कलंकिनी या जीवन दायिनी – शिव कुमारी शुक्ला

दीप्ति सात साल की मासूम बच्ची हतप्रभ खडी थी।उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एकाएक उसके घर में लोगों का आना-जाना क्यों शुरू हो गया। मम्मी पापा अभी कुछ समय पहले ही घर से गये थे कुछ काम करने के लिए उसे मैड के पास छोड़ कर। फिर ये पड़ोसी अंकल घबराए से … Read more

बेटा नालायक, किसकी गलती?

सुना है राधा बहन? तुम्हारी बहू के कारनामे? शीतल जी अपनी पड़ोसन राधा जी के घर पर आकर हाफ्ते हुए स्वर में कहती है  राधा जी:  क्या सुना है बहन? साफ-साफ तो बताओ?  शीतल जी:  अरे तुम्हारी बहु जिसको रील्स बनाने का बड़ा शौक था, जिसकी वजह से उसकी कमाई होनी भी शुरू हो गई … Read more

*कुलकलंकिनी* – तोषिका

ये इस घर की *कुलकलंकिनी* नहीं है। साहिल ने रीमा का हाथ पकड़ते हुए बोला। तो फिर क्या है? उनकी मां ने गुस्से में बोला। साहिल बोला “आप लोग हर बार दीदी से ऐसे क्यों बात करते हो, और आखिर वेस्टर्न कपड़े पहन ने से कोई कुलकलंकिनी कैसे हो सकता है?” साहिल ने अपनी मां … Read more

कुलकलंकिनी – बीना शुक्ला अवस्थी

पूरे गांव में  हलचल मची थी। लोग डॉक्टर दामिनी को देखने दौड़े आ रहे थे। अस्पताल के बाहर काफी भीड़ जमा हो गई थी, सब एक झलक दामिनी को देखना चाहते थे लेकिन अस्पताल में पता नहीं क्यों आज पुलिस लगा दी गई थी और डॉक्टर दामिनी कुर्सी पर बैठी कई वर्ष पीछे जाकर गुम … Read more

कुलकलकंनी – सुदर्शन सचदेवा

सुबह की पहली किरण आँगन में उतर आई थी, लेकिन घर के भीतर पसरा सन्नाटा किसी अमावस्या की रात जैसा था। तुलसी के चौरे पर रखा दीपक बुझ चुका था और उसके पास बैठी शारदा की आँखों में भी जैसे उजाला समाप्त हो गया था। उसने धीरे से अपने माथे का सिंदूर छुआ। वर्षों से … Read more

कुलकलंकिनी – खुशी

मंदा ओ मंदा कहा मर गई कब तक सोती रहेगी।कल्याणी चिल्लाते हुए मंदा के कमरे में आई पर मंदा अपने बिस्तर पर नहीं थी।पास एक चिट्ठी पड़ी थी भाभी मै अपने सपनों को पूरा करने जा रही हूं।मै तुम्हारे शराबी भाई के साथ अपना जीवन नरक नहीं बना सकती क्योंकि मां बाबा के जाने के … Read more

कुलकलंकिनी – डाॅ संजु झा

जीवन की आपाधापी में  व्यक्ति अपनी इच्छाओं और महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए गलत कदम उठाने से भी नहीं डरता है।परिणामस्वरूप अपनी जिंदगी तो बर्बाद होती ही है, परिवार और समाज में भी बदनामी हो जाती है।उसके कुकृत्यों के कारण समाज उसे कुलकलंक या कुलकलंकिनी का नाम दे देता है। सोलह वर्षीया रीना बड़ी-बड़ी ऑंखें, … Read more

कुल पर कलंक – गीता वाधवानी

 सरला देवी ने निराशा और गुस्से में चीखते हुए कहा-” इंस्पेक्टर साहब,ले जाइए इसे मेरी आंखों के सामने से और हो सके तो फांसी पर लटका दीजिए। इसने तो हमारे कुल की इज्जत की धज्जियां उड़ा दी। इस कुल कलंकिनी को जल्द से जल्द सजा दिलवाइए।”   गर्विता-” मम्मी यह तुम क्या कह रही हो, कौन … Read more

कुल कलंकिनी। – मधु वशिष्ठ

            बैंक्विट हॉल में अपने भाई राहुल की शादी की रिसेप्शन में रीना ही सबका स्वागत करने के लिए गेट पर खड़ी थी। डीजे पर रीना का बेटा नाच रहा था। रीना का डायमंड का लंबा हार, बाहर खड़ी लंबी सी कार , उसका मेकअप करा हुआ  सुंदर और मासूम चेहरा देखकर आज उसके चाचा चाचा … Read more

कुलकलंकिनी :- नंदिनी – रानू जैन

गाँव बिरनपुर में सरपंच दीनदयाल की बेटी नंदिनी को देखकर लोग कहते, “इससे अच्छी बहू पूरे जिले में नहीं मिलेगी।” संस्कार, सेवा, सलीका – सब में अव्वल। हाथ का बना आम का अचार जिसकी महक से पूरा मोहल्ला पूछता, “दीनदयाल जी, ये किसने बनाया?” नंदिनी मुस्कुराकर सिर झुका लेती।  18 की उम्र में उसकी शादी … Read more

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