बंधन – खुशी

मीरा एक सुखी परिवार से थी।सुखी परिवार की परिभाषा का अर्थ था जिसमें हर कोई एक दूसरे को वक्त दे जो एक दूसरे का दर्द समझे ।जहां मां के आवाज लगाते ही सब एक जगह इक्कठा हो जाते और खाना खातें गप्पे मारते दिन भर की बातें साझा करते।पापा शाम को ऑफिस से आते तो कुछ ना कुछ ले कर आते चाहे दस रुपए के चने क्यों ना हो।

पूरा परिवार एक बंधन में बंधा था।पापा रवि एक Pvt फर्म में काम करते थे मां नैना घर में रहती  थी पर वो शाम को ट्यूशन पढ़ाती थी।मीरा 10 में पढ़ती थी।राजन 9 वी में और छोटा विंकु 6 में।सब एक दूसरे से जुड़े थे और दादी शीला ने तो बच्चों को संस्कार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

छोटा सा परिवार था पर प्यार के बंधन में बंधा हुआ था।मीरा कॉलेज के प्रथम वर्ष में थीं अब वो शाम की रसोई पूरी संभालती कॉलेज से आकर पढ़ाई भी करती सबकी लाडली होते हुए भी मीरा अपनी मां जैसे अपने भाइयों को संभालती प्यार देती।सब अच्छे से चल रहा था।

आज रवि के दफ्तर में कार्यक्रम था जिसमें सभी कर्मचारियों के परिवार को भी बुलाया था बच्चों को भी रवि और नैना अपने साथ ले गए । कार्यक्रम अच्छा था सब घर लौट आए। अगले दिन सुबह दफ्तर पहुंचते ही रमेश बाबू ने रवि को बुलाया इधर उधर की बात की और बोले हम तुम्हारी बेटी को अपनी बहु बनाना चाहते हैं

हमे वह बहुत पसंद आई है।रवि बोले सर अभी तो वो छोटी है बी ए के दूसरे साल में है और upsc की तैयारी कर रही है।और कहा आप कहा हम। अरे रवि हमे ऐसी ही सुशील और संस्कारी लड़की चाहिए थी अपने राजेश के लिए।राजेश उन्हें तो हमने कभी देखा ही नही हा वो बाहर रहता है अगले महीने वो आ रहा है

उसी के लिए हमें तुम्हारी बिटिया पसंद आई है और पढ़ाई तो शादी के बाद हो जाएगी ये मेरा वादा है। रमेश बोले तुम अपने घर में बात कर लो अगले हफ्ते हम रिश्ता पक्का करने आएगे।रवि ने घर आ कर अपनी मां और पत्नी को यह बात बताई।दादी बोली बिना लड़का देखे कैसी शादी और दूसरी बात अपनी मीरा 19 की है और राजेश 25 का उमर का फासला देख तू मना कर दे।

मां जी बॉस है कैसे मना करूं फिर मीरा को पढ़ाएंगे भी।नैना बोली मा जी सही कह रही है।लड़का तो मीरा देखेगी उसे पसंद ना आया तो या लड़का बाहर रहता है उसे हमारी बच्ची पसंद नहीं आई तो अगले हफ्ते वो आयेंगे तब देखते है। रवि का मन भी आशंकाओं से भरा था पर वो समझ नहीं पा रहा था क्या करूं।

शनिवार को रमेश अपनी पत्नी माला मां दमयंती और निखिल और पूजा बेटा बेटी के साथ रवि के घर पहुंचे। सभी लोग इतनी अपनाइयत से बाते कर रहे थे कि सब उनके कायल हो गए । रमेश की  मां ने अपने खानदानी कंगन भी मीरा को पहना दिये बिना लड़के के रिश्ता तय हो गया।

इतने तोहफे और मिठाइयां आई कि घर में जगह कम पड़ गई। शादी की तारीख तय हुई और शादी का दिन आ पहुंचा। सारा खर्चा रमेश ने उठाया बड़े होटल में शादी थी। राजेश देखने में अच्छा था सभी रिश्तेदारों में जोड़े की तारीफ की और मीरा के  भाग्य की सराहना की। शादी हो कर मीरा ससुराल पहुंची उसका भव्य स्वागत हुआ सभी रिश्तेदारों ने मीरा की तारीफ की ।मीरा को रस्मो के बाद कमरे में पहुंचाया गया।

कमरे में सब मौजूद था जो शायद मीरा ने कभी पहले नहीं देखा था शायद ।मीरा बेड पर बैठी थी पता नहीं किस पल उसकी आँख लग गई।जब आंख खुली तो उसने देखा कोई दरवाजा बजा रहा है।सोफे पर राजेश सोया पड़ा था।मीरा ने दरवाजा खोला उसकी काम वाली शारदा थी भाभी आपने चेंज नहीं किया वो बोली आप तैयार  हो कर नीचे आ जाए।जी मीरा ने दरवाजा बंद किया वॉशरूम गई ।

वो इतना बड़ा था उसी में ही चेंजिंग रूम और ड्रेसिंग रूम था। वो तैयार हुई और नीचे जाने वाली थी कि राजेश उठ गया।उसने उसे गुडमॉर्निंग विश किया और बोली आपके कपड़े भी निकाल दूं।राजेश बोला listen मुझसे फ्रैंक होने की कोई जरूरत नही है।तुम्हारी कोई इंपॉर्टेंस नहीं है मेरी लाइफ़ में जबरदस्ती मुझे तुम्हारे साथ बांध दिया है।मीरा देखती रह गई अब यहां क्यों खड़ी हो जाओ।

मीरा नीचे आई सब नाश्ते पर बैठे थे।दादी और रमेश जी के पैर छुए तब तक माला भी आ गई टाइट जींस ,टीशर्ट बिल्कुल डिफरेंट लुक था।वो पैर छूने गई तो माला बोली डोंट डु थिस फॉर्मेलिटी ।शारदा नाश्ता लगाओ शारदा ने जल्दी से नाश्ता लगाया और बोली दीदी आप कुछ लेंगी ।

हा शारदा मीरा को चाय नाश्ता दो। सब चले गए मीरा और उसकी दादी सास बैठी थी।वो बोली बेटा मेरे पास आ कर बैठ इस घर का यही हाल है मै और रमेश सिर्फ घर को घर समझते हैं वरना सब के लिए तो ये सराय है मै अकेली रहती हूं सारा दिन अब तू आ गई है तो मेरा दिल लगा रहेगा। 

मीरा उदास थी पहले ही दिन घर वालो का ऐसा व्यवहार और राजेश की बेरुखी और बातों ने उसका सीना छ लनी कर दिया।अगले दिन मीरा को लेने उसके घर वाले आए उससे पहले राजेश और माला दोनों ने उसे हिंदी में समझा दिया कि घर की बात बाहर नहीं जानी चाहिए।

मीरा अपने घर पहुंची चेन की सास ली।दादी और मां ने पूछा सब कैसे है।मीरा रो पड़ी बोली आप लोगों को मैने बहुत मिस किया इसलिए अब मै नहीं जाऊंगी।ऐसा नहीं कहते ल।डो।थोड़ी देर में माला का फोन आया बहुत दिखावा किया जैसे मीरा को कितना चाहती है।

मीरा हा हूं में बात करतीं रही। शाम को रमेश ,माला और राजेश मीरा को लेने आए सबने खाना खाया।राजेश नपा तुला ही बोल रहा था।मीरा ने अपनी किताबें ले ली।जाते जाते माला बोली अब बेटी से 15 दिन बात नहीं होगी ना ही मिलना हो पाएगा।

क्यों बहनजी अरे ये हनीमून पर जा रहे हैं इसलिए।मीरा घर आई तो माला बोली अपना फोन 15 दिन के लिए मुझे दे दो।जी मम्मी जी।माला ने 15 दिन नए नए स्टेटस लगाए ताकि घर वाले खुश हो सके इधर 15 दिन में मीरा को समझ आ गया कि यह जबरदस्ती की शादी है।

राजेश उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं करता और वह उसके साथ रहना भी नहीं चाहता। 15 दिन के बाद राजेश वापस US चला गया और मीरा ने अपनी पढ़ाई शुरू कर दी। मीरा के घर वालो को यही बताया गया कि मीरा की पढ़ाई के कारण मीरा नहीं गई।मीरा ससुराल में ही रहती दादी और रमेश जी तो उससे बात भी करते पर बाकी कोई मुंह भी नहीं लगाता।

सबके आने का जाने का खाने का टाइम अलग था।मीरा को याद आता कैसे अपने घर में शाम को पापा आते ही जमघट लग जाता था।सब कितनी बाते करते यहां तो सिर्फ अकेला पन है सब अपने कमरे में सिमटे है कोई एक दूसरे से बात नहीं करता।

साथ खाता पीता नहीं।बिचारी दादी अकेली पड़ी रहती है अब मीरा दादी के कमरे में ही रहती उनका भी ध्यान रखती और अपनी पढ़ाई करती। ग्रैजुएशन उसका पूरा हो गया पर राजेश अब तक नहीं आया।उसका यूपीएससी का पेपर था ।सेंटर दूर था उसने रमेश जी से कहा पापा मै घर चली जाऊँ ताकि पापा मुझे पेपर के लिए छोड़ दे।

रमेश बोले नहीं मैं ले चलूंगा।हम कल चले जाएंगे परसों पेपर है तो ।अगली सुबह वो और रमेश जी निकल पड़े।रमेश रास्ते में बोले बेटा मुझे माफ कर दो में तुम्हारा गुनहगार हु।मेरा बेटा us में शादी कर बैठा था परंतु मैने उस पर दवाब बनाने के लिए तुमसे शादी करने को कहा।

उसने मतलब में शादी की पेपर साइन करवा वो चला गया आज दो साल हो गए और अब वो मना कर चुका है कि वापस नहीं आएगा।तुम्हारा क्या करना है देख लो।मुझे माफ कर दो बेटा ये बंधन तोड़ दो कुछ बंधन तोड़ देना ही अच्छा होता हैं।तुम अपना पेपर दो ईश्वर तुम्हे कामयाबी दे।

मीरा बुत बन गई ये तो वो जानती थी कि राजेश उसे पसंद नहीं करता पर वो विवाहित है और ये राज उसके माता पिता भी जानते हैं।मीरा ने अपना पेपर दिया और वो रमेश जी के यहां ना जा कर अपने पिता के घर आ गई।सबने पूछा कैसी है अचानक कैसे आ गई।

मीरा बोली मां मै वो बंधन तोड़ कर आ गई हूं।मतलब क्या हुआ मेरी बच्ची  ।मीरा ने सारा सच अपने माता पिता को बता दिया और यह भी की वो डाइवोर्स पेपर साइन कर के आ गई है। रवि बोले बेटा क्यों सहा तूने हम लोगों के लिए की नौकरी चली गई तो गुजारा कैसे होगा।बेटा जहां सम्मान नहीं वहां क्यों रुकी तू।

अगले दिन रवि ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया और रमेश को बोले सर आपकी भी बेटी है कही ईश्वर आपको भी ये सब ना दिखाए जो धोखा आपने हम भोले भाले लोगों को दिया मेरी बेटी का विश्वास भरोसा सब तोड़ दिया। रमेश चुप चाप खड़े थे।रवि घर पहुंचे और बोले बेटी मै बंधन तोड़ आया सदा के लिए ।

मीरा आई एस ऑफिसर बन गई उसकी पोस्टिंग वाराणसी हुई अपने परिवार के साथ वो वहां चली गई।बड़ा बेटा राजन बैंगलोर में नौकरी कर रहा था सॉफ्टवेयर इंजीनियर की और छोटा विकू आई आई टी रुड़की में पढ़ रहा था।कई बार नैना ने मीरा के विवाह का जिक्र निकाला पर रवि कहते उससे पूछे बिना नहीं।

मीरा के सदमे के कारण रमेश की मां चल बसी थी।रमेश का फोन मीरा को आया बेटा दादी तुम्हारे पास कुछ रख गई है पता भेज दो तो कोरियर कर दूं।मीरा भी दादी को चाहती थी उसने पता भेज दिया उस बॉक्स में दो साड़ी और कुछ गहने थे मै सिर्फ तेरी दादी हूं और किसी की नहीं तूने मुझे प्यार दिया सम्मान दिया बेटी मैं इस धोखे में शामिल नहीं थी

फिर भी मुझे माफ करना और एक अच्छा।जीवन साथी देख विवाह करना और अपनी दादी का आशीर्वाद समझ ये पहन लेना।मीरा रो पड़ी।कुछ समय बाद अविनाश का रिश्ता आया जो डिप्टी कलेक्टर थे एक कॉन्फ्रेंस में उनकी पहचान हुई।मीरा के माता पिता ने उन्हें मीरा के साथ हुए धोखे के बारे में बताया

अविनाश बोले गलती उनकी है जिन्होंने छल किया नाकि मीरा की ।अविनाश और मीरा की शादी हो गई आज मीरा ने वही साड़ी और घने पहने दादी का आशीर्वाद समझ कर ।मीरा आज नए बंधन में बंध रही थी पर मजबूत आधार और विश्वास के साथ।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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