सुबह के छह बजे थे। अलार्म बजने से पहले ही सीमा की आँख खुल गई। वह रोज़ की तरह जल्दी-जल्दी उठी, रसोई में गई, चाय बनाई, बच्चों का टिफ़िन तैयार किया और पति राजेश के लिए नाश्ता बनाने लगी। घर के सारे काम निपटाते-निपटाते उसे खुद नाश्ता करने का भी समय नहीं मिलता था।
राजेश एक निजी कंपनी में काम करता था। उसका स्वभाव बहुत गुस्सैल था। छोटी-छोटी बातों पर सीमा को डाँटना, उसकी मेहनत को नज़रअंदाज़ करना और हर गलती का दोष उसी पर मढ़ देना उसकी आदत बन चुकी थी। सीमा वर्षों से यह सब चुपचाप सहती आ रही थी। वह सोचती थी कि परिवार की शांति के लिए चुप रहना ही बेहतर है।
उस दिन भी सब कुछ सामान्य ही लग रहा था। लेकिन अचानक राजेश ने चाय का कप मेज़ पर पटक दिया।
“यह कैसी फीकी चाय बनाई है? तुम्हें इतना भी नहीं आता?” वह ऊँची आवाज़ में बोला।
सीमा ने शांत स्वर में कहा, “शायद चीनी थोड़ी कम रह गई होगी। अभी दूसरी बना देती हूँ।”
“हर दिन कोई न कोई बहाना! आखिर करती क्या हो पूरे दिन?” राजेश ने ताना मारा।
बच्चे सहमे हुए खड़े थे। वे रोज़ यह दृश्य देखते थे, लेकिन कुछ कह नहीं पाते थे। सीमा ने बच्चों की ओर देखा। उनकी डरी हुई आँखों में उसे अपना ही दर्द दिखाई दिया।
उस दिन सीमा स्कूल गई, जहाँ वह अंशकालिक शिक्षिका थी। कक्षा में बच्चों को पढ़ाते समय भी उसका मन बार-बार सुबह की घटना में उलझ जाता। अवकाश के समय उसकी सहकर्मी राधा ने पूछा, “क्या बात है सीमा? आज तुम बहुत उदास लग रही हो।”
पहले तो सीमा टालती रही, लेकिन फिर उसकी आँखों से आँसू बह निकले। उसने वर्षों से दबा हुआ सारा दर्द राधा के सामने रख दिया।
राधा ने गंभीर स्वर में कहा, “सीमा, सहनशील होना अच्छी बात है, लेकिन अन्याय सहना सही नहीं। अगर तुम हमेशा चुप रहोगी, तो सामने वाले को कभी अपनी गलती का एहसास नहीं होगा।”
राधा की बातें सीमा के मन में गूँजती रहीं।
शाम को सीमा घर लौटी। उसने बच्चों का होमवर्क कराया और रात का खाना बनाया। भोजन करते समय राजेश ने फिर किसी छोटी-सी बात पर उसे अपमानित करना शुरू कर दिया।
“तुमसे कोई काम ठीक से नहीं होता। पता नहीं तुम्हारे जैसी औरत…” वह बोल ही रहा था कि सीमा ने पहली बार उसकी बात बीच में रोक दी।
उसकी आवाज़ शांत थी, लेकिन दृढ़ थी।
“बस… बहुत हो गया।”
राजेश चौंक गया। उसने पहली बार सीमा की आँखों में डर नहीं, आत्मविश्वास देखा।
सीमा ने कहा, “मैं वर्षों से तुम्हारी हर बात चुपचाप सुनती रही। मैंने सोचा था कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। लेकिन तुम्हारा व्यवहार दिन-ब-दिन और कठोर होता गया। मैंने इस घर के लिए अपना सब कुछ दिया है। सुबह से रात तक मेहनत करती हूँ, बच्चों की देखभाल करती हूँ, नौकरी भी करती हूँ। फिर भी मुझे केवल अपमान मिलता है। अब मैं यह सब और नहीं सहूँगी।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
बच्चे आश्चर्य से अपनी माँ को देख रहे थे। उनके चेहरे पर पहली बार उम्मीद की एक हल्की मुस्कान दिखाई दी।
सीमा ने आगे कहा, “सम्मान हर इंसान का अधिकार है। यदि इस घर में रहना है, तो एक-दूसरे का सम्मान करना सीखना होगा। मैं झगड़ा नहीं चाहती, लेकिन अब अपने आत्मसम्मान से समझौता भी नहीं करूँगी।”
राजेश के पास कोई उत्तर नहीं था। उसे पहली बार एहसास हुआ कि उसकी कठोर बातें केवल सीमा को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी भीतर तक चोट पहुँचा रही थीं।
उस रात वह देर तक सो नहीं सका। उसे अपने व्यवहार की एक-एक घटना याद आने लगी। उसे महसूस हुआ कि वह अपनी परेशानियों का गुस्सा हमेशा सीमा पर निकालता रहा, जबकि उसने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा।
अगली सुबह वातावरण अलग था। राजेश रसोई में गया और धीरे से बोला, “सीमा… मुझे तुमसे बात करनी है।”
सीमा ने उसकी ओर देखा।
राजेश ने सिर झुकाकर कहा, “मुझसे बहुत गलतियाँ हुई हैं। मैंने तुम्हारे सम्मान की कभी कद्र नहीं की। अगर हो सके तो मुझे एक मौका दे दो। मैं सचमुच बदलना चाहता हूँ।”
सीमा ने तुरंत कुछ नहीं कहा। उसने केवल इतना उत्तर दिया, “विश्वास शब्दों से नहीं, व्यवहार से बनता है।”
दिन बीतते गए। राजेश ने सचमुच अपने व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास शुरू किया। वह घर के कामों में हाथ बँटाने लगा, बच्चों के साथ समय बिताने लगा और सीमा से सम्मानपूर्वक बात करने लगा। धीरे-धीरे घर का वातावरण बदलने लगा। जहाँ पहले हर समय तनाव रहता था, वहाँ अब हँसी सुनाई देने लगी।
एक दिन सीमा की बेटी ने स्कूल में निबंध लिखा—”मेरी माँ मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। उन्होंने मुझे सिखाया कि विनम्र होना अच्छी बात है, लेकिन अपने सम्मान की रक्षा करना उससे भी अधिक आवश्यक है।”
सीमा ने वह निबंध पढ़ा तो उसकी आँखें नम हो गईं। उसे लगा कि उसका साहस केवल उसके लिए नहीं, बल्कि उसके बच्चों के भविष्य के लिए भी आवश्यक था।
उसने मन ही मन सोचा—कई बार जीवन बदलने के लिए ऊँची आवाज़ की नहीं, केवल सही समय पर कहे गए तीन शब्दों की आवश्यकता होती है—
“बस बहुत हो गया।”
#बस बहुत हो गया
लेखिका: डॉ आभा माहेश्वरी अलीगढ