वक्त के आईने में – सुनीता मुखर्जी “श्रुति”

आकृति एक छोटे-से कस्बे में अपने तीन भाई-बहनों के साथ रहती थी। माता-पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार सभी बच्चों का पालन-पोषण किया था। माँ घर सँभालती और पिता दिन-रात मेहनत करके किसी तरह धन अर्जन करते थे। आकृति ने बचपन से ही अभावों का जीवन देखा था। उसके मन में कुछ करने की चाह … Read more

कुछ नहीं जाता साथ – शुभ्रा बैनर्जी 

घर की बड़ी बेटी थी अपर्णा।वैसे तो एक बड़ा भाई था,जो डेढ़ साल बड़ा था उससे,पर घर में राज उसी का चलता था।पिता ने हमेशा उसे लाड़ करते हुए यही कहा था “मेरी मां आई है।” और वो उसे मां कहकर ही बुलाते थे।अपनी छोटी बहन सुपर्णा के अलावा शायद ही वह किसी और को … Read more

समय का पहिया – खुशी

जानकीनाथ और रामप्रसाद दोनों भाई थे। जानकीनाथ ने एक कपड़े की दुकान पर काम किया। वहीं से उन्होंने कपड़े के व्यापार का काम सीखा और अपनी साइकिल पर छोटी-सी दुकान शुरू की। मेहनत, लगन और ईमानदारी से वह छोटी-सी दुकान धीरे-धीरे बढ़ती गई और कुछ ही वर्षों में जानकीनाथ एक मिल के मालिक बन गए। … Read more

वक़्त का इंसाफ – श्वेता अग्रवाल

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के बाहर शंभू सिर झुकाए बैठा हुआ था। तभी उसके कानों में ज़ोर से ठहाके की आवाज़ आई। जानी-पहचानी आवाज़ सुनकर उसने जैसे ही सामने की ओर देखा, उसकी आँखें आँसुओं से भर गईं। सामने उसका बेटा गर्व, शहर के सबसे नामचीन वकील माथुर साहब के साथ हँसते हुए आ रहा था। माथुर … Read more

दहलीज़ का देवदूत

 साधना जी ने कुणाल के सिर पर हाथ रखा और बहुत ही दृढ़ स्वर में बोलीं, “बेटा, अगर यह सौ प्रतिशत झूठ है और कोई मुझे ठग भी रहा है, तो मेरे पंद्रह सौ रुपये चले जाएंगे। इससे मेरे घर का चूल्हा बंद नहीं होगा और न ही हम सड़क पर आ जाएंगे। लेकिन सोच, … Read more

भाग्य भरोसे (अर्चना सिंह)

स्नेहा अपने चार वर्षीय बेटे चीकू को लेकर अभी गेट के अंदर ही घुसी थी तो पाया कि मुख्य दरवाजे का ताला टूटा हुआ था। स्नेहा के चेहरे की तो मानो हवाई उड़ रही थी। बहुत हिम्मत करके घर के अंदर घुसी तो देखा सारे सामान इधर उधर फैले -उलझे हुए पड़े थे। जैसे ही … Read more

वक्त का पहिया – दीपा माथुर

“वक्त का पहिया कहाँ रुकता है? है न?” सुधा जी ने मुस्कुराते हुए विद्यार्थियों की ओर देखा और फिर बोलीं— “तो हम कैसे रुक सकते हैं? हमें भी चलना ही होगा, है न? क्यों? हम रुक जाएँ… रील, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और फेसबुक स्क्रॉल करते-करते वक्त को आगे जाने दें और हम पीछे रह जाएँ। फिर … Read more

आँधी में जलती मशाल

शारदा अपनी बेटियों से हमेशा एक बात कहती थी, “मेरी बच्चियों, समाज कहेगा कि लड़की की असली मंजिल उसकी शादी है। लेकिन मैं कहती हूँ कि लड़की की पहली मंजिल उसकी आत्मनिर्भरता है। जब तुम्हारे हाथ में अपनी कलम और अपने पैरों पर खड़े होने की ताकत होगी, तो दुनिया का कोई भी तूफान तुम्हें … Read more

घर की धड़कन

अनामिका की आँखों से पश्चाताप के आँसू बह निकले। उसने रुंधे गले से कहा, “भाभी, हमें माफ कर दीजिए। हम अपनी डिग्रियों और नौकरियों के अहंकार में अंधी हो गई थीं। हम सोचते थे कि सिर्फ पैसा कमाना ही सबसे बड़ी योग्यता है। पर आज आपने हमारी आँखें खोल दीं। हम कुछ घंटे भी इस … Read more

स्वाभिमान की महक

तान्या ने माँ के दोनों हाथ अपने हाथों में थाम लिए। उसकी आँखों में गुस्सा और दर्द दोनों साफ झलक रहे थे। “मम्मी, आखिर कब तक? कब तक आप इस घर में एक बेनाम मजदूर की तरह जीती रहेंगी? क्या आपकी अपनी कोई पहचान नहीं है? क्या आपका अपना कोई सम्मान नहीं है? आप क्यों … Read more

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