बेटी-जंवाई तो मेहमान हैं – शुभ्रा बैनर्जी

ख़ुद के घर में रश्मि ने मां-पापा से यही सीखा था कि,घर की जिम्मेदारी भाई-बहनों की साझी होती है। बेटे और बेटी की परवरिश,पढ़ाई और खान-पान में कभी मतभेद करते नहीं हैं मां -बाप,तो उनके प्रति ,उस घर के प्रति जिम्मेदारी से मुंह कैसे मोड़ सकती हैं बेटियां। तब दादी कहतीं मां से”जमाना कितना भी … Read more

*बेटा-बहु तो अपने ही होते हैं* – तोषिका

*बेटा – बहु तो अपने ही होते है*। तुम्हारी मां के मुंह से ये वाक्य सुन सुन के मैं थक गया था। लेकिन तुम्हारी मां को अपनी औलाद पर इतना भरोसा था कि उसने मेरी एक ना सुनी। चिल्लाते हुए रमेश अपने बेटे रवि और दूर खड़ी बहु समीना को बोला। रवि कुछ बोले उस … Read more

बेटा – खुशी

निर्मला जी के दो बच्चे थे। धीरेन और दृष्टि।धीरेन बड़ा था जब वो दो साल का था तो पिता की नौकरी छूट जाने के कारण वो जमशेदपुर से दिल्ली आ गए।निर्मला का जमशेदपुर में भरा पूरा परिवार था। मां बाप ,बहने भाई पड़ोस में ही मां का पूरा परिवार रहता था।बचपन से निर्मला लाडो में … Read more

अपने हुए पराए  – मधु वशिष्ठ

 हेलो दीदी, सोनम दी के बारे में कुछ पता पड़ा? नहीं ,मेरे से भी काफी समय से कोई बात नहीं हुई, उसका फोन भी स्विच ऑफ ही जा रहा है। “परमात्मा करे सब ठीक हो”। सारी बहनें आपस में फोन करके सोनम दी के बारे में बातें जरूर कर रही थी, लेकिन मन सब का … Read more

उम्मीद का नया सवेरा – मधु वशिष्ठ

पापा, आप तो कह रहे थे कि प्रिया को  मम्मी जैसा अच्छा खाना बनाना आता है।  गट्टे की‌ सब्जी और साग तो वह मम्मी से भी अच्छा बनाती है।  यहां तो हालत यह है कि सवेरे की चाय अभी भी मैं ही बनाता हूं। हम तो सोच रहे थे की मां के जाने के बाद … Read more

गर्व – बिमला रावत जड़धारी

काव्य आज बहुत खुश थी। जिसका सपना मैंने देखा था, उसे सुभाष ने पूरा करने में मेरा पूरा साथ दिया।सुभाष मेरे पति को पता चला कि मुझे पेंटिंग बनाने का बहुत शौक है और मैं बहुत अच्छी पेंटिंग बनती हूॅं। मेरी इच्छा है किसी आर्ट गैलेरी में मेरी बनाई पेंटिंग की प्रदर्शनी लगे।उन्होंने मुझे कभी … Read more

*अभिमान* – तोषिका

ये कहा से रोने की आवाज़ें आ रही है? क्या तुम्हे भी सुनाई दे रही है नितिन? परेशान स्वर में गायत्री बोली। नितिन बोला “आवाज़ तो मुझे भी आ रही है, पर इतनी रात गए, अंधेरे में आवाज कहा से आ रही है पता ही नहीं चल रहा। दोनों आवाज को सुनते सुनते एक कूड़े … Read more

“बेटा-बहू तो अपने होते हैं…” – खुशबू गर्ग

सावित्री देवी का छोटा-सा घर था, लेकिन उसमें यादों और रिश्तों की गर्माहट भरी हुई थी। पति के गुजर जाने के बाद उनका सहारा सिर्फ उनके दो बच्चे थे—बेटा रोहित और बेटी पूजा। पूजा की शादी हो चुकी थी और वह अपने ससुराल में खुश थी, जबकि रोहित अपनी पत्नी नेहा के साथ माँ के … Read more

काश !हम भी पराए होते ।। – अंजना ठाकुर

किशन  मां के कमरे में आया तो देखा मां मुक्ता के सर में तेल लगा रही है ठीक वैसे ही जैसे बचपन में लगाती थी देखकर  किशन बोला मां मेरे सर में भी लगाओ ना मां , मां बोली अरे तू तो बहू से लगवा लेना अब मेरा इतना शरीर नहीं चलता वो तो मुक्ता … Read more

सुयोग्य बहू की तलाश – साधना वैष्णव

गौरव आज बहुत खुश है। खुश क्यों न हो उसे आज पहली तनख्वाह जो मिली है। वह खुशी-खुशी लगभग दौड़ता हुआ माँ के पास पहुँचा। उनको अपनी आँखें बंद करने कहा। माँ बोलीं- क्यों? मैं अभी संध्या आरती की तैयारी कर रही हूँ, मेरे पास तुम्हारे साथ खेलने के लिए समय नहीं है।         गौरव ने … Read more

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