*गुस्सा एक दिन सब बर्बाद कर देगा* – तोषिका

मैने उसको इतनी बार समझाया है कि इतना गुस्सा नहीं करते है, और इसका यही *गुस्सा एक दिन सब बर्बाद कर देगा*। परेशान स्वर में रानी अपने आप से बोली।

आखिर रानी परेशान ना हो तो क्या करे, जैसे जैसे उनका बेटा रवि बड़ा हो रहा था उसका गुस्सा उतना ही बढ़ता जा रहा था और वो हर छोटी बात पर गुस्सा करने लग जाता था। उसकी मां ने उसको समझाया, लेकिन तब वो हा कर देता था और बात में वो ही फिर गुस्से करने लग जाना।

एक दिन रवि बहुत गुस्से में घर में आया और आते ही अपने कमरे जा कर बहुत ज़ोर से दरवाज़ा बंद कर लिया और उधर उसकी मां रानी परेशान होते हुए बोली “बेटा दरवाज़ा खोल, ऐसे मत कर।

मुझसे बात कर क्या हुआ है, ऐसे खुद को नुकसान मत पहुंचा।” तभी उधर से रवि ने चिल्लाते हुए बोला “मां, अभी मुझे किसी से भी बात नहीं करनी है, तुम चली जाओ यहां से।” रानी ने तुरंत बोला “पर बेटा…” इससे पहले वो कुछ बोले रवि एकदम से भड़कते हुए बोला “बोला ना मा मैने, अभी मुझे कोई बात नहीं करनी है।”

रानी को कुछ समझ नहीं आ रहा था फिर उन्होंने बोला “रवि…रवि…र”

कुछ देर बाद जब रवि बाहर निकला अपने कमरे से उसने देखा को उसकी मां ज़मीन पर गिरी हुई है और बेहोश है, रवि ने तुरंत ही उनको हॉस्पिटल लेकर गया और वहां पर डॉक्टर ने उनको देखा और बोला “आपकी मां को दिल का दौरा आया था और अगर आज इनको लाने में एक मिनट भी लेट हो जाता तो इनको बचाना मुश्किल हो जाता”।

रवि ने रोते हुए पूछा “मां अब कैसे है? ठीक तो है ना वो?” डॉक्टर ने बोला “अभी उनकी हालत बहुत गंभीर है, इसीलिए उनको किसी भी बात की चिंता नहीं होनी चाहिए।” रवि एक दम से बोला “लेकिन मैं तो…. ठीक है डॉक्टर मैं ध्यान रखूंगा।”

रवि जो शब्द कहना चाहता था उसको भी कही ना कही पता था कि वो ध्यान रखता है और उसको कही ना कही ये भी पता था कि, आज उसकी मां की ये जो हालत है कही ना कही उसी का दोष है। पहला मां उसकी चिंता में लगी रहती है और दूसरा आज उसकी वजह से मां की जात खतरे में आई है। जिसके लिए उसको खुद पर बहुत पछतावा था।

कुछ घंटों बाद रानी को होश आया और उसने देखा उसका बेटा, उसके पास है और बाकी लोगों से भी आराम से बात कर रहा है अगर वो कोई गलती कर रहे है। रवि ने अपनी मां का हाथ पकड़ा और बोला “मां, मुझे माफ कर दीजिए आज आपकी इस हालत का जिम्मेदार मैं हू,

अगर मैं आज गुस्सा नहीं करता तो आप…” अपनी बात पूरी नहीं कर पाया और इतने में रवि का गला भर आया। तभी उसकी मां ने बोला “बेटा, फिक्र मत कर मैं ठीक हू, तू धीरे धीरे सीख जाएगा मुझे सब पता है”। ये सुनते ही रवि ने अपनी मां को गले लगा लिया।

लेखिका

तोषिका

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