सिसकते रिश्ते

“पापा! ओ पापा! जल्दी चलिए, दादी बाथरूम में गिर गई हैं। उनके घुटने से बहुत खून बह रहा है और वह दर्द से तड़प रही हैं।” दस साल का रोहन हांफते हुए अपने माता-पिता के बेडरूम के दरवाजे पर खड़ा था। उसकी आंखों में डर और चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही थी। विशाल और … Read more

बेस्ट ड्राइंग – लतिका श्रीवास्तव

ऑफिस से लौटते ही अनुराग ने पंखा फुल स्पीड पर चलाया और सोफ़े पर मोबाइल लेकर पसर गया। “आशी, ज़रा जल्दी चाय बना दो। आज ऑफिस में बहुत काम था… जान ही निकल गई।” आशी भी उसी के साथ ऑफिस से लौटी थी। उसने मुस्कुराकर पहले अनुराग को पानी दिया, फिर स्कूल से लौटे बच्चों … Read more

दोहरे चेहरे – शुभ्रा बैनर्जी 

ममता जी नगर की गणमान्य नेता की पत्नी थीं।नेता जी के साथ पार्टी प्रचार में भी जातीं थीं। पूर्ण रूप से समाज के प्रति जागरूक थीं।पति कंस्ट्रक्शन वर्क में थे।आय अच्छी ही थी। मोहल्ले के लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा थीं वो।जब भी किसी बच्ची का रिजल्ट आया, उसे शाबासी देते हुए कहतीं”देख बिटिया, … Read more

*दोहरे चेहरे* – तोषिका

“आपका ये *दोहरे चेहरे* के बारे में मुझे सब पता है अब अच्छा बनने का नाटक मत कीजिए आप।” सीमा ने अपनी सास लता से बोला। “ये क्या बोल रही हो तुम बहु?” गुस्से में लता ने बोला। “अब झूठ बोलने से कुछ नहीं होगा, मुझे सब दिख भी रहा है और अच्छे से समझ … Read more

शातिर – गीता वाधवानी

मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं पता है ना तुम्हें नमन, रूप ने कहा।   नमन-” हां मैं भी करता हूं ”   रूप -” तो फिर मेरे मम्मी पापा से शादी की बात करो ना, मैं कुछ नहीं कह सकती अपने पापा से, तुम्हें पता है ना वह कितने गुस्से वाले हैं। ”   नमन -” नहीं … Read more

दोहरे चेहरे – खुशी

रंजिता जी आ गई इतनी बड़ी सेविका है।औरतों और बच्चों का वो भी लड़कियों का कितना ध्यान रखती हैं।इनके परिवार में कौन कौन है? एक बेटा राघव उसकी पत्नी शमा और दो पोते विराज और मिहिर प्यारा सा परिवार है।इनके पति कैलाश नाथ जी का कुछ अरसे पहले ही निधन हो गया बीमार रहते थे। … Read more

दोहरे चेहरे – सुदर्शन सचदेवा

शहर में एक प्रसिद्ध चित्रकार रहता था—समर। वह लोगों के चेहरे बनाता था, लेकिन उसकी एक खासियत थी। वह केवल चेहरे की सुंदरता नहीं, बल्कि उस चेहरे के पीछे छिपे भावों को भी अपनी चित्रकारी में उतार देता था। लोग कहते थे कि समर की बनाई तस्वीरें बोलती हैं। एक दिन शहर के सबसे प्रतिष्ठित … Read more

दोहरे चेहरे – विनीता सिंह

राघवेंद्र जी को पूरा शहर ‘सज्जन पुरुष’ कहता था। उनके चेहरे पर हमेशा एक सौम्य मुस्कान तैरती रहती थी। शहर के हर बड़े सामाजिक कार्यक्रम, अनाथालयों के दान समारोहों और धार्मिक आयोजनों में वे अग्रिम पंक्ति में बैठे नजर आते थे। सफेद कड़क कुर्ता-पायजामा, माथे पर चंदन का तिलक और वाणी में ऐसी मधुरता कि … Read more

दोहरे चेहरे – मधु वशिष्ठ

   डोर बेल बजने पर दरवाजा खुला तो सामने मिसेस भसीन को मुस्कुराते हुए खड़ा पाया। उन्हें अंदर आने को कहा तो झट से बोली ,नहीं बहन जी ,आप तो हमारे घर आती नहीं ,मैं भी आपके घर नहीं आऊंगी। मैं अक्सर ऐसा ही करती थी। अरे भाई ,अगर नहीं आना था तो डोर बैल क्यों … Read more

दोहरे चेहरे – डॉ आभा माहेश्वरी

राघव अपने शहर का एक प्रतिष्ठित समाजसेवी माना जाता था। अखबारों में उसकी तस्वीरें छपती थीं, मंचों पर उसका सम्मान होता था और लोग उसे “गरीबों का मसीहा” कहकर पुकारते थे। वह हर समारोह में बड़ी-बड़ी बातें करता—”इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं”, “हर व्यक्ति को सम्मान मिलना चाहिए।” उसकी मधुर वाणी और सादा पहनावा … Read more

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