समझौता – सीमा सिंघी

आंगन में धूप खिलाई थी। ऐसे भी जाड़े की धूप बड़ी भली लगती है इसीलिए ललिता जी अपने हाथों में एक प्याली चाय की लेकर बाहर खुले आंगन में लगी हुई सोफा पर आकर बैठ गई और इत्मीनान से पीने लगी।  अब धीरे धीरे बालों की सफेदी ने भी उनसे थोड़ा बहुत आंख मिचौली का … Read more

” मैं से हम तक ” – कमलेश आहूजा

शाम का समय था।रिया और रोहित ने जैसे ही घर में प्रवेश किया,सुषमा की आँखों में चमक आ गई।आज उनकी शादी की पहली सालगिरह थी।दोनों ने मुस्कुराते हुए आगे बढ़कर सुषमा के चरण स्पर्श किए।सुषमा ने दोनों को गले से लगा लिया और स्नेह से कहा, “बहुत खुश रहो बच्चों,हमेशा एक-दूसरे का हाथ थामे रखना … Read more

समझौता नहीं,समन्वय – शुभ्रा बैनर्जी

शुचिता जब ब्याह कर ससुराल आई,तब उसे अपने आप को नए परिवेश में ढालने में समय लगा। मायके में सबसे बड़ी और लाड़ली बेटी।पढ़ने में सदा अव्वल,सुंदर और सुशील।दादी तो तब आशीर्वाद देतीं थीं जब शुचिता पांचवीं कक्षा में थी”महारानी बनकर राज करेगी मेरी मोना।” शुचिता ने रानी बनने के ख्वाब तो नहीं देखे थे, … Read more

समझौता – खुशी

विकास और पूनम की शादी को पंद्रह साल हो चुके थे। पंद्रह साल… इतना लंबा समय कि इंसान किसी रिश्ते को निभाते-निभाते खुद को भूल जाए। पूनम ने भी खुद को भुला दिया था। शादी के शुरुआती दिनों में उसे लगता था कि विकास एक दिन समझ जाएगा। वह जिम्मेदार बनेगा, नौकरी करेगा, परिवार की … Read more

समझौता नहीं समझदारी – गीता वाधवानी

 “पल्लवी क्या हुआ बड़ी थकी थकी और उदास सी लग रही हो “अपनी टेबल पर काम कर रही पल्लवी से उसकी कलीग तारा ने पूछा। तारा उसकी फ्रेंड भी थी और कलीग भी।   पल्लवी-” अरे यार कुछ नहीं, बस वही रोज-रोज का समझौता,एडजेस्ट कितना करूं और कब तक करूं, ऐसे कैसे चलेगा? ”   तारा-” चल … Read more

समझौते की आखिरी सीमा – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका‘

सुबह के सात बज रहे थे। रसोई में चाय की महक के साथ प्रेशर कुकर की सीटी घर के सन्नाटे को तोड़ रही थी। रिया जल्दी-जल्दी नाश्ता तैयार कर रही थी। सामने रखे मोबाइल पर ऑफिस से लगातार संदेश आ रहे थे। आज उसकी जिंदगी का एक बड़ा दिन था। पिछले छह महीने से जिस … Read more

समझौता – डॉ. हिमानी बंसल

निहारिका अपने मायके में माँ-बाप की लाडली और भाई-बहनों की प्यारी थी। माता-पिता ने उसे फूलों की तरह संभालकर रखा था। उसके जीवन में दुख की छाया तक नहीं पड़ी थी। दादाजी तो उसे अपनी आँखों का तारा मानते थे। जब उसके विवाह की बात चली तो दादाजी ने रायपुर के एक बड़े और प्रतिष्ठित … Read more

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