उधार का नसीब – विकास श्रीवास्तव
बरसात की एक ठंडी रात थी। दस वर्षीय अमन अपनी बीमार माँ के सिरहाने बैठा था। घर में खाने का एक दाना भी नहीं था। माँ कई दिनों से बीमार थी और दवा के बिना उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। अमन हिम्मत करके गाँव की किराने की दुकान पर पहुँचा। उसने दुकानदार से कहा, … Read more