सुनंदा देख रही थी कि आज साक्षी खाना बनाते-बनाते गुनगुना रही है उसके चेहरे पर खुशी झलक रही थी। पता नहीं क्या बात है जो आज बहू इतनी खुश है । घर में सुनंदा का बेटा आदित्य और बहू साक्षी थी। सुनंदा और बहू की अच्छी निभती थी। साक्षी बहुत अच्छी थी, घर में अच्छा माहौल था। सास बहू वाला कोई झगड़ा नहीं था।
अभी 2 साल पहले ही बेटे की शादी हुई है। शादी के समय सुनंदा बहुत घबरा रही थी कि पता नहीं बहू कैसी आएगी मेरे साथ ढंग से रहेगी कि नहीं ,पता नहीं कहीं हो मुझे घर से निकाल न दे ,पता नहीं मेरे साथ कैसा व्यवहार करेगी ।यदि हमारी पटरी उससे नहीं बैठ पाई तो क्या होगा, मैं कहां जाऊंगी, क्या करूंगी ,
यह सब सोच सोच के सुनंदा बहुत डर रही थी। क्योंकि आजकल सास बहू का ऐसा ही चल रहा है चारों तरफ से बस यही सब सुनने को मिल रहा है।
इसकी बहू ने सास के साथ ऐसा किया और ऐसा किया घर से निकाल दिया । लेकिन जब साक्षी घर में ब्याह के आई तो साक्षी की व्यवहार से धीरे-धीरे सुनंदा का दिल जीत लिया उसका व्यवहार सुनंदा के प्रति बहुत अच्छा था। पूरा मान सम्मान देती थी सुनंदा को। इसके व्यवहार से खुश होकर सुगंधा भी साक्षी को बहुत प्यार करती थी।
साक्षी के माता-पिता नहीं थे भाई भाभी ने पाला था और शादी की थी । मां के प्यार को तरसी थी बेचारी। यहां थोड़ा सा सुनंदा का प्यार पाकर और निहाल हो गई साक्षी। आपस मे सास बहू का झगड़ा तो होता है लेकिन हर घर में ऐसा नहीं होता कभी-कभी सास बहू दोनों की समझदारी से भी रिश्ता अच्छा बन जाता है। और कहीं बे वजह ही रिश्ता खराब हो जाता है ।
सुनंदा का डर जाता रहा साक्षी के अच्छे व्यवहार से सभी खुश थे।एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखती थी साक्षी। और यहां आदित्य की भी अभाव में पलकर बड़ा हुआ था । पिता बचपन में ही चले गए थे माँ ने अकेली आदित्य को मुश्किलों से पाल पोस कर बड़ा किया था ।
सुनंदा स्कूल में टीचर थी पूरी मेहनत करके पढ़ाई लिखाई करवाई थी आदित्य की।अब आदित्य आई टी कंपनी में नौकरी करता था। अच्छी पत्नी मिल जाने से अदिति की जिंदगी भी सुकून से बीत रही थी। उसको मां की चिंता नहीं थी क्योंकि साक्षी घर और माँ दोनों को संभाल लेती थी ।
आदित्य बस मेहनत कर रहा था कि कुछ पैसे जोड़कर एक छोटा सा आशियाना बना ले। इसके लिए वह भरपूर कोशिश कर रहा था और बचत भी खूब करता था।
शादी के 2 साल बीत गए थे लेकिन सुनंदा यह देखती थी कि आदित्य साक्षी को कहीं घूमने फिर नहीं ले जाता है। वह आदित्य से कहती रहती थी बेटा बहू को कहीं घूमाने फिराने बाहर ले जाया करो कभी कुछ दिला लाया करो । कभी कुछ उपहार दे दिया करो । उसके लिए लो तुमसे कुछ कहती नहीं है तो इसका क्या मतलब है आदित्य अच्छा माँ कह कर टाल देता था। साक्षी कुछ कहती तो नहीं थी लेकिन मन तो उसका भी करता था
कि आदित्य उसके जन्मदिन पर या शादी की सालगिरह पर कुछ तोहफा लाकर दे । लेकिन नहीं आदित्य कभी कुछ नहीं लाता था। जबकि कोई खास दिन होता था साक्षी मन मे आस लगाया रहती थी शायद आदित्य कुछ लेकर आए । लेकिन आदित्य का खाली हाथ देकर साक्षी मन मसोसकर रह जाती थी।
आज आदित्य और साक्षी को आदित्य के एक दोस्त अमित के यहां पार्टी में जाना था। आदित्य के दोस्त अमित की शादी की सालगिरह की पार्टी थी। दोनों पार्टी में गए पार्टी की शुरुआत थी कि दोस्त अमित ने अपनी पत्नी को एक सुंदर सी सोने की चेन गले में पहनाया।कमरा तालिया की गडगडाहट से गूंज उठा।तभी साक्षी की नजर आदित्य से टकराई, शायद नज़रों से किसी तरह की उम्मीद कर रही थी साक्षी आदित्य से। पार्टी खत्म हुई दोनों घर आ गए ।
अगले महीने साक्षी की जन्मदिन था लेकिन बस सब खामोशी से बीत जाने वाला था। आदित्य ऑफिस से निकला तो मोटरसाइकिल से वापस घर आने के लिए रास्ते में बारिश होने लगी। वह सड़क के किनारे एक शेड के नीचे खड़ा हो गया बारिश के रूकने के इंतजार में।
वहीं पर शेड के नीचे ही तीन-चार ठेले वाले कुछ आर्टिफिशियल ज्वेलरी की दुकान लगाकर खड़े थे। कुछ लोग खरीद रहे थे उनमें से एक व्यक्ति कानो के झुमके दिखाने को कह रह रहा था। उसमें से एक व्यक्ति कहने लगा भैया कानों के जरा बड़े झुमके दिखाना कल हमारी पत्नी का जन्मदिन है उसे देना है। अच्छा भैया। वहां खड़े दूसरे व्यक्ति ने कहा अरे पत्नी को जन्मदिन पर इतने सस्ते झुमके दोगे ,
तो क्या हुआ जहां प्यार हो वहां पैसे नहीं देखे जाते। अब सोने की नहीं खरीद सकता तो क्या हुआ नकली ही सही तोहफा तो तोहफा होता है यही तो रिश्तो की जमा पूंजी होती है भाई। मैं पत्नी का जन्मदिन याद रखना रखता हूं और गिफ्ट छोटा ही सही क्या हुआ उपहार तो है ना इसमें हमारा प्यार है पति-पत्नीके लिए।
आदित्य वहां खड़ा दोनों की बातें सुन रहा था उसे लगा हां यह तो सही कह रहे हैं कि जरूरी है कि महंगे तो भी खरीदे जाएं ।आज तक मैं भी साक्षी के लिए कुछ नहीं खरीदा यह और बात है कि साक्षी ने कभी कुछ कहा नहीं। क्या मैं भी साक्षी के लिए खरीद लूं क्या उसका भी जन्मदिन तो आने वाला है । देखता हूं क्या प्रतिक्रिया देती है साक्षी।
आज साक्षी का जन्मदिन था आदित्य ने ऑफिस से लौटते वक्त इस ठेले से एक जोड़ी झुमके खरीदें ।।और एक डिब्बी लेकर उसमें रख दिया । साथ मे एक फूलों का गजरा भी खरीदा और साक्षी को फोन किया साक्षी सिर्फ रोटियां बना लेना सब्जी में लेकर आ रहा हूं ,और हम लोग साथ बैठकर खाना खाएंगे। माँ को पहले खाना खिला देना। मैंने तुम्हारे लिए एक गिफ्ट भी लिया है। आदित्य आया तो साक्षी ने मुस्कुरा ते हुए दरवाजा खोला,आदित्य अंदर आया मां कहां है मां खाना खाकर सो गई। अच्छा यह लो सब्जी और खाना लगाकर कमरे ये ले आओ वही खाना खाएगें।
कमरे मे जाते ही साक्षी ने कहा और मेरा गिफ्ट आपने कहा था न कि गिफ्ट लाया हूँ तुम्हारे लिए। आदित्य ने संकोच से वो डिब्बी साक्षी के सामने कर दी। मंहगी नहीं है साक्षी, कोई बात नहीं आदित्य। पहनकर जरा दिखाओ। साक्षी ने डिब्बी खोली तो उसमें झुमके थे बहुत सुन्दर है आदित्य। साक्षी झूमके
पहनने लगी तो आदित्य ने पीछे से उसके बालो मे गजरा लगा दिया। पसंद आए साक्षी सोने के नहीं है ,कोई बात नहीं आदित्य मुझे तो तुमसे उपहार चाहिए था सोने के हो ये जरूरी नहीं है। बहुत सुन्दर है आदित्य, आदित्य का सारा संकोच जाता रहा। सोचने लगा कितनी अच्छी है साक्षी छोटे से उपहार से ही खुश हो गई।
दूसरे दिन साक्षी ने सुनंदा को बताया माँ जी कल जन्म दिन पर आदित्य ने मुझे ये झुमके गिफ्ट मे दिए है। अच्छा तभी तू इतनी खुश नजर आ रही है। चलो आदित्य को अकल तो आई। सुनंदा बोली बेटे से चलो तुम्हे रिश्तो की समझ तो आई बेटा साक्षी बहुत अच्छी है। लेकिन माँ वो सोने के नहीं है एक नकली झुमका है। इतने मे ही साक्षी खुश हो गई। बेटा जहाँ प्यार हो न वहाँ पैसे नहीं देखे जाते दिल देखा जाता है। और साक्षी तो इतनी तो समझदार है। बेटा ऐसे ही छोटे मोटे तोहफे से ही पत्नियां खुश हो जाती है। तुम उससे और वो तुमसे बहुत प्यार करते हो। और अच्छा सा तोहफा देना चाहते हो लेकिन इतनी मंहगाई मे नही दे पाते हो तो ये छोटे मोटे तोहफे ही आपस मे प्यार बढाते है बेटा। आपसी रिश्तों की यही जमा पूजीं सारी उम्र काम आती है बेटा। हाँ मा तुम सही कह रही हो। देख आदित्य आज साक्षी कितनी खुश है। उसके चेहरे से खुशी छलक रही है। मै तो तुम दोनों को खुश देखकर खुश हो लेती हूँ मुझे और क्या चाहिए।
आदित्य ने आज साक्षी को खुश देखकर ये निश्चय किया कि चाहे छोटा ही सही साक्षी के जन्म दिन पर और शादी के सालगिरह पर कोई तोहफा जरूर देगा। अपने रिश्ते को एक नया आयाम देने के लिए।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
4 जुलाई