अपने हुए पराए – डाॅ संजु झा

आसमान में सुबह से ही सूरज बादलों के साथ ऑंख-मिचौनी खेल रहा था।कभी बादलों की ओट में बिल्कुल छुप जाता और कभी अचानक से बादलों की ओट से निकलकर सारी पृथ्वी पर अपनी किरणों से उजाला भर जाता। जन्म के बाद से ही विदेश की धरती पर रहने पर भी अल्बर्ट को यहाॅं का मौसम … Read more

अपने हुए पराए – खुशी

अमन और नमन दोनों भाई थे।अमन बड़ा था अच्छी पोजीशन पर था।नमन छोटा था थोड़ा चुलबुला शरारती था।उधर अमन मेहनती काम के प्रति समर्पित इसी कारण वो बहुत ही कम उम्र में बहुत ऊंची पोजीशन पर पहुंच गया।नमन ने भी बीकॉम और मार्केटिंग में mba किया और उसकी भी अच्छी नौकरी लग गई। अब अमन … Read more

अपने हुए पराए – विनीता सिंह

एक गांव में राजू अपनी मां राधा के साथ रहता था ।दोनों खेती करते थे कुछ दिनों बाद राजू की शादी उसकी मां ने सीमा से करा दी सीमा बहुत सुशील संस्कारी थी उसने घर को अच्छी तरह से संभाल लिया। सबका बहुत ध्यान रखती थी और अपनी सासू मां के साथ मिलकर पूरे दिन … Read more

*अपने हुए पराए* – तोषिका

मां, मां कहा हो तुम? जल्दी बाहर आओ। खुशी में चिल्लाती दिया बोली। उधर रसोई से अपनी साड़ी से हाथ सुखाती हुई बाहर आते हुए उसकी मां रमा बोली “क्या हुआ बेटा? सब ठीक तो है ना?” दिया बोली हा मा सब ठीक है, अरविंद को स्कॉलरशिप मिली है, अब वो अमेरिका जाके अपनी आगे … Read more

अपने कब बन गए पराये – गीता वाधवानी  

 दरवाजे पर घंटी बजी। मां शारदा देवी ने दरवाजा खोला और अपने बेटे आयुष्मान को देखकर बोली-” अरे बेटा आज तो जल्दी आ गया पैसे तो तुझे आते आते रात के 8:00 जाते हैं। ”   आयुष्मान -” हां मां आज हम बाहर खाना खाने चलेंगे, आप तैयार हो जाओ।मैं अभी रति से भी तैयार होने … Read more

छोटा भाई है तो भाई ही रह बाप न बन मेरा – मंजू ओमर   

कहाँ से आ रहे हो तुम इतनी रात को, क्यों तू मुझसे सवाल जवाब कर रहा है, देख तू छोटा है मुझसे तो छोटे की तरह रह मेरा बाप बनने की कोशिश न कर। जब से अनिल जी गए है इस दुनिया से तब से रोज का ही किस्सा हो गया है इस घर मे … Read more

मेघवर्णी – रीमा महेन्द्र ठाकुर

कच्ची हांडी में रखी ताजी ताड़ी बरबस उस शहरी युवक को अपनी ओर खींच रही थी । पर उससे ज्यादा आकर्षण उसे मेघा का शरीर कर रहा .देवली फलिए की मेघा किसान झीतरा भीलाल की  की बेटी थी ।तंबई रंग के बीच बीच में आबनूसी रंग का भी हल्का दबाब .उसे मेघवर्णी बना रहा था … Read more

अभिमान के उस पार – सीमा गुप्ता

“ज्ञान का इतना बड़ा भंडार समेटे बैठे हैं आप, पर क्या कभी इस घर की दीवारों में कैद घुटन को भी पढ़ने की कोशिश की है, नीलकंठ?” सुमित्रा जी ने मेज पर कप रखते हुए भारी स्वर में कहा। नीलकंठ जी अखबार के पन्ने पलटते हुए गंभीर आवाज़ में बोले, “सुमित्रा, मैं अखबार की सुर्खियाँ … Read more

परायेपन का सुरक्षा कवच – लतिका श्रीवास्तव 

सावित्री सुशांत का कोई फोन आया ? सुबोध जी ने सुबह से पांचवीं बार वही प्रश्न किया तो सावित्री झुंझला गई। अरे अब काहे करेगा ऊ यहां फोन।अब ता नौकरी भी मिल गई बीबी भी मिल गई।काम खत्म मां बाप का । जब तक पढ़ाई कर रहे थे जब नौकरी नहीं मिली थी परेशान थे … Read more

मेंहदी अभियान – विभा गुप्ता

      बचपन में गर्मी की छुट्टियाँ होते ही हम सब भाई-बहन नानी घर चले जाते थें।दोपहरी में घर के बड़े आराम करते और हम छोटे खूब उधम मचाते।ऐसे में एक दिन हमारी नानी ने हम बच्चों को बगीचे से मेंहदी के पत्ते तोड़ लाने का काम सौंप दिया। हम सभी ने बड़े उत्साह से अपने-अपने रुमाल … Read more

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