपन्न होने के तुरंत बाद ही चले गए थे। घर के आत्मीय सदस्य भी परिवार सहित धीरे धीरे अपने अपने कार्यस्थल पर चले गए। नई नवेली होने के बावजूद नमिता काफी व्यस्त रही। सबके जाने के बाद नमिता को कुछ सुकून महसूस हुआ। उसके … Read more

परिवार – करुणा मालिक 

शांति काकी……जरा देखना, बाहर गुड़िया को….बकरियों और भेड़ों की आवाज आ रही है, मेरी मीटिंग चल रही है। सौम्या ने अपने कंप्यूटर को म्यूट करके अपनी घरेलू सहायिका शांति को आवाज लगाते हुए कहा क्योंकि वह जानती थी कि उसकी दो साल की बेटी बकरियों की आवाज सुनकर बाहर की तरफ भागती है और अगर … Read more

राधिका का संघर्ष – भारती अनिल सोनी

राधिका आज बहुत खुश थी,, आज उसकी सालों की मेहनत सफल हुई थी। उसके इतने सालों के संघर्ष का अब अंत करीब था । उसकी बेटी अनुभा का आज डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हो गया था । अनुभा पिछले 3 सालों से आई ए एस अधिकारी की परीक्षा दे रही थी पर आज … Read more

*घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है* – तोषिका

“*घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है* समझा तू। जो तू मुझे पैसों का बोल रहा है ना, मैं सब जानती हू। मुझे ना तेरी सलाह की कोई जरूरत नहीं है।” मिहिर का सामान बाहर फेंकते हुए उसकी मां रानी बोली और अपने घर का दरवाज़ा बंद कर दिया। बस उस बंद कमरे की … Read more

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