शातिर – गीता वाधवानी

मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं पता है ना तुम्हें नमन, रूप ने कहा।   नमन-” हां मैं भी करता हूं ”   रूप -” तो फिर मेरे मम्मी पापा से शादी की बात करो ना, मैं कुछ नहीं कह सकती अपने पापा से, तुम्हें पता है ना वह कितने गुस्से वाले हैं। ”   नमन -” नहीं … Read more

दोहरे चेहरे – खुशी

रंजिता जी आ गई इतनी बड़ी सेविका है।औरतों और बच्चों का वो भी लड़कियों का कितना ध्यान रखती हैं।इनके परिवार में कौन कौन है? एक बेटा राघव उसकी पत्नी शमा और दो पोते विराज और मिहिर प्यारा सा परिवार है।इनके पति कैलाश नाथ जी का कुछ अरसे पहले ही निधन हो गया बीमार रहते थे। … Read more

अधिकार

विवान ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “हां, मैं मान गया कि हक मांगना कोई गलत बात नहीं है। आखिर कानून भी कहता है कि संपत्ति में बराबरी का अधिकार होना चाहिए। लेकिन सौम्या, एक बात बताओ, यह बराबरी का अधिकार सिर्फ बेटों तक ही सीमित क्यों रहे?” सौम्या की मुस्कान थोड़ी फीकी पड़ी। … Read more

दो पीढ़ियों का रिश्ता

लंदन की सर्द और भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, जब कार ने बनारस की संकरी और जानी-पहचानी गलियों में प्रवेश किया, तो कबीर के चेहरे पर एक अजीब सी सुकून भरी मुस्कान तैर गई। कबीर और उसकी पत्नी मायरा शादी के तीन साल बाद पहली बार भारत आ रहे थे। मायरा वैसे तो भारतीय मूल … Read more

बाबूजी का आत्मसम्मान

लाल सुर्ख जोड़े में सजी, माथे पर भारी मांगटीका और हाथों में रची गहरी मेहंदी के बीच वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। पर उसकी आँखों में वो चमक नहीं थी जो एक दुल्हन की आँखों में होनी चाहिए। मोबाइल की स्क्रीन पर वीडियो कॉल चालू था। स्क्रीन के दूसरी तरफ समीर … Read more

पागल भाई

राघव के घर के आंगन में आज सुबह से ही एक उदासी भरा सन्नाटा पसरा हुआ था। आज उसकी माँ की पहली बरसी थी। घर में रिश्तेदारों और पंडितों की आवाज़ें तो गूंज रही थीं, लेकिन वो पुरानी रौनक कहीं खो सी गई थी जो माँ के होने से हुआ करती थी। राघव की बड़ी … Read more

नयी उड़ान, नयी पहचान

“दुनिया का काम है कहना, दादी,” आयुष ने मुस्कुराते हुए कहा। “सोचिए, जब कल को मेरी शादी होगी और मेरी पत्नी भी स्नेहा दीदी की तरह नौकरी करके थकी हारी घर आएगी, तो क्या मुझे उसे चाय बनाकर नहीं पिलानी चाहिए? क्या आप नहीं चाहेंगी कि आपके पोते की पत्नी को वो आराम और सम्मान … Read more

दो शरीर और एक आत्मा

निधि जब इस घर में बहू बनकर आई थी, तो उसे सबसे ज्यादा हैरानी अपने सास-ससुर का आपसी तालमेल देखकर हुई थी। उसके ससुर जी, यानी पंडित विद्याधर, अपने जमाने के प्रखर विद्वान और यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे थे। उनकी कुशाग्र बुद्धि, अनुशासन और दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि घर के तीनों बच्चे आज … Read more

माँ का हृदय

सुमित्रा जी की आंखों में अब हल्के से आंसू तैरने लगे थे, लेकिन वो दुख के नहीं थे। उन्होंने कांता का हाथ पकड़कर कहा, “तू नहीं समझेगी कांता। अगर वो मांगता, तो मैं चारों अंगूठियां एक साथ उतार कर दे देती। लेकिन फिर वो दोबारा कभी नहीं आता। उसने चोरी की है, वो जानता है … Read more

सास का तजुर्बा

नंदिनी अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ी होकर बाहर लॉन में बिखरी सुबह की सुनहरी धूप को देख रही थी। उसके हाथों में रची गाढ़ी लाल मेहंदी अभी भी उसकी शादी की गवाही दे रही थी। महज़ तीन दिन पहले ही तो वह अपने पिता के घर की चौखट लांघकर इस नए घर में … Read more

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