दोहरे चेहरे – डॉ आभा माहेश्वरी
राघव अपने शहर का एक प्रतिष्ठित समाजसेवी माना जाता था। अखबारों में उसकी तस्वीरें छपती थीं, मंचों पर उसका सम्मान होता था और लोग उसे “गरीबों का मसीहा” कहकर पुकारते थे। वह हर समारोह में बड़ी-बड़ी बातें करता—”इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं”, “हर व्यक्ति को सम्मान मिलना चाहिए।” उसकी मधुर वाणी और सादा पहनावा … Read more