वक्त के आईने में – सुनीता मुखर्जी “श्रुति”
आकृति एक छोटे-से कस्बे में अपने तीन भाई-बहनों के साथ रहती थी। माता-पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार सभी बच्चों का पालन-पोषण किया था। माँ घर सँभालती और पिता दिन-रात मेहनत करके किसी तरह धन अर्जन करते थे। आकृति ने बचपन से ही अभावों का जीवन देखा था। उसके मन में कुछ करने की चाह … Read more