सादगी का स्वाद
“अब क्या होगा? वो लोग आ गए,” सुनीता के हाथ-पैर ठंडे पड़ रहे थे। “राजीव, मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा। मैं क्या मुंह दिखाऊंगी उन्हें?” “हिम्मत रखो सुनीता, जो होगा देखा जाएगा। अब दरवाज़ा तो खोलना ही पड़ेगा,” राजीव जी ने खुद को संभालते हुए दरवाज़ा खोला। सामने आनंद जी और रमा जी … Read more