वक्त का पहिया – दीपा माथुर
“वक्त का पहिया कहाँ रुकता है? है न?” सुधा जी ने मुस्कुराते हुए विद्यार्थियों की ओर देखा और फिर बोलीं— “तो हम कैसे रुक सकते हैं? हमें भी चलना ही होगा, है न? क्यों? हम रुक जाएँ… रील, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और फेसबुक स्क्रॉल करते-करते वक्त को आगे जाने दें और हम पीछे रह जाएँ। फिर … Read more