कंक्रीट के जंगल में खिली धूप
सुजाता ने हाथ जोड़ लिए। उसकी आँखों से बेबसी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उसने सिसकते हुए कहा, “अंकल जी, आप जो डांटेंगे, मैं सिर झुकाकर सुन लूंगी। लेकिन मेरी मजबूरी तो समझिए। मेरे पति एक निजी कंपनी में हैं और मैं एक बैंक में। इस महंगे शहर में घर का … Read more