देवदूत: जब अजनबियों ने बाँध ली ज़िंदगी की डोर
जिंदगी कभी-कभी ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर देती है जहाँ इंसान की सोचने-समझने की सारी ताकत शून्य हो जाती है। जब भी उस मनहूस दोपहर की याद कौंधती है, मेरी रूह तक कांप उठती है। यह बात तब की है जब मेरे घुटनों और रीढ़ की हड्डी में गंभीर समस्या आ गई थी। चलने-फिरने … Read more