*कुछ बंधन तोड़ देना ही अच्छा होता है* – तोषिका

आपने ऐसा क्यों किया मां? मीरा ने अपनी मां से पूछा। तभी उसकी मां रमा ने बोला “*कुछ बंधन तोड़ देना ही अच्छा होता है* क्योंकि कई बार आत्मसम्मान से ऊपर कुछ नहीं होता है।”

“ऐसा क्या हुआ था मां की आपने पापा को छोड़ दिया?” मीरा ने हैरानी में पूछा।

रमा का उन पुरानी यादों की गलियों में जाने का मन नहीं था जो पूरी काटों से भरी हुई थी पर उसको ये भी पता था कि अब ये सही समय है मेरा को सब सच बता देने का क्योंकि उसका भी हक है अपने पिता के बारे में जान ने का।

*कई साल पहले*

रमा की शादी ज्यादा बड़े खानदान में नहीं हुई थी, लेकिन वो फिर भी खुश थी क्योंकि उसने अपने प्यार से शादी की थी। रमा ने अपनी कहानी सुनाते हुए बोला “बेटा मैं और तुम्हारे पापा बहुत खुश थे, फिर शादी के २ साल के बाद तुम हुई।”

मीरा बहुत ध्यान से अपनी मां को सुन रही थी।

रमा ने अपनी आगे की बात जारी रखी और बताया कि मेरा के होने के १ साल के बाद ही उसके पापा को कंपनी में बहुत अच्छा ऑफर मिला और इसी तरह शुरू में सब अच्छा था पर फिर अचानक से तुम्हारे पापा दफ्तर से देरी से आने लगे ये कहकर कि ऑफिस में काम बढ़ गया है। कुछ समय ऐसा चला, फिर उन्होंने घर आना ही छोड़ दिया रात में सुबह आते थे। उनसे कुछ पूछो तो चिल्लाते हुए अपने कमरे में चले जाते थे।

२ साल ऐसा चला फिर मुझे जिसका डर था वो ही हुआ। तुम्हारे पापा का किसी और के साथ चक्कर चल रहा था और वो और कोई नहीं बल्कि उनकी बॉस थी। जब मैने उनसे ये बात पूछी तो उन्होंने मुझे साफ बोला कि इस से तुम्हे ही फायदा हो रहा है, घर की कमाई भी कितनी अच्छी चल रही है।

मीरा ये सुन कर हैरान हो गई और बोली “क्या सच में मां?”

रमा बोली “बेटा, तुम्हारे पापा एक अच्छे इंसान है, उनको गलत मत लेना बस पैसों के लालच के चलते वो एक ऐसे रास्ते पर चले गए जिस रास्ते पर मैं उनके साथ नहीं चल सकती थी, इसीलिए मुझे ये फैसला लेना पड़ा और मैं तुम्हे अपने साथ ले आई।”

मीरा बोली “पर मां, आपको दुख नहीं होता कि आपके प्यार ने आपको धोखा दिया?”

रमा बोली “बेटा, दुख इस बात का कि उन्होंने मेरे से ज्यादा पैसों को अहमियत दी और कुछ भी है।”

आज भी हम एक रिश्ते से जुड़े हुए है और वो है तुम्हारे माता पिता होने का रिश्ता।

मीरा ने रोते हुए अपनी मां को गले लगा लिया।

तभी रमा बोली, चलो जल्दी तैयार हो जाओ आज तुम्हारे पापा तुमसे मिलने के लिए आ रहे है। साथ ही में ये भी बोली कि तुम्हारे पापा तुमसे बहुत प्यार करते है। हमारा बंधन टूटा है लेकिन तुम दोनों का नहीं और मैं नहीं चाहती कि मैं एक पिता को उसकी बेटी से या अपनी बेटी को उसके पापा से दूर करूं।

रिश्तों का बंधन है ही कुछ ऐसी चीज़ की समझ ही नहीं आते।

#जरूरी नहीं जिस रास्ते पर कोई और चल रहा हो वो सही ही होता है इसीलिए हमें अपनी समझदारी भी दिखानी चाहिए।

लेखिका

तोषिका

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