समीर ने आँखों ही आँखों में रजत को इशारा किया कि लड़की बहुत अच्छी है। माँ का चेहरा भी खुशी से दमक रहा था। अंजलि के पिता ने भी रिश्ते के लिए अपनी रजामंदी दे दी। लौटते वक्त कार में सब बहुत खुश थे। रजत खिड़की के बाहर देख रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि जिंदगी कितने अजीब तरीके से चलती है। एक तरफ वो था जिसने दोस्ती के नाम पर सिर्फ धोखा और खौफ दिया था, और दूसरी तरफ समीर था जिसने बिना किसी खून के रिश्ते के, सिर्फ अपने प्यार और समर्पण से पूरे परिवार को जोड़कर रखा था।
शहर की भागदौड़ से दूर, ऑफिस के कैफेटेरिया के एक शांत कोने में समीर अपनी कॉफी का कप पकड़े हुए खिड़की के बाहर घूर रहा था। तभी अचानक पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। वह रजत था। रजत के चेहरे पर आज एक अजीब सी चमक थी, ऐसी चमक जो अक्सर किसी बड़ी खुशी या गहरी उलझन के समय ही दिखाई देती है। समीर ने मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या बात है, आज जनाब के चेहरे पर इतनी रौनक कैसे है। रजत ने एक गहरी साँस ली और कुर्सी खींचकर उसके ठीक सामने बैठ गया। उसकी आँखों में एक अजीब सी कशमकश थी। उसने बताया कि माँ ने उसके लिए एक रिश्ता देखा है और वे चाहती हैं कि वह अब शादी कर ले।
समीर के चेहरे पर एक चौड़ी मुस्कान फैल गई। उसने रजत को चिढ़ाते हुए कहा कि यह तो बहुत अच्छी खबर है, इसी बहाने घर में एक नई सदस्य आएगी और उसे तथा छोटी बहन नेहा को एक प्यारी सी भाभी मिल जाएगी। लेकिन रजत की घबराहट कम नहीं हो रही थी। उसने हिचकिचाते हुए समीर का हाथ पकड़ा और कहा कि उसे कल शाम को लड़की वालों के घर जाना है, लेकिन वह अकेला नहीं जा सकता। उसे समीर का साथ चाहिए। समीर ने थोड़ी हैरानी से कहा कि वह वहाँ जाकर क्या करेगा, यह तो परिवार का मामला है। लेकिन रजत के लिए समीर सिर्फ एक दोस्त नहीं था, वह उसके परिवार का सबसे अहम हिस्सा था।
रजत की आँखें अचानक भर आईं। कैफेटेरिया का शोर जैसे उन दोनों के लिए कहीं दूर चला गया था। रजत ने भारी आवाज में कहा कि एक वक्त था जब उसे ‘दोस्त’ शब्द से ही नफरत हो गई थी। वह मन ही मन उस खौफनाक अतीत में चला गया जिसने उसके परिवार की शांति छीन ली थी। कुछ साल पहले, रजत का एक बहुत करीबी दोस्त हुआ करता था, विकास। विकास पर रजत ने आँख मूंदकर भरोसा किया था, लेकिन विकास ने न सिर्फ व्यापार में उसे धोखा दिया, बल्कि जब रजत ने उसका विरोध किया, तो उसने अपनी नीचता की सारी हदें पार कर दीं। एक शाम जब रजत की छोटी बहन नेहा अपने कॉलेज से लौट रही थी, तो विकास के भेजे हुए कुछ गुंडों ने उसे बीच रास्ते में घेर लिया था। वह मंजर रजत के परिवार के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था।
लेकिन उस खौफनाक शाम में, जब नेहा खौफ से कांप रही थी और कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था, तब समीर वहाँ से गुजर रहा था। समीर ने बिना अपनी जान की परवाह किए उन गुंडों का अकेले ही सामना किया। उस हाथापाई में समीर को गहरी चोटें आई थीं, उसके माथे से खून बह रहा था, लेकिन उसने नेहा पर एक खरोंच तक नहीं आने दी। उसने एक ढाल बनकर नेहा की हिफाजत की और उसे सुरक्षित घर तक पहुँचाया। उस दिन के बाद से, रजत की माँ ने समीर को अपना दूसरा बेटा मान लिया था और नेहा को एक ऐसा बड़ा भाई मिल गया था जिस पर वह रजत से भी ज्यादा भरोसा करती थी।
रजत ने समीर की आँखों में देखते हुए कहा कि उस हादसे के बाद अगर कोई इंसान था जिसने उसे दोबारा इंसानों पर भरोसा करना सिखाया, तो वह समीर ही था। समीर ने रजत की बात बीच में ही काट दी। उसने बहुत ही शांति और दृढ़ता से कहा कि उसने उस दिन कोई महान काम नहीं किया था। नेहा उसकी भी छोटी बहन है, और अगर कोई उसकी बहन की तरफ आँख उठाकर भी देखेगा, तो वह उसकी आँखें नोच लेगा। समीर के लहजे में जो अपनापन और अधिकार था, उसने रजत की सारी चिंताओं को पल भर में दूर कर दिया। समीर ने कहा कि एक भाई होने के नाते यह उसका फर्ज था और इस बात को बार-बार दोहराकर रजत उसे शर्मिंदा न करे।
रजत मुस्कुराया और उसने कहा कि इसीलिए माँ ने उसे सख्त हिदायत दी है कि कल लड़की देखने जाने से पहले समीर को आज शाम घर आना होगा। माँ ने साफ कह दिया है कि समीर की रजामंदी के बिना घर में कोई भी बड़ा फैसला नहीं लिया जाएगा। समीर मुस्कुराया और उसने हामी भर दी। रजत ने जाते-जाते आँख मारते हुए कहा कि माँ को पता है कि समीर को उनके हाथ की बनी गाजर की खीर और पूरी कितनी पसंद है, इसलिए आज रात के खाने में वही बन रहा है। यह सुनते ही समीर के चेहरे पर एक बच्चे जैसी खुशी आ गई और उसने वादा किया कि वह समय पर पहुँच जाएगा।
शाम का वक्त था। रजत का घर हमेशा की तरह बहुत शांत और सुकून भरा लग रहा था। समीर ने जैसे ही दरवाजे की घंटी बजाई, नेहा ने दौड़कर दरवाजा खोला। “लो आ गए मेरे बड़े भैया!” नेहा की चहकती हुई आवाज ने पूरे घर में एक नई ऊर्जा भर दी। माँ रसोई से बाहर आईं, उनके हाथों में आटे का परथन लगा हुआ था, लेकिन चेहरे पर एक ममतामयी मुस्कान थी। उन्होंने समीर के सिर पर हाथ फेरा और उसे सोफे पर बिठाया। रात के खाने की मेज पर हँसी-मजाक का दौर चलता रहा। नेहा बार-बार रजत को चिढ़ा रही थी कि कल जब वह लड़की के सामने जाएगा तो पसीने से तर-बतर हो जाएगा। समीर भी नेहा का साथ दे रहा था। माँ बस उन तीनों को देखकर मुस्कुरा रही थीं। उन्हें लग रहा था जैसे उनके घर की खुशियाँ जो विकास के धोखे की वजह से कहीं खो गई थीं, वे समीर के आने से दोगुनी होकर लौट आई हैं।
अगले दिन शाम को, रजत का पूरा परिवार और समीर लड़की वालों के घर पहुँचे। लड़की का नाम अंजलि था। अंजलि का परिवार बहुत ही संस्कारी और मिलनसार था। जब अंजलि चाय की ट्रे लेकर ड्राइंग रूम में आई, तो रजत की धड़कनें तेज हो गईं। वह इतना नर्वस था कि उसके हाथों से चाय का कप छलकने ही वाला था कि तभी समीर ने बहुत ही शालीनता से वह कप अपने हाथ में ले लिया और माहौल को हल्का करने के लिए एक मजाक कर दिया। अंजलि ने जब रजत की घबराहट देखी और यह देखा कि कैसे समीर उसे संभाल रहा है, तो उसके होंठों पर भी एक हल्की सी मुस्कान आ गई।
समीर ने एक जिम्मेदार बड़े भाई की तरह अंजलि के पिता से बातचीत शुरू की। उसने अंजलि की पढ़ाई, उसकी रुचियों और उसके भविष्य के सपनों के बारे में बहुत ही सम्मानजनक तरीके से सवाल किए। अंजलि भी समीर के बात करने के तरीके से बहुत प्रभावित हुई। बातचीत के दौरान जब अंजलि को पता चला कि समीर, रजत का सगा भाई नहीं बल्कि एक दोस्त है, तो उसकी आँखों में रजत और उसके परिवार के लिए इज्जत और बढ़ गई। उसे यह समझने में देर नहीं लगी कि जो इंसान अपने दोस्त को सगे भाई से बढ़कर मान सकता है, वह अपनी जीवनसंगिनी को कितना सम्मान और प्यार देगा।
कुछ देर बाद, जब रजत और अंजलि को अकेले में बात करने का मौका मिला, तो अंजलि ने सबसे पहले यही कहा कि वह बहुत खुशकिस्मत है जिसे समीर जैसा दोस्त मिला है। रजत ने मुस्कुराते हुए अंजलि को वह सारी कहानी बताई कि कैसे समीर ने उसकी बहन की जान बचाई थी और कैसे वह इस परिवार का हिस्सा बन गया। अंजलि की आँखों में भी नमी आ गई। उसने कहा कि जहाँ रिश्ते इतने सच्चे और गहरे होते हैं, वहाँ कोई भी लड़की अपनी पूरी जिंदगी खुशी-खुशी बिता सकती है।
बाहर आकर रजत ने समीर की तरफ देखा। समीर ने आँखों ही आँखों में रजत को इशारा किया कि लड़की बहुत अच्छी है। माँ का चेहरा भी खुशी से दमक रहा था। अंजलि के पिता ने भी रिश्ते के लिए अपनी रजामंदी दे दी। लौटते वक्त कार में सब बहुत खुश थे। रजत खिड़की के बाहर देख रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि जिंदगी कितने अजीब तरीके से चलती है। एक तरफ वो था जिसने दोस्ती के नाम पर सिर्फ धोखा और खौफ दिया था, और दूसरी तरफ समीर था जिसने बिना किसी खून के रिश्ते के, सिर्फ अपने प्यार और समर्पण से पूरे परिवार को जोड़कर रखा था।
आज रजत को विश्वास हो गया था कि परिवार सिर्फ वो नहीं होता जिसमें हम जन्म लेते हैं, बल्कि परिवार वो भी होता है जिसे हम चुनते हैं, जो बुरे वक्त में हमारा हाथ पकड़ता है और हमें कभी गिरने नहीं देता। समीर ने कार का रेडियो ऑन किया, जिसमें एक पुराना खूबसूरत गाना बज रहा था। नेहा पिछली सीट पर बैठे-बैठे समीर के कंधे पर सिर रखकर सो गई थी। माँ ने एक नजर पीछे देखा और भगवान का शुक्रिया अदा किया। आज उनके घर में न सिर्फ एक नई बेटी के आने का रास्ता साफ हुआ था, बल्कि उनका परिवार पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और खुशहाल महसूस कर रहा था। रिश्तों की यह नई बुनियाद, जो धोखे की राख से उठकर विश्वास और प्यार की ईंटों से बनी थी, अब कभी नहीं टूटने वाली थी।
क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा दोस्त है जो आपके परिवार का ही एक हिस्सा बन चुका है? अगर हाँ, तो उसे आज ही याद करें!
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लेखिका : मीरा महेश