उधार का नसीब – विकास श्रीवास्तव 

बरसात की एक ठंडी रात थी। दस वर्षीय अमन अपनी बीमार माँ के सिरहाने बैठा था। घर में खाने का एक दाना भी नहीं था। माँ कई दिनों से बीमार थी और दवा के बिना उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। अमन हिम्मत करके गाँव की किराने की दुकान पर पहुँचा। उसने दुकानदार से कहा, … Read more

बेस्ट ड्राइंग – लतिका श्रीवास्तव

ऑफिस से लौटते ही अनुराग ने पंखा फुल स्पीड पर चलाया और सोफ़े पर मोबाइल लेकर पसर गया। “आशी, ज़रा जल्दी चाय बना दो। आज ऑफिस में बहुत काम था… जान ही निकल गई।” आशी भी उसी के साथ ऑफिस से लौटी थी। उसने मुस्कुराकर पहले अनुराग को पानी दिया, फिर स्कूल से लौटे बच्चों … Read more

गुस्सा सबकुछ बर्बाद कर देता है – मंजू ओमर

हेलो मम्मी मैने तुम्हारा टिकट करा दिया है तुम आ रही हो ना श्रेयश बोला मम्मी से, बेटा तुमने सिर्फ हमारा टिकट करवाया है पापा का नहीं । हम उनको अकेला छोड़कर कैसे आ सकते हैं परेशानी होती है उनको समझा करो बेटा। लेकिन मम्मी आप जानती तो हो पापा को संग मेरी पटरी नहीं … Read more

रिश्तों में कड़वाहट

माधवी बुआ की बात खत्म होते ही पूरा कमरा जैसे एक गहरे चिंतन में डूब गया। जिन औरतों ने जिंदगी भर खुद को एक संदूक बनाए रखा था और अपने अंदर अनगिनत दर्द और ताने छुपाए रखे थे, आज उन्हें अहसास हो रहा था कि माधवी बुआ कितने बड़े जीवन सत्य को कितनी आसानी से … Read more

सैंडविच जनरेशन’

सुधा जी ने अपनी साड़ी के पल्लू से आँखें पोंछते हुए कहा। “याद है आपको जब मेरी शादी होकर बनारस आई थी? अम्मा जी (रामनाथ जी की माँ) का कितना कड़ा अनुशासन था। सुबह चार बजे उठकर पूरे घर का आंगन लीपना, चूल्हे पर सबके लिए रोटियां सेंकना। मजाल है जो कभी अपनी मर्जी से … Read more

तरक्की की अंधी दौड़

सिद्धार्थ के हाथ से सूटकेस छूट कर ज़मीन पर गिर पड़ा। वह लिफ़ाफ़ा और चूड़ियाँ सीने से लगाए, घुटनों के बल वहीं ज़मीन पर बैठ गया और अपने पिता के पैरों पर सिर रखकर फूट-फूट कर रोने लगा। आज उसे अपनी पढ़ाई, अपनी नौकरी और अपनी हैसियत, अपने उस कमज़ोर पिता के फटे हुए कुर्ते … Read more

रिश्तों की नई बुनियाद

समीर ने आँखों ही आँखों में रजत को इशारा किया कि लड़की बहुत अच्छी है। माँ का चेहरा भी खुशी से दमक रहा था। अंजलि के पिता ने भी रिश्ते के लिए अपनी रजामंदी दे दी। लौटते वक्त कार में सब बहुत खुश थे। रजत खिड़की के बाहर देख रहा था। उसे महसूस हो रहा … Read more

प्यार और वो एहसास

“आप इतने बदल कैसे गए? मेरा मतलब है… मैंने कभी सोचा नहीं था कि आप मेरा इतना खयाल रखेंगे। मुझे तो लगता था कि आपको कोई फर्क ही नहीं पड़ता कि मैं हूं या नहीं।” विवान के हाथ पल भर के लिए रुक गए। उसने गहरी सांस ली और सुमेधा की आंखों में देखते हुए … Read more

बाबूजी

नंदिनी के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं।  उसकी शादी को अभी महज़ छह महीने ही हुए थे और वह अपने पति विवान के साथ इस नए शहर, इस नए घर में आई थी। विवान पेशे से एक सर्जन था और आज अस्पताल में एक बेहद क्रिटिकल इमरजेंसी आ गई थी। … Read more

इंसानियत का असली पैमाना

“मम्मा, वो पुराने जूते तो घर की अलमारी में सुरक्षित रखे हैं ना? लेकिन उस दादी के पैर तो अभी जल रहे थे। क्या वो तपती हुई सड़क मेरे पुराने जूतों के आने का इंतज़ार करती? और मम्मा, आप ही तो कहती हो कि भगवान को हमेशा ताजे फूल और सबसे अच्छी चीज़ चढ़ानी चाहिए। … Read more

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